Half Yearly Paper 2025 solution
प्रश्न: निम्नलिखित में से कौन हड़प्पा सभ्यता का एक बंदरगाह नगर था?
उत्तर : लोथल हड़प्पा सभ्यता का एक बंदरगाह नगर था। यह गुजरात में खंभात की खाड़ी के पास भोगवा नदी के तट पर स्थित था।
प्रश्न: धम्म' की अवधारणा का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
उत्तर :धम्म की अवधारणा का उल्लेख मुख्य रूप से अशोक के शिलालेखों में मिलता है। अशोक ने अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए एक आचार-संहिता बनाई थी, जिसे उन्होंने शिलालेखों में 'धम्म' कहा है।
प्रश्न: दक्षिण भारत मैं भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किसने किया?
उत्तर :दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन का प्रारंभ अलवार और नयनार संतों ने किया था। अलवार भगवान विष्णु के भक्त थे और नयनार भगवान शिव के भक्त थे।
प्रश्न: निम्नलिखित में से किस यात्री ने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत की यात्रा की?
उत्तर :इब्न बतूता, एक मोरक्को यात्री, ने मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल के दौरान भारत की यात्रा की थी। वह 1333 ई. में दिल्ली पहुंचा और 1347 ई. तक भारत में रहा। उसकी यात्राओं का विस्तृत विवरण उसकी प्रसिद्ध पुस्तक "रिहला" में मिलता है।
प्रश्न: अशोक के अभिलेखों की भाषा मुख्यतः थी।
उत्तर :अशोक के अधिकांश अभिलेख तीन भाषाओं में लिखे गए हैं - प्राकृत, यूनानी और आरामाईक। प्राकृत शिलालेख मुख्य रूप से खरोष्ठी और ब्राह्मी लिपियों में लिखे गए हैं।
प्रश्न: विजयनगर नगर __ नदी के किनारे स्थित था।
उत्तर :विजयनगर नगर तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित था। यह आधुनिक कर्नाटक राज्य में स्थित था, और हंपी भी इसी नदी के तट पर बसा था, जो विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी।
प्रश्न: किताब-उल-हिंद के लेखक कौन थे?
उत्तर: किताब उल हिंद की रचना अल-बिरूनी ने की थी। यह 11वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध फ़ारसी विद्वान और बहुज्ञ थे, जिन्होंने इस पुस्तक को अरबी भाषा में लिखा था। यह भारत के इतिहास, धर्म, संस्कृति, सामाजिक जीवन और वैज्ञानिक प्रथाओं पर एक विस्तृत और तुलनात्मक अध्ययन है।
प्रश्न: हड़प्पा सभ्यता की वर्तमान पाकिस्तान में स्थित एक पुरातात्विक स्थल का नाम बत्ताइए।
उत्तर: हड़प्पा सभ्यता का एक पुरातात्विक स्थल जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है, हड़प्पा ही है। यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में साहिवाल शहर से 20 किलोमीटर पश्चिम में रावी नदी के किनारे स्थित है। इसके अतिरिक्त, मोहनजोदड़ो और चन्हुदड़ो भी पाकिस्तान में स्थित अन्य महत्वपूर्ण स्थल हैं।
(A): भक्ति और सूफ़ी आंदोलनों ने सामाजिक समानता को प्रोत्साहित किया।
कारण (B): दोनों आंदोलनों ने जाति आधारित श्रैष्ठता में विश्वास किया।
1) A और B दोनो सही हैं और १, B की सही व्याख्या है।
2) A और B दोनों सही हैं। और B की सही व्याख्या नहीं है।
3) A सही हैं। और B सही नहीं है।
4) A और B दोनों सही नहीं हैं |
प्रश्न: पंच-चिहिनत सिक्कों और प्राचीन आरत में उनके महत्व पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: पंच-चिह्नित सिक्के प्राचीन भारत में धातु के टुकड़े होते थे जिन पर चांदी या तांबे जैसी धातुओं पर विभिन्न चिन्ह या प्रतीक ठोंके जाते थे। इनका मुख्य महत्व व्यापार और वाणिज्य को सुविधाजनक बनाना था, क्योंकि ये विनिमय के माध्यम के रूप में कार्य करते थे और इन पर बने निशान सिक्कों की प्रामाणिकता की गारंटी देते थे। इन सिक्कों ने न केवल एक मानकीकृत मौद्रिक प्रणाली को बढ़ावा दिया, बल्कि राजनीतिक सत्ता, सांस्कृतिक मूल्यों और आर्थिक स्थिरता को भी दर्शाया, जो प्राचीन भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण थे।
पंच-चिह्नित सिक्कों का महत्व:
- व्यापार और अर्थव्यवस्था
- प्रामाणिकता और विश्वसनीयता
- राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
- मौद्रिक प्रणाली का विकास
