HBSE/NCERT Class 11 History इतिहास Sample Paper-II

 

==================================================================

HARYANA BOARD OF SCHOOL EDUCATION, BHIWANI

==================================================================

इतिहास - 11
रोल नं. --------------------------                                                                                  समय : 3:00 घंटे
                                                                                                                                पूर्णांक : 80

निर्देश :
इस प्रश्न-पत्र में कुल 36 प्रश्न हैं, जो कि पाँच खण्डों 'क', 'ख', 'ग', 'घ' तथा 'ङ' में विभक्त हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य है।
खण्ड 'क' में प्रश्न संख्या 1 से 21 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का हैं। निर्देशानुसार इन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 22 से 29 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 60-80 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।
खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 30 से 32 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, प्रत्येक प्रश्न 8 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 300-350 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।
खण्ड 'घ' में प्रश्न 33 से 35 तक चार उप प्रश्नों के साथ स्रोत आधारित प्रश्न है और प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का हैं।
खण्ड 'ङ' में प्रश्न संख्या 36 मानचित्र आधारित है, जिसमें 5 अंक हैं। मानचित्र को उत्तर-पुस्तिका के साथ संलग्न करें।
खण्ड क


1. स्वतंत्र बेबीलोन का अंतिम शासक कौन था?

क. नैबोनिड्स
ख. असुरबनिपाल
ग. गिलोमिश
घ. सिकन्दर

उत्तर - क. नैबोनिड्स

2. शहरी जीवन का प्रारम्भ किस सभ्यता से हुआ?

क. यूनानी सभ्यता से
ख. मिस्र की सभ्यता से
ग. सिंधु घाटी सभ्यता से
घ. मेसोपोटामिया सभ्यता से

उत्तर -घ. मेसोपोटामिया सभ्यता से

3. रोमन साम्राज्य का प्रथम सम्राट कौन था?

क. नीरो
ख. ऑगस्टस
ग. टिबेरियस
घ. त्राजान

Answer: ख. ऑगस्टस

4. चंगेज खां का प्रारम्भिक नाम क्या था?

क. तेमुजिन
ख. येसूजेई
ग. जमूका
घ. बोघूरचु

Answer: क. तेमुजिन

5. सामंतवाद का उदय सबसे पहले किस देश में हुआ?

क. इंग्लैण्ड
ख. फ्रांस
ग. रूस
घ. जापान

Answer: ख. फ्रांस


6. रोम में राज कवि की उपाधि से किसे सम्मानित किया गया था।

क. पेट्राक
ख. लियोनाडों
ग. गुटेनबर्ग
घ. चौसर

Answer: (क) पेट्राक

7. अमेरिका के मूल निवासियों को 'उदात उत्तम जंगली' की संज्ञा किस विद्वान ने दी। 

क. विलियम वर्डर्स वर्थ
ख. रूसो
ग. इरविंग
घ. थॉमस जैफर्सन

Answer: ख. रूसो

8. जपान की मुख्य फसल कौन-सी है।

क. चावल
ख. गेहूँ
ग. चना
घ. मक्का

Answer: (क) चावल

9. मेसोपोटामिया सभ्यता क्षेत्र वर्तमान में किस देश का हिस्सा हैं।

Answer: इराक
मेसोपोटामिया सभ्यता का अधिकांश क्षेत्र वर्तमान में इराक देश का हिस्सा है। इस क्षेत्र में आधुनिक इराक, साथ ही पूर्वी सीरिया, दक्षिण-पूर्वी तुर्की और कुवैत के कुछ हिस्से शामिल थे

10. मेसोपोटामिया की ज्ञात सबसे प्राचीन भाषा कौन-सी थी।
Answer: सुमेरियन
      मेसोपोटामिया की सबसे पुरानी ज्ञात भाषा सुमेरियन है। इस भाषा को सुमेरियन सभ्यता के लोगों द्वारा प्राचीन मेसोपोटामिया क्षेत्र में बोला जाता था। सुमेरियन भाषा का स्थान लगभग 2400 ईसा पूर्व के बाद धीरे-धीरे अक्कादी भाषा ने ले लिया था।

11. रोम का कौन-सा नगर ज्वालामुखी फटने से दफन हो गया था? 
Answer: पोम्पेई (Pompeii)
         पोम्पेई (Pompeii) प्राचीन रोमन साम्राज्य का एक शहर था जो 79 ईस्वी में माउंट वेसुवियस ज्वालामुखी के विनाशकारी विस्फोट के कारण राख और मलबे के नीचे दब गया था। इस विस्फोट ने शहर और उसके निवासियों को सदियों तक संरक्षित रखा, जिससे यह आज एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल बन गया है। हरक्यूलेनियम और स्टैबिया सहित ज्वालामुखी के आसपास के अन्य समुदाय भी इस घटना में नष्ट हो गए थे। 

12. चंगेज खाँ का वैद्य उत्तराधिकारी कौन था?

