=================================================
HARYANA BOARD OF SCHOOL EDUCATION, BHIWANI
=================================================
खण्ड क
1. हड़प्पा सभ्यता की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता थी-
(ख) व्यापार
(ग) कला
(घ) पशुपालन
उत्तर-
(क) नगर योजना।
2. प्रयाग प्रशस्ति में किस शासक की विजय का वर्णन किया गया है?
(ख) सम्राट अशोक
(ग) समुद्रगुप्त
(घ) चंद्रगुप्त
उत्तर-
(ग) समुद्रगुप्त ।
3. महाभारत की रचना मूल रूप से किस भाषा में लिखी गई थी?
(ब) संस्कृत में
(स) पालि में
(द) प्राकृत में
उत्तर
(ब) संस्कृत में
4. 'त्रिपिटक' किस धर्म से सबध रखता है?
(ख) जैन धर्म
(ग) इस्लाम धर्म
(घ) बौद्ध धर्म
उत्तर-
(घ) बौद्ध धर्म।
5. किताब-उल-हिंद की भाषा कौन सी है?
(ब) अरबी
(स) उर्दू
(द) संस्कृत
उत्तर-
(ब) अरबी।
6. निज़ामुद्दीन औलिया' का संबंध किस सूफी सिलसिले से था?
(ख) सुहारावर्दी
(ग) कादरी
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क) चिश्ती।
7. सर्वप्रथम विजयनगर की यात्रा पर आने वाला विदेशी यात्री कौन था?
(ख) निकोली द कोन्टी
(ग) डोमिंगो पेस
(घ) नूनिज
उत्तर-
(ख) निकोली द कोन्टी
8. सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में भारत की कितने प्रतिशत आबादी शहरों में रहती थी?
(ख) 10%
(ग) 15%
(घ) 20%
उत्तर- (ग) 15%
9. बम्बई दक्कन में कौन-सी राजस्व प्रणाली लागू की गई?
(ख) महलबाड़ी
(ग) स्थाई बंदोबस्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-
(क) रैयतवाड़ी
10. सहायक संधि प्रणाली कितने तैयार की?
(ख) लॉर्ड डलहौजी
(ग) कैनिंग
(घ) लार्ड मिण्टो
उत्तर-
(क) लॉर्ड वेलेजली
11. गाँधी-इर्विन समझौता कब हस्ताक्षरित हुआ?
(ख) 1930
(ग) 1931
(घ) 1932
उत्तर- (ग) 1931.
12. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कौन-सा शब्द निहित नहीं है?
(ख) राजतंत्र
(ग) धर्मनिरपेक्ष
(घ) प्रजातांत्रिक
उत्तर-
(ख) राजतंत्र
निर्देशः निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में या वाक्य में दीजिए-
13. 1857 ई० का विद्रोह कब और कहाँ से शुरू हुआ था?
उत्तर- 10 मई, 1857 ई० को मेरठ छावनी से।
14. पुराणों की संख्या कितनी है?
उत्तर- 18
15. किस हड़प्पाई नगर की खोज सबसे पहले हुई थी?