- ऐतिहासिक जानकारी का स्रोत
प्रश्न: बुद्ध की कोई तीन शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: गौतम बुद्ध की प्रमुख शिक्षाओं में चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, और मध्यम मार्ग शामिल हैं, जो दुख की प्रकृति और उसके निवारण पर केंद्रित हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पंचशील (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, और मादक द्रव्यों से दूरी) जैसे नैतिक उपदेश दिए, साथ ही त्रिरत्न (प्रज्ञा, शील, और समाधि) के महत्व पर भी जोर दिया।
प्रश्न: 'किताब-उल-हिंद' को भारतीय समाज और संस्कृति के अध्ययन के लिए एक विश्वसनीय स्रोत्त क्यों माना जाता है? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: 'किताब-उल-हिंद' को भारतीय समाज और संस्कृति के अध्ययन के लिए एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है क्योंकि लेखक अल-बिरूनी ने भारतीय ग्रंथों का गहन अध्ययन किया और एक निष्पक्ष, व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने संस्कृत सीखी और भारतीय धर्म, समाज, विज्ञान, रीति-रिवाजों और भूगोल का विस्तृत और तुलनात्मक विवरण दिया। उदाहरण के लिए, उन्होंने जाति व्यवस्था का विश्लेषण किया और बताया कि कैसे यह सामाजिक संबंधों और व्यवसायों को प्रभावित करती थी, जबकि साथ ही भारतीय ज्ञान और शिक्षा के प्रति उनके सम्मान को भी दर्शाया।
विश्वसनीयता के कारण:
- गहन शोध
- निष्पक्षता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- विस्तृत कवरेज
- संरचनात्मक विश्लेषण
प्रश्न: कबीर की शिक्षाओं और दर्शन का वर्णन कीजिए। उनकी विचारधारा ने भक्ति आंदोलन को कैसे प्रभावित किया?
उत्तर:कबीर की शिक्षाओं में ईश्वर की एकता, निराकार ईश्वर की पूजा, और कर्मकांडों से परे भक्ति पर जोर दिया गया, जबकि उनके दर्शन में सामाजिक समानता, मानवीय मूल्यों, और आडंबरों का विरोध शामिल है। उनकी विचारधारा ने भक्ति आंदोलन को निर्गुण भक्ति की धारा को लोकप्रिय बनाकर प्रभावित किया, जिसने जाति-पाति और धार्मिक आडंबरों को चुनौती दी और व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव पर बल दिया।
कबीर की शिक्षाएं और दर्शन:
- ईश्वर की एकता और निराकार स्वरूप
- सामाजिक समानता
- आंतरिक भक्ति पर जोर
- मानवीय मूल्यों का महत्व
- सांसारिक मोह-माया का त्याग
- सरल भाषा का प्रयोग
भक्ति आंदोलन पर प्रभाव:
- निर्गुण भक्ति का विकास
- धार्मिक कट्टरता को चुनौती
- भक्ति को आम लोगों तक पहुंचाना
- सामाजिक सुधार
- धार्मिक समन्वय
प्रश्न: मनुस्मृति क्या है?
उत्तर:मनुस्मृति हिंदू धर्म का एक प्राचीन ग्रंथ है, जिसे मानवधर्मशास्त्र भी कहते हैं, जिसमें प्राचीन भारतीय सामाजिक व्यवस्था और न्याय व्यवस्था के लिए नियम और कानून दिए गए हैं।
प्रश्न: क्षत्रियों के दो कर्तव्यों के नाम बताइए
उत्तर:क्षत्रियों के दो प्रमुख कर्तव्य राज्य की रक्षा करना और धर्म और न्याय की स्थापना करना हैं।
प्रश्न: व्यापार के लिए कौन-सा वर्ण उत्तदायी था?
उत्तर: वैदिक काल में व्यापार के लिए वैश्य वर्ण जिम्मेदार था। इस वर्ण के लोग मुख्य रूप से कृषि, व्यापार और वाणिज्य में संलग्न थे और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते थे।
प्रश्न: मनुस्मृति के अनुसार महिलाओं की स्थिति क्या थी?
उत्तर: मनुस्मृति के अनुसार, महिलाओं की स्थिति को लेकर कई परस्पर विरोधी बातें कही गई हैं। एक ओर, यह महिलाओं को सम्मान देने और उनके कष्टों को दूर करने पर जोर देता है, और कहता है कि जहाँ उनका सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं। वहीं, दूसरी ओर यह उन्हें घरेलू कामों तक सीमित कर देता है, जिसमें उनका विवाह ही वैदिक संस्कार माना गया है, और पति की सेवा को ही उनका गुरुकुल माना गया है।
प्रश्न: हम्पी के बाजारों में बिकले वाली दो आयातित वस्तुओं के नाम बताइए।
उत्तर:हम्पी के बाजारों में बिकने वाली दो आयातित वस्तुएं घोड़े और रेशम थीं। अन्य आयातित वस्तुओं में हाथी, मोती, तांबा, मूंगा और पारा शामिल थे।
प्रश्न: विजयनगर के व्यापार के लिए कौन-सी नदी महत्वपूर्ण थी?