Answer: ओगेदेई खान (Ögedei Khan)
चंगेज खान की मृत्यु के बाद, उनके तीसरे बेटे ओगेदेई खान (Ögedei Khan) ने 1229 ईस्वी में मंगोल साम्राज्य के महान खान का पद संभाला। चंगेज खान ने स्वयं ओगेदेई को अपना उत्तराधिकारी चुना था, संभवतः इसलिए क्योंकि उनका स्वभाव शांत था और वह अपने बड़े भाइयों के बीच शांति बनाए रखने में मदद करते थे। ओगेदेई ने अपने पिता से सत्ता संभाली और 1227 ईस्वी से 1241 ईस्वी तक शासन किया। 

13. आधुनिक चीन का संस्थापक किसे माना जाता है।
Answer: सन यात-सेन
सन यात-सेन को आधुनिक चीन का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 1912 में किंग राजवंश को उखाड़ फेंकने और चीन गणराज्य की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें चीनी राष्ट्रवादी पार्टी (कुओमिन्तांग) का नेता और आधुनिक चीन का जनक माना जाता है। 

14. मेसोपोटामिया के समाज में............................परिवार को ही आदर्श माना जाता था।

Answer: एकल
कानूनी दस्तावेज़ों से पता चलता है कि मेसोपोटामिया के समाज में एकल परिवार (Nuclear family) को ही आदर्श माना जाता था। हालांकि, एक शादीशुदा बेटा और उसका परिवार अक्सर अपने माता-पिता के साथ ही रहा करते थे। पिता परिवार का मुखिया होता था। 

15. दीनारियस रोम का एक...................................होता था।

Answer: चांदी का सिक्का (a silver coin)
दीनारियस (Denarius) प्राचीन रोम की मूल और प्रमुख चांदी का सिक्का था। यह 25 कांस्य एसेस (asses) के बराबर था. यह शब्द लैटिन 'डेनरियस' से लिया गया है। 

16. तेमुजिन का सम्बन्ध.........................कबीले से था।
Answer: बोरजिगिन या कियात
तेमुजिन (बाद में चंगेज़ खान के नाम से जाना गया) का जन्म लगभग 1162 ई. में हुआ था। उनके पिता येसुगेई थे, जो मंगोलों के कियात कबीले (जिसे बोरजिगिन कबीला भी कहा जाता है) के मुखिया थे। 

17. चर्च को किसान से उपज का दसवां भाग लेने का अधिकार था, जिसे ............ कहते थे।

Answer: टीथ या दशांश
चर्च को एक वर्ष के अंतराल में कृषक से उसकी उपज का दसवाँ भाग लेने का अधिकार था। यह एक धार्मिक कर था, जिसे 'टीथ' (Tithe) या 'दशांश' कहते थे। यह कर अनिवार्य था और आमतौर पर किसान की कृषि उपज या आय का दसवां हिस्सा (10%) होता था। 

18. सन् 1840 में संयुक्त राज्य अमेरिका के......................में सोने के कुछ चिन्ह मिले।

Answer: जॉर्जिया
सन् 1840 में संयुक्त राज्य अमेरिका के जॉर्जिया में सोने के कुछ चिन्ह मिले थे। यह घटना उस समय की एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका में सोने की खोज को बढ़ावा दिया और बाद में अन्य क्षेत्रों में भी सोने की भीड़ (Gold Rush) को प्रेरित किया। 
19. निम्नलिखित कथनों पर विचार करेंगे, एक को अभिकथन और दूसरे को कारण R के रूप में लेबल किया गया है। कथन को पढिये उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन A किरिल ताई मंगोल सरदारों की एक सभा थी। 
कारण चंगेज खाँ इस सभा के विरूद्ध थे। 

A. A और R अभिकथन कारण दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या है। 
B. A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या नहीं है।
C. A और R दोनो सही हैं।
D. R सही हैं, A सही नहीं है। 