उत्तर- हड़प्पा।
निर्देशः रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए-
16. हड़प्पा सभ्यता की लिपि में चिन्हों की संख्या से के बीच हैं।
उत्तर-375-400
17. 'हर्षचरित' कन्नौज के शासक की जीवनी है।
उत्तर- हर्षवर्धन।
18. अशोक के अभिलेख लिपियों में लिखे गए थे।
उत्तर- ब्राह्मी और खरोष्ठी।
निर्देशः नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) द्वारा अंकित किया गया है। इन दोनों कथनों को ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए विकल्पों (a), (b), (c) एवं (d) में से उत्तर के रूप में सही विकल्प चुनिए।
19. अभिकथन (A): हड़प्पाई मुहर सम्भवतः हड़प्पा सभ्यता की सबसे विशिष्ट पुरावस्तु है।
कारण (R) : ये मोहरें सोने एवं चाँदी की बनी होती थी।
(a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
(d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
उत्तर-(c)
20. अधिकथन (A) कृषि क्षेत्रों को किलेबंद भू-भाग में समाहित किया जाता था।
कारण (R) : इसका मुख्य उद्देश्य प्रतिपक्ष को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था।
- (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
- (b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
- (d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
उत्तर-(a)
21. अभिकथन (A): 1929 में दिसम्बर के अन्त में कांग्रेस ने अपना वार्षिक अधिवेशन लाहौर शहर में किया।
कारण (R) : भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरु हुआ।
- (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
- (b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
- (c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
- (d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
- संगम साहित्य की रचना तमिल भाषा में की गई थी। संगम साहित्य के संरक्षण और सृजन में पांड्य शासकों का महान योगदान शामिल है। संगम साहित्य में ऐसी कविताएँ भी शामिल है जो सरदारों का विवरण देती है तथा इनसे यह भी पता चलता है कि सरदारों ने अपने स्त्रोतों का संकलन और वितरण किस प्रकार किया। सिलप्पादिकारम् संगम साहित्य का एक प्रमुख महाकाव्य है।
- (1) साधारण तौर ये भूमि अनुदान ब्राह्मणों या धार्मिक संस्थाओं को दिए गए थे।
- (ii) महिलाओं को भूमि अनुदान देने का अधिकार नहीं था परन्तु चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावतीगुप्त ने भूमि अनुदान किया था। यह इतिहास में भूमि अनुदान का विरला उदाहरण है।
- (iii) जो भूमि अनुदान के रूप में दी जाती थी, वह कर मुक्त भूमि होती थी।
- वंश परंपरा को आगे बढ़ाना:
- तत्कालीन समाज में पुत्रों को ही वंश परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था।
- स्त्री की स्थिति:
- समाज में स्त्री की स्थिति को निम्न माना जाता था और उन्हें सत्ता या संपत्ति का हकदार नहीं समझा जाता था। पुरुषों को ही इसके योग्य समझा जाता था।
- उत्तराधिकार विवादों से बचाव:
- विशिष्ट परिवारों के माता-पिता नहीं चाहते थे कि उनके बाद संपत्ति या राजगद्दी के उत्तराधिकार को लेकर कोई झगड़ा हो, इसलिए पितृवंशिकता के आदर्श को अपनाया जाता था।