उत्तर:विजयनगर के व्यापार के लिए तुंगभद्रा नदी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि यह साम्राज्य की जीवन रेखा थी और इसने कृषि, सिंचाई और प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान की। इस नदी के तट पर शहर बसा था, और इसकी उपजाऊ भूमि साम्राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण थी।
प्रश्न: विजयनगर की यात्रा करने वाले किसी एक विदेशी यात्री का नाम बताइए।
उत्तर:विजयनगर की यात्रा करने वाले एक विदेशी यात्री का नाम डोमिंगो पेस है। वह एक पुर्तगाली यात्री थे जिन्होंने लगभग 1520 में विजयनगर साम्राज्य का दौरा किया था। अन्य विदेशी यात्रियों में फर्नाओ नुनिज़, निकोलो डी कोंटी और दुआरते बारबोसा भी शामिल हैं।
प्रश्न: हडप्पा सभ्यता की मगर योजना प्रणाली का वर्णन कीजिए।
उत्तर:हड़प्पा सभ्यता के शहरों की नगर योजना की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं -
ग्रिड योजनाः
हड़प्पा सभ्यता के शहरों को एक ग्रिड योजना के अनुसार बनाया गया था। इस योजना के अनुसार, शहरों को आयताकार ब्लॉकों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक ब्लॉक में एक लंबी सड़क होती थी जो इसे पूर्व-पश्चिम में विभाजित करती थी। और एक छोटी सड़क होती थी जो इसे उत्तर-दक्षिण में विभाजित करती थी। इस प्रकार, प्रत्येक ब्लॉक में 96 वर्ग इकाइयाँ होती थीं।
जल निकासी प्रणालीः
- हड़प्पा सभ्यता के शहरों में एक उन्नत जल निकासी प्रणाली थी। शहरों में नालियाँ और सीवर थे जो पानी को शहर से बाहर निकालते थे। इस प्रणाली ने शहरों को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद की।
आवासः
- हड़प्पा सभ्यता के शहरों में विभिन्न प्रकार के आवास थे। आम लोगों के घर छोटे और साधारण होते थे। जबकि अमीर लोगों के घर बड़े और आलीशान होते थे। घरों को आमतौर पर ईंटों से बनाया जाता था।
सार्वजनिक संरचनाएँ:
- हड़प्पा सभ्यता के शहरों में कई सार्वजनिक संरचनाएँ थीं। इनमें बाजार, स्नानागार, और गोदाम शामिल थे। बाजार व्यापार और वाणिज्य के लिए महत्वपूर्ण थे। स्नानागार साफ-सफाई और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण थे। गोदाम खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं के भंडारण के लिए महत्वपूर्ण थे।
प्रश्न: हड़प्पा सभ्यता के पतन के कारणों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:हड़प्पा सभ्यता के पतन के कई कारण थे, जिनमें मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन (जैसे कि नदियों का सूखना, बाढ़ आना और सूखा पड़ना), प्राकृतिक आपदाएं (जैसे भूकंप), आर्थिक गिरावट (व्यापार में कमी), और बाहरी आक्रमण के सिद्धांत शामिल हैं। इनमें से किसी एक कारण की बजाय, इन सभी कारकों के संयोजन ने मिलकर सभ्यता के क्षय में योगदान दिया।
जलवायु और पर्यावरणीय कारक:
जलवायु परिवर्तन:
- यह सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। शोधकर्ताओं का मानना है कि 1800 ईसा पूर्व के आसपास जलवायु ठंडी और शुष्क हो गई, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ।
नदियों का सूखना:
- सरस्वती जैसी महत्वपूर्ण नदियाँ सूखने लगीं, जिससे कृषि आधारित सभ्यता को गहरा झटका लगा। बाढ़: बार-बार आने वाली बाढ़ ने शहरों को भारी नुकसान पहुँचाया।
भूकंप:
- भूकंप के कारण सिंधु नदी की धारा बदल गई, जिससे बाढ़ और जल-प्रवाह में परिवर्तन हुआ। आर्थिक और सामाजिक कारक
व्यापार में गिरावट:
- व्यापार मार्गों में गिरावट और अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार में आई कमी ने आर्थिक पतन में योगदान दिया।
कृषि में गिरावट:
- जलवायु परिवर्तन और मृदा क्षरण के कारण कृषि उत्पादकता में कमी आई, जिससे भोजन की कमी हुई।
प्रशासनिक शिथिलता:
- संभवतः प्रशासनिक व्यवस्था में आई कमजोरी ने भी पतन में भूमिका निभाई।
सामाजिक असंतुलन:
- सामाजिक और आर्थिक असंतुलन ने भी सभ्यता को कमजोर किया।
बाहरी और अन्य कारक
आर्य आक्रमण:
- कुछ विद्वान मानते हैं कि बाहरी आक्रमण हुआ, लेकिन कई शोधों में इसके पुरातात्विक प्रमाणों की कमी पाई गई है। यह सिद्धांत अभी भी विवादास्पद है।
महामारी:
- कुछ विद्वान महामारी के फैलने को भी एक संभावित कारण मानते हैं।
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