Chapter 1 –भारत का सामाजिक एवं सांस्कृतिक पुनर्जागरण Exercise Solution
फिर से जाने :-
राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज की स्थापना 20 अगस्त, 1928 ई. को की।
स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना 1875 ई. में मुंबई में की।
विरजानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती के गुरु थे।
‘विश्व धर्म सम्मेलन’ अमेरिका के शिकागो शहर में 11 सितंबर, 1893 ई. में हुआ।
महर्षि अरविंद घोष 1908 ई. में गिरफ्तार हुए।
डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार का संबंध दो क्रांतिकारी संस्थाओं ‘अनुशीलन’ व ‘युगांतर’ से था।
डॉ हेडगेवार को ‘असहयोग आंदोलन’ में सहभागिता के कारण एक वर्ष की सजा हुई।
डॉक्टर अंबेडकर संविधान निर्माण के प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।
मिलान कीजिए —
राजा राममोहन राय
स्वामी दयानंद
डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार
महर्षि अरविंद घोष
डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर
पांडिचेरी
महाड़
नागपुर
सत्यार्थ प्रकाश
संवाद कौमुदी
उत्तर –
राजा राममोहन राय
स्वामी दयानंद
डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार
महर्षि अरविंद घोष
डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर
संवाद कौमुदी
सत्यार्थ प्रकाश
नागपुर
पांडिचेरी
महाड़
आइए विचार करें :
प्रश्न 1. राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के द्वारा किन सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान चलाया? विस्तार से चर्चा करें।
उत्तर – राजा राममोहन राय ने 20 अगस्त 1828 ई. को ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना की। राजा राममोहन राय ने ब्रह्म समाज के द्वारा निम्नलिखित सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध अभियान चलाया –
सती प्रथा का उन्मूलन – राजा राममोहन राय ने सती प्रथा का इतना उग्र विरोध किया कि लॉर्ड विलियम बैंटिक को एक आज्ञा पत्र जारी कर 1829 ई. में सती प्रथा पर रोक लगाकर ‘सती प्रथा निषेध कानून’ को पूरे भारत में लागू करना पड़ा।
नारी की दशा में सुधार – उन्होंने नारी पर किए जाने वाले अन्याय और अत्याचार का विरोध किया एवं नारी स्वतंत्रता, नारी अधिकार और नारी शिक्षा पर बल दिया। उन्होंने स्त्री पुरुष के अधिकारों में समानता पर बल दिया।
जाति प्रथा का विरोध – उनके अनुसार जाति प्रथा सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती है।
व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा अधिकारों के प्रबल समर्थक – उनका मानना था कि राज्य को निर्बल तथा असहाय व्यक्तियों की रक्षा करनी चाहिए।
मानवता एवं विश्व बंधुत्व – वे विश्व बंधुत्व के उपासक थे और मत-मतान्तरो से ऊपर उठकर मानव धर्म के चिंतक भी थे।
प्रश्न 2. आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन पर चर्चा करें।
उत्तर – हिंदू धर्म की श्रेष्ठता पर बल देते हुए आर्य समाजियों ने ‘शुद्धि आंदोलन’ आरंभ किया। जिसका उद्देश्य था ‘हिंदू धर्म से अन्य धर्मों में गए लोगों को वापस हिंदू धर्म में लाना।’ इस आंदोलन की वजह से धर्मांतरण बंद हो गया।
प्रश्न 3. महर्षि अरविंद की सांस्कृतिक राष्ट्रीयता पर विचार करें।
उत्तर – महर्षि अरविंद घोष ने राष्ट्रीयता को आध्यात्म तथा मानवता से जोड़ा है। उनका मानना है कि व्यक्ति कितने भी भिन्न हो परंतु राष्ट्रप्रेम उन्हें एकता के सूत्र में बांध देता है। उनके राष्ट्रीय विचार उनके लेख ‘वंदेमातरम्’ में मिलते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीयता मानवीय अस्तित्व का आधार है। राष्ट्रीयता अपने आप में उच्चतम मूल्य बन जाता है जिसके आगे व्यक्तिगत मूल्यों की महत्ता नहीं रह जाती है। उनका मानना है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है। अरविंद के अनुसार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन राजनीतिक था परंतु उसका मूल सनातन धर्म में निहित आध्यात्मिकता में समाहित था।