- इस्लाम धर्म में कुछ आध्यात्मिक लोगों का रहस्यवाद और वैराग्य की तरफ झुकाव बढ़ा, इन्हें सूफ़ी कहा जाने लगा। कुछ विद्वानों का मानना है कि सूफ़ी शब्द 'सूफ' शब्द से बना है जिसका अर्थ है 'ऊन' अर्थात् वे लोग जो खुरदरे ऊनी वस्त्र पहनते हो। अन्य विद्वान इस शब्द की उत्पत्ति 'सफा' से मानते हैं. जिसका अर्थ है साफ। इसके अर्थ और उत्पत्ति के विषय में विद्वान एकमत नहीं है।
- उन्हें राय (विजयनगर के शासक) द्वारा प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र दिए जाते थे।
- वे किसानों, शिल्पकारों तथा व्यापारियों से भू-राजस्व व अन्य कर वसूल करते थे।
- वे राजस्व का कुछ भाग व्यक्तिगत उपयोग तथा घोड़ों और हाथियों के रख-रखाव के लिए अपने पास रख लेते थे।
- मुसीबत के समय वे राजा को सैनिक सहायता भी प्रदान करते थे।
- वे वर्ष में एक बार राजा को उपहार देने के लिए राजदरबार में उपस्थित होते थे और राजा नियंत्रण रखने के लिए समय-समय पर उनका तबादला भी करते रहते थे।
- (i) गाँव के विकास के लिए सामुदायिक कार्यों को संपन्न करना।
- (ii) प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का उचित प्रबंध करना।
- (iii) पंचायत का एक बड़ा काम यह सुनिश्चित करना था कि गाँव में रहने वाले अलग-अलग जातियों के लोग अपनी जाति के नियमों का पालन करे।
- (iv) पंचायतों को जुर्माना लगाने और समुदाय से निष्कासित करने जैसे गंभीर दंड देने का भी अधिकार होता था।
- (v) पंचायत गाँव के दीवानी झगड़ों को भी सुलझाती थी।
- 1857 ई० के विद्रोह की सबसे अधिक व्यापकता उत्तर भारत में देखी गई थी। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अंग्रेजी सरकार ने महालवाड़ी भूमिकर प्रणाली को लागू किया था। यह प्रणाली काफी दोषपूर्ण थी। इसमें किसानों का अत्यधिक शोषण होता था तथा इनपर कठोर अत्याचार हुए। इस कारण किसान भी 1857 ई० के विद्रोह में शामिल हो गए थे।
- (1) कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज्य' को अपना मुख्य लक्ष्य घोषित किया।
- (ii) प. जवाहर लाल नेहरू को अधिवेशन का अध्यक्ष बनाकर राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व नवयुवकों को सौंपा गया।
- (iii) 26 जनवरी 1930 ई. का दिन पूरे देश में प्रथम स्वतन्त्रता दिवस के रूप में मनाने का निश्चय किया गया।
- (iv) 31 दिसम्बर 1929 की आधी रात को रावी नदी के तट पर भारतीय स्वतन्त्रता का प्रतीक तिरंगा झंडा फहराया गया।
- 1918 ई. में अहमदाबाद की एक सूती कपड़ा मिल के मजदूरों ने बोनस को लेकर एक हड़ताल का आयोजन किया।
- महात्मा गाँधी जी द्वारा इस हड़ताल का नेतृत्व किया गया।
- गाँधी जी ने खुद भी इस हड़ताल में पहली बार अनशन रखा।
- मिल मालिक मजदूरों से समझौता करने के लिए तैयार हो गए तथा मजदूरों को 35 प्रतिशत भत्ता देने की घोषणा कर दी जिससे हड़ताल समाप्त हो गई.
- चम्पारण के बाद यह गांधी जी का भारत में दूसरा सफल सत्याग्रह था।
- संविधान सभा में विभिन्न मुद्दों पर हुई बहसों को विभिन्न पक्षों की दलीलों को तत्कालीन अखबारों में प्रकाशित किया जाता था जिस पर सार्वजनिक रूप में आम लोगों में बहस होती थी। सामूहिक सहभागिता का भाव उत्पन्न करने के लिए अखबारों के माध्यम से जनता के सुझाव भी आमंत्रित किए जाते थे।
- गौ हत्या पर पाबंदी,
- सवर्णों के दुर्व्यवहार पर रोक,