Answer: (b) A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या नहीं है।
  • अभिकथन (A): किरिल ताई मंगोल सरदारों की एक सभा थी। यह कथन सही है। 'कुरिलताई' (Kiriltai) मंगोल और तुर्किक सरदारों की एक राजनीतिक और सैन्य परिषद थी।
  • कारण (R): चंगेज खाँ इस सभा के विरूद्ध थे। यह कथन भी सही है। चंगेज खाँ ने अपनी शक्ति को केंद्रीकृत करने के लिए पारंपरिक कुरिलताई प्रणाली के प्रभाव को कम किया और अंततः इसे अपने नियंत्रण में ले लिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इसके पारंपरिक स्वरूप के विरुद्ध थे।
  • व्याख्या: हालांकि दोनों कथन सही हैं, लेकिन कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है। अभिकथन 'कुरिलताई' की प्रकृति को परिभाषित करता है, जबकि कारण चंगेज खाँ के उसके प्रति दृष्टिकोण को बताता है। दोनों के बीच सीधा कारण-प्रभाव संबंध नहीं है।
20.अभिकथन A -स्वतन्त्र होने की इच्छा रखने वाले अनेक कृषिदास भागकर नगरों में छिप जाते थे।
कारण R - अपने लार्ड की नजरों से एक वर्ष व एक दिन तक छिपे रहने में सफल रहने वाला कृषिदास एक स्वाधीन नागरिक बन जाता। 

A. A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या है।
B. A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या नहीं है।
C. A और R दोनो सही हैं।
D. R सही हैं, A सही नहीं है।

उत्तर: (ए) ए और आर दोनों सही हैं। और आर, ए का सही व्याख्या है।

स्पष्टीकरण:
इस कथन में कहा गया है कि स्वतंत्रता की चाह में कई दास भागकर शहरों में छिप जाते थे। यह सही है, क्योंकि शहरी क्षेत्रों में भाग जाना कई ऐतिहासिक संदर्भों में प्रतिरोध का एक सामान्य रूप और स्वतंत्रता प्राप्त करने का एक प्रयास था, जैसे कि मध्ययुगीन यूरोप में। 
इसका कारण यह है कि जो दास एक वर्ष और एक दिन तक अपने स्वामी की दृष्टि से छिपा रहने में सफल होता था, वह स्वतंत्र नागरिक बन जाता था। यह एक ऐतिहासिक रूप से सटीक सिद्धांत भी है, जिसे पवित्र रोमन साम्राज्य में "स्टैड्लुफ्ट माच्ट फ्री" (शहर की हवा आपको स्वतंत्र बनाती है) के रूप में जाना जाता था, और इसी तरह के कानून अन्य जगहों पर भी मौजूद थे। इस नियम ने उन लोगों के लिए स्वतंत्रता का एक कानूनी मार्ग प्रदान किया जो सफलतापूर्वक भाग निकलने और एक निर्दिष्ट अवधि के लिए गिरफ्तारी से बचने में सक्षम थे।
इसका सीधा कारण यह बताता है कि दास शहरों की ओर क्यों भागे—क्योंकि शहरों ने उन्हें कानूनी रूप से स्वतंत्र होने का एक तरीका प्रदान किया, बशर्ते वे पर्याप्त समय तक छिपे रह सकें। इसलिए, कारण (R) कथन (A) के लिए सही व्याख्या है।

21. अभिकथन A  1991 में यह घोषणा हुई कि नई दिल्ली और कैनबरा को क्रमशः ब्रिटिश भारत और ऑस्ट्रेलिया राष्ट्र मण्डल की राजधानी बनाया जाएगा।
कारण (R)- कैनबरा का अर्थ है- सभा स्थल ।

A. A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या है।
B. A और R दोनो सही हैं। और R, A की सही व्याख्या नहीं है।
C. A और R दोनो सही हैं।
D. R सही हैं, A सही नहीं है।

उत्तर: (ए) ए और आर दोनों सही हैं। और आर, ए का सही व्याख्या है।

स्पष्टीकरण:
अभिकथन (ए) में कहा गया है कि 1911 में यह घोषणा की गई थी कि नई दिल्ली और कैनबरा को क्रमशः ब्रिटिश भारत और ऑस्ट्रेलिया राष्ट्रमंडल की राजधानी के रूप में बनाया जाएगा। यह तथ्यात्मक रूप से सही है। 
कारण (आर) बताता है कि कैनबरा का अर्थ 'मिलने का स्थान' है। यह व्यापक रूप से स्वीकृत अर्थ है जो स्थानीय आदिवासी भाषा कंबेरा से लिया गया है। यह व्युत्पत्ति नियोजित राजधानी शहर के रूप में इस स्थान के चयन से सीधे तौर पर संबंधित है, जो ऑस्ट्रेलियाई राज्यों के लिए एक मिलन स्थल है। इसलिए, राजधानी शहर नियोजन के संदर्भ में A के लिए R सही व्याख्या है। 


खंड-ख 

22. आप ऐसा क्यों सोचते है कि पुराने मन्दिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे।