प्रश्न 4. नारायण गुरु एवं डॉ अंबेडकर के अछूतों के वंचितों के उद्धार के प्रयासों पर चर्चा करें।
उत्तर – नारायण गुरु ने वंचित हो गए अछूतों के उद्धार के लिए कई प्रयास किए तथा उन्होंने आह्वान किया कि सभी लोग अच्छी शिक्षा प्राप्त करें ताकि सभी को समान अवसर प्राप्त हो सके उन्होंने वंचित वर्ग के लोगों में आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता पैदा की। उन्होंने आह्वान किया था मानव मात्र के लिए एक धर्म एक जाति और एक ईश्वर
डॉ. अंबेडकर आजीवन वंचितों के उद्धार के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने अछूतों के वंचितों के लिए निम्नलिखित प्रयास किए।
संविधान के अनुच्छेद 17 के अंतर्गत छुआछूत पर प्रतिबंध लगाना।
उन्होंने भारत में प्रचलित वर्ण व्यवस्था, छुआछूत, लिंग व जाति के आधार पर भेदभाव का विरोध किया।
उन्होंने महाराष्ट्र के महाड़ स्थान पर दलितों को सार्वजनिक चवदार तालाब से पानी पीने और इस्तेमाल करने का अधिकार दिलाने के लिए सत्याग्रह किया।
उनका संपूर्ण जीवन अन्याय, भेदभाव व शोषण से संघर्ष करते हुए बीता।
प्रश्न 5. डॉ हेडगेवार के भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण में योगदान पर चर्चा करें।
उत्तर – डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार बचपन से ही राष्ट्रीय एवं क्रांतिकारी विचारों के देशभक्त थे। उन्होंने बहुत सारे आंदोलनों में भाग लिया और कई बार जेल भी गए। उन्होंने हिंदू समाज में व्याप्त जाति प्रथा, अस्पृश्यता एवं खंडित मानसिकता को सामाजिक एवं राष्ट्रीय अवनति का मूल कारण माना। उन्होंने लोगों की सहायता के लिए स्वयंसेवक संघ का निर्माण किया। केशव राव की लोकमान्य तिलक के विचारों में पूरी आस्था थी। इसीलिए वे उनके अनुयाई बन कर कांग्रेस के बहुत सारे आंदोलनों में कूद पड़े।
प्रश्न 6. स्वामी विवेकानंद के विचारों का युवाओं पर क्या असर पड़ा?
उत्तर – स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवाओं में अनंत ऊर्जा होती है और उसको सही दिशा मिलने पर राष्ट्र का विस्तार और विकास हो सकता है। उन्होंने युवा वर्ग को चरित्र निर्माण के 5 सूत्र दिए — आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता, आत्मज्ञान, आत्मसंयम और आत्मत्याग। उन्होंने युवाओं में भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के प्रति गौरव की भावना उत्पन्न करके उनको राष्ट्रहित के लिए प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।”
प्रश्न 7. प्रार्थना समाज के योगदान पर चर्चा करें।
उत्तर – भारत के सबसे पहले समाज सुधारक गोपाल हरी देशमुख थे, जिन्हें ‘लोकहितवादी’ भी कहा जाता है। 1867 ई. में ब्रह्म समाज से प्रभावित होकर आत्माराम पांडुरंग ने ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना की। प्रार्थना समाज का उद्देश्य अछूतों, वंचितो तथा पीड़ितों की दशा में सुधार करना तथा जाति व्यवस्था एवं रूढ़िवाद का विरोध करना था। प्रार्थना समाज ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा विवाह, स्त्री शिक्षा का भी समर्थन किया। रानाडे ने महाराष्ट्र में ‘विधवा पुनर्विवाह संघ’ की स्थापना की। उन्हीं के प्रयत्नों से ‘ढक्कन एजुकेशनल सोसाइटी’ की स्थापना हुई और उनके शिष्य गोपाल कृष्ण गोखले ने ‘सर्वेंट ऑफ़ इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। प्रार्थना समाज का भारतीय पुनर्जागरण के इतिहास में अहम योगदान हैं।
0 Comments