- विधायिका में जनसंहार के आधार पर सीटों का आरक्षण,
- संविधान का प्राचीन हिंदू कृतियों पर आधारित होना इत्यादि।
- (i) एक नियोजित नगर-मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का एक नियोजित नगर था। नगर को एक योजना के द्वारा बसाया गया था। इसमें जल निकासी की उत्तम व्यवस्था स्थापित की गई थी। सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
- (ii) नगर का दो भागों में विभाजन-मोहनजोदड़ो नगर को दो भागों में विभाजित किया गया था। इसके ऊपरी भाग को दुर्ग तथा निचले भाग को निचला शहर कहा जाता था। सम्भवतः दुर्ग में कुलीन वर्ग तथा शासकों का निवास होता था तथा जन-सामान्य निचले शहर में रहते थे ।
- (iii) गृह-स्थापत्य-मोहनजोदड़ों का निचला शहर आवासीय भवनों के उदाहरण प्रस्तुत करता है। लगभग हर घर में एक आँगन होता था जिसके चारों ओर कमरे बने होते थे। घर के निर्माण के समय एकांतता का विशेष ध्यान रखा जाता था। भूमि तल पर बनी दीवारों में खिड़कियाँ नहीं होती थी। हर घर में एक स्नानघर होता था जिसकी नालियाँ दीवार के माध्यम से सड़क की नालियों से जुड़ी हुईं थी। विद्वानों ने अनुमान लगाया है कि मोहनजोदड़ो में 700 कुओं के होने के प्रमाण मिलते है जिनसे पानी की आवश्यकता की पूर्ति होती थी।
- (iv) सड़कों तथा नालियों भी व्यवस्था इस नगर की अनूठी विशेषता इसकी नियोजित जल निकास प्रणाली थी। ऐसा प्रतीत होता है कि पहले नालियों के साथ गलियों को बनाया गया था और फिर आवासों का निर्माण किया गया था। यदि घरों के गन्दे पानी की गलियों की नालियों से जोड़ना था तो प्रत्येक घर की कम से कम एक दीवार का गली से सटा होना आवश्यक था।
- (v) मालगोदाम व विशाल स्नानागार-मोहनजोदड़ो में दुर्ग में कुछ विशेष संरचनाएँ भी मिली है जिनका प्रयोग सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए किया जाता था। इनमें एक मालगोदाम एक ऐसी विशाल संरचना थी जिसके ईटों से बने केवल निचले हिस्से शेष है और एक विशाल स्नानागार सम्मिलित है। विशाल स्नानागार आँगन में बना एक आयताकार जलाशय है जो चारों ओर से एक गलियारे से घिरा है। जलाशय के तल तक जाने के लिए इसके उत्तरी और दक्षिणी भाग में दो सीढ़ियाँ बनी थी। सम्भवतः इसका प्रयोग किसी प्रकार के विशेष आनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था।
- (1) कार्निलियन (सुंदर लाल रंग का)
- (2) जैस्पर (एक प्रकार का उपरत्न)
- (3) स्फटिक
- (4) क्वार्टज
- (5) शंख
- (6) सेलखड़ी (एक प्रकार का पत्थर)
- (7) ताँबा
- (8) काँसा
- (9) सोना
- (10) मिट्टी
- (11) लाजवर्द मणि
- (12) अस्थियाँ
- (13) विविध प्रकार की लकड़ियाँ तथा पत्थर
- (14) फयॉन्स
- (i) बस्तियाँ स्थापित करना हड़प्पावासी उन स्थानों पर बस्तियाँ स्थापित करते थे, जहाँ कच्चा माल आसानी से उपलब्ध था। उदाहरण के लिए नागेश्वर और बालाकोट में शंख आसानी से उपलब्ध था। ऐसे ही कुछ अन्य पुरास्थल थे-सुदूर अफगानिस्तान में शोर्तुघई। यह स्थल अत्यंत कीमती माने जाने वाले नीले रंग के पत्थर लाजवर्द मणि के स्रोत के निकट स्थित था। इसी प्रकार लोथल कार्निलियन (गुजरात में भड़ौचं), सेलखड़ी (दक्षिणी राजस्थान