Answer: पुराने मंदिर बहुत कुछ घर जैसे ही होंगे क्योंकि मंदिर भी किसी देवता का घर ही होता है। 
आरंभ में मनुष्य किसी विशेष मंदिर निर्माण शैली से परिचित नहीं था, इसलिए देवी-देवताओं के रहने का स्थान उनके घर ही होते थे। 

  • मेसोपोटामिया जैसे प्राचीन सभ्यताओं में, मंदिर विभिन्न देवी-देवताओं के निवास स्थान थे, जैसे 'उर' चंद्र देवता का और 'इन्नाना' प्रेम व युद्ध की देवी का निवास स्थान था। 
  • मंदिरों का उपयोग आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाता था और वे घरों की तरह दिखते थे, ताकि देवता और उनके परिवार को सभी आवश्यक आराम मिल सके। 
  • मंदिर एक समुदाय के केंद्र के रूप में भी कार्य करता था, जिसके चारों ओर शहर विकसित होते थे। 
  • पुराने मंदिरों में पूजा-अर्चना के अलावा शिक्षा, कला और संगीत के केंद्र भी होते थे, जो उन्हें एक घर जैसे बहुउद्देशीय स्थान बनाते थे। 
अथवा 

मारी स्थित जिमरीलिम राजमहल के बारे में आप क्या जानते है।
उत्तर: ज़िम्रिलिम का महल
  • ज़िमरिलिम का महल मारी के राजा ज़िमरिलिम का शाही निवास था। यह एक विशाल और जटिल संरचना थी जिसमें 300 से अधिक कमरे और आंगन थे, जिनमें शाही अपार्टमेंट, प्रशासनिक कार्यालय, कार्यशालाएं और धार्मिक क्षेत्र शामिल थे। यह महल अपने विस्तृत भित्तिचित्रों और जटिल स्थापत्य डिजाइन के लिए प्रसिद्ध था, जो प्राचीन मेसोपोटामिया में मारी साम्राज्य की समृद्धि और शक्ति को प्रदर्शित करता था। इसका विनाश बेबीलोन के हम्मुराबी ने लगभग 1759 ईसा पूर्व में करवाया था।
23. रोमन साम्राज्य की भौगोलिक स्थिति का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए

Answer: रोमन साम्राज्य भूमध्य सागर के उत्तर और दक्षिण में फैला हुआ था, जिसमें यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के बड़े हिस्से शामिल थे।

  • रोमन साम्राज्य का भूगोल:
    • साम्राज्य का केंद्र भूमध्य सागर था, जिसे रोमन "हमारा समुद्र" (Mare Nostrum) कहते थे। 
    • इसकी उत्तरी सीमा मुख्य रूप से जर्मनी के दक्षिण में स्थित डेन्यूब नदी और राइन नदी तक फैली हुई थी। 
    • दक्षिणी सीमा अरब और उत्तरी अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान द्वारा परिभाषित की गई थी। 
    • साम्राज्य ने ब्रिटेन से लेकर मिस्र तक और स्पेन से लेकर सीरिया तक विशाल क्षेत्रों को नियंत्रित किया।

अथवा 

रोमन सम्राट ऑगस्टस के बारे में आप क्या जानते है।
उत्तर - रोमन सम्राट ऑगस्टस (मूल नाम ऑक्टेवियन) रोमन साम्राज्य के पहले और सबसे प्रभावशाली सम्राट थे। उन्होंने रोमन गणराज्य को रोमन साम्राज्य में बदल दिया।
  • उनके शासनकाल में शांति और समृद्धि का एक लंबा दौर चला, जिसे 'पैक्स रोमाना' (रोमन शांति) के नाम से जाना जाता है।
  • उन्होंने कई प्रशासनिक और आर्थिक सुधार किए, जैसे कि एक स्थायी सेना की स्थापना और कर प्रणाली को सुव्यवस्थित करना।
  • वह कला और वास्तुकला के महान संरक्षक थे, और उनके शासनकाल में रोमन साहित्य और कला का स्वर्ण युग देखा गया।
24. मंगोलों के लिए व्यापार क्यों इतना महत्वपूर्ण था?