- (ii) अभियान भेजना अभियान भंजना कच्चा माल प्राप्त करने की एक अन्य नीति थी। उदाहरण के लिए राजस्थान के खेतड़ी अंचल में ताँबे तथा दक्षिण भारत में सोने के लिए अभियान भेजे गए। इन अभियानों के माध्यम से स्थानीय समुदायों के साथ संपर्क स्थापित किया जाता था। इन प्रदेशों में यदा-कदा मिलने वाली हड़प्पाई पुरावस्तुएँ इन संपर्कों की संकेतक हैं। खेतड़ी क्षेत्रों में मिले साक्ष्यों को पुरातत्वविदों ने गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति का नाम दिया है। यहाँ ताँबे की वस्तुओं की विशाल संपदा मिली थी। संभवतः इस क्षेत्र के निवासी हड़प्पा सभ्यता के लोगों को ताँबा भेजते थे।
- (1) सबका ईश्वर एक है-गुरु नानक देव जी ने एक ईश्वर में विश्वास की बात की। उन्होंने ईश्वर को निराकार, कालातीत, सर्वव्यापी तथा अदृश्य बताया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मानव रूप में किसी के लिए ईश्वर का पूर्व ज्ञान होना असंभव है।
- (ii) गुरु का महत्व-गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन में गुरु होने के महत्व पर काफी जोर दिया। उनके अनुसार गुरु ईश्वर की आवाज है और सभी ज्ञान प्राप्त करने का एकमात्र स्रोत है।
- (iii) ईश्वर के प्रति पूर्ण संमर्पण गुरु नानक देव जी ने उपदेश दिया कि व्यक्ति को अपने आपको पूर्ण रूप से ईश्वर के प्रति समर्पित कर देना चाहिए। हमें ईश्वर के फैसलों को बिना सवाल उठाए स्वीकार करना चाहिए।
- (iv) बाहरी आडम्बरों का विरोध-गुरु नानक देव जी ने धर्म के सभी बाहरी आडम्बरों का जोरदार तरीकों से विरोध किया। उन्होंने यज्ञ, तीर्थ-स्नान, मूर्तिपूजा, कठोर तप आदि कर्मकांडो को स्वीकार नहीं किया।
- (v) स्मरण व नाम जपना उन्होंने ईश्वर (रब) की उपासना के लिए एक ही उपाय पर जोर दिया और वह था ईश्वर का लगातार स्मरण व नाम का जाप करना।
- (vi) जाति प्रथा का विरोध-गुरु नानक देव जी सामाजिक समानता के पक्षधर थे। वे जाति प्रथा के बंधनों को स्वीकार नहीं करते थे। इसी कारण सभी जातियों के लोग उनके अनुयायी बने। उन्होंने संगत और पंगत की परंपरा के द्वारा जाति प्रथा पर जोरदार प्रहार किया।
- (vii) तीन सिद्धान्त उन्होंने अपने अनुयायियों के सामने तीन सिद्वान्त रखे जो इस प्रकार है-
- (1) जरूरतमंद लोगों की मदद करना
- (2) पवित्र नाम का जप करना
- (3) ईमानदारी से कमाई करना।
- इसके अतिरिक्त गुरु नानक देव जी ने सत्य, सदाचार, परोपकार, सेवाभावना, नैतिकता आदि मानवीय गुणों को अपने जीवन में अपनाने पर जोर दिया।
- विचारों का संप्रेषण-गुरु नानक देव जी ने अपने विचार पंजाबी भाषा में शब्द के माध्यम से सामने रखे। बाबा गुरु नानक ये शब्द अलग-अलग रागों में गाये थे और उनका सेवक मरदाना रबाब बजाकर उनका साथ देता था।
- खानकाह का नियंत्रण शेख, पीर अथवा मुर्शीद के हाथों में होता था, जो अपने अनुयायियों की भर्ती और अपने वारिस की नियुक्ति करते थे.
- यहाँ आध्यात्मिक व्यवहार के नियम निर्धारित किए जाते थे और यह सामाजिक जीवन का केंद्र बिंदु था.
- शेख निजामुद्दीन औलिया की खानकाह दिल्ली में यमुना नदी के किनारे गियासपुर में थी, जहाँ सहवासी (शेख का परिवार, सेवक और अनुयायी) और अतिथि रहते थे.
- यहाँ उपासना (नमाज, ध्यान, और धार्मिक प्रवचन) की जाती थी, और आने वाले लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान किया जाता था.
- सामुदायिक रसोईघर: इस खानकाह में एक सामुदायिक रसोईघर था जो दान के पैसों से चलता था।
- विविध प्रकार के आगंतुक: सैनिक, व्यापारी, कवि और हिंदू योगी सहित सभी सामाजिक वर्गों के लोग विभिन्न कारणों से यहाँ आते थे।
- स्थानीय परंपराओं का समावेश: शेख के सामने झुकना, जल अर्पित करना और योगिक व्यायाम जैसी प्रथाएं स्थानीय रीति-रिवाजों के एकीकरण को दर्शाती हैं।
- प्रभाव का विस्तार: शेख निजामुद्दीन ने आध्यात्मिक उत्तराधिकारियों को नियुक्त किया जिन्होंने पूरे उपमहाद्वीप मेंखानकाहों की स्थापना की, जिससे चिश्ती विचारधारा की शिक्षाओं और प्रतिष्ठा का प्रसार हुआ।
- बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों (सैनिकों) ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने अपदस्थ शासकों से आग्रह किया कि वे विद्रोह को नेतृत्व प्रदान करें। क्योंकि वे जानते थे कि नेतृत्व व संगठन के बिना अंग्रेजों से लोहा नहीं लिया जा सकता। यह बात सही है कि सिपाही जानते थे कि सफलता के लिए राजनीतिक नेतृत्व जरूरी है। इसीलिए सिपाही मेरठ में विद्रोह के तुरंत बाद दिल्ली पहुँचे। वहाँ उन्होंने बहादुरशाह को अपना नेता बनाया। वह वृद्ध था। बादशाह तो नाममात्र का ही था। स्वाभाविक तौर पर वह विद्रोह की खबर से बेचैन और भयभीत हुआ। यद्यपि अंग्रेजों की नीतियों से वह त्रस्त तो था ही फिर भी विद्रोह के लिए तैयार वह तभी हुआ जब कुछ सैनिक शाही शिष्टाचार की अवहेलना करते हुए दरबार तक आ चुके थे। सिपाहियों से घिरे बादशाह के पास उनकी बात मानने के लिए और कोई चारा नहीं था। अन्य स्थानों पर भी पहले सिपाहियों ने विद्रोह किया और फिर नवाबों और राजाओं को नेतृत्व करने के लिए विवश किया।
- अवध का विलय: अवध को 1856 में 'कुशासन' का आरोप लगाकर ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया, जिसे स्थानीय लोगों ने अन्यायपूर्ण माना। नवाब वाजिद अली शाह की लोकप्रियता और उनके निष्कासन ने लोगों में सहानुभूति पैदा की.
- ताल्लुकदारों का अपमान: ब्रिटिश राज ने ताल्लुकदारों की सेनाएँ भंग कर दीं और उनके दुर्ग ध्वस्त कर दिए, जिससे उनकी सत्ता, सम्मान और हैसियत को भारी क्षति पहुँची.
- भूमि छीनने की नीति: 1856 के 'एक मुश्त बंदोबस्त' (Summary settlement) ने ताल्लुकदारों से उनकी जमीनें छीन लीं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई.
- किसानों का असंतोष: किसानों को भारी करों का बोझ उठाना पड़ता था और वे साहूकारों को ऋण चुकाने में विफल होकर अपनी पैतृक भूमि खो रहे थे.
- सांस्कृतिक और धार्मिक कारण: ब्रिटिश नीतियाँ स्थानीय परंपराओं और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ थीं, जिससे लोगों में विरोध बढ़ा.
- किसानों में असंतोष
- ब्रिटिश नीति के कारण तालुकदारों के स्वामित्व वाली भूमि में काफी कमी आई, जो 67% से घटकर 38% हो गई।
- ग्रामीण समाज की पारंपरिक व्यवस्था में व्यवधान के कारण किसानों ने अपने पूर्व जमींदारों के साथ मिलकर विद्रोह में भाग लिया।
- तालुकदारों को परोपकारी व्यक्तियों के रूप में देखा जाता था जो त्योहारों और खराब फसल के दौरान ऋण और सहायता प्रदान करते थे।
- नई ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणाली में कठिनाई के समय लचीलेपन और सहानुभूति का अभाव था।
0 Comments