Answer: व्यापार मंगोलों के जीवन के लिए आवश्यक था।
मंगोल स्टेपी क्षेत्र में खानाबदोश जीवन जीते थे, जहाँ संसाधनों की कमी थी और कठोर जलवायु के कारण कृषि केवल थोड़े समय के लिए ही संभव थी। इस कारण, उन्हें अपनी कई बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अपने पड़ोसी, विशेषकर चीनियों के साथ व्यापार पर निर्भर रहना पड़ता था। 

  • खाद्य आपूर्ति: वे चीन से कृषि उत्पाद, जैसे अनाज, प्राप्त करते थे, जो उनके अपने क्षेत्र में उत्पादित नहीं होते थे। 
  • आवश्यक उपकरण: व्यापार के माध्यम से उन्हें लोहे के उपकरण और हथियार मिलते थे, जो उनके जीवन और सैन्य शक्ति के लिए महत्वपूर्ण थे。 
  • आर्थिक संसाधन: वे बदले में घोड़ों, फ़र (खालों), और शिकार किए गए जानवरों का व्यापार करते थे, जिससे उन्हें आर्थिक समृद्धि मिलती थी। 
  • वैश्विक संपर्क: व्यापार मार्गों, जैसे सिल्क रोड, पर नियंत्रण ने उन्हें पूर्वी और पश्चिमी सभ्यताओं के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बना दिया, जिससे विचारों और तकनीकों का आदान-प्रदान संभव हुआ। 
25. फ्रांस के प्रारम्भिक सामंती समाज के दो लक्षणों का वर्णन कीजिए ?

Answer: फ्रांस के प्रारंभिक सामंती समाज के दो प्रमुख लक्षण थे भूमि का नियंत्रण और सामाजिक पदानुक्रम। 

स्पष्टीकरण:
  • भूमि का नियंत्रण: सामंती समाज में भूमि का स्वामित्व सामंतों के पास होता था, जो इसे किसानों को खेती के लिए देते थे। किसान इसके बदले में सामंतों को कर या उपज का हिस्सा देते थे। 
  • सामाजिक पदानुक्रम: समाज स्पष्ट वर्गों में बंटा हुआ था, जिसमें मुख्य रूप से पादरी वर्ग, अभिजात्य वर्ग (सामंत और नाइट), और कृषक वर्ग शामिल थे। अभिजात्य वर्ग को विशेष दर्जा प्राप्त था और किसान वर्ग की स्थिति दयनीय थी

26. मार्टिन लूथर के बारे में आप क्या जानते है? 

उत्तर-मार्टिन लूथर (1483-1546) ईसाई धर्म में प्रोटेस्टवाद नामक सुधारात्मक आंदोलन चलाने के लिए विख्यात एक जर्मन भिक्षु, धर्मशास्त्री, और चर्च-सुधारक थे। 
  • उन्होंने 1517 में विटेनबर्ग चर्च के दरवाजे पर अपने "95 थीसिस" (95 Theses) में कैथोलिक चर्च के भ्रष्टाचार की निंदा करके प्रोटेस्टेंट सुधार की शुरुआत की। 
  • उनका मानना था कि मोक्ष केवल ईश्वर का एक उपहार है, जो मसीह में विश्वास के माध्यम से प्राप्त होता है, न कि अच्छे कर्मों के माध्यम से। 
  • उन्होंने बाइबिल का जर्मन भाषा में अनुवाद किया, जिससे आम लोगों की उस चर्च सत्ता पर निर्भरता कम हो गई जिसे वे शोषक मानते थे। 
  • उनके विचारों ने प्रोटेस्टिज्म सुधार आंदोलन शुरू किया, जिसने पश्चिमी यूरोप के विकास की दिशा बदल दी। 
27. इतिहास की किताबों में आस्ट्रेलिया के मूल निवासियों को शामिल क्यों नहीं किया गया था ?

उत्तर: भेदभावपूर्ण नीतियों और उपेक्षा के कारण
यूरोपीय इतिहासकारों ने ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासियों के प्रति भेदभाव की नीति अपनाई। उन्होंने अपनी पुस्तकों में केवल ऑस्ट्रेलिया में आकर बसे यूरोपियों की उपलब्धियों का वर्णन किया और यह दिखाने का प्रयास किया कि वहाँ के मूल निवासियों की न तो कोई परंपरा है और न ही कोई इतिहास। यूरोपीय बसने वालों ने उनकी परंपराओं या अनुभवों को दर्ज नहीं किया, जिसके कारण इतिहास की पुस्तकों में उनकी उपेक्षा की गई। 
28. सनयात-सेन के तीन सिद्धांत क्या थे?
उत्तर:-
  • सन यात-सेन के तीन सिद्धांत राष्ट्रवाद (Nationalism), लोकतंत्र (Democracy/People's Rights), और जन कल्याण/आजीविका (People's Livelihood) थे। 
29. कोरिया ने 1997 में विदेशी मुद्रा संकट का सामना किस प्रकार किया?
उत्तर:-
कोरिया ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता प्राप्त करके और कठोर आर्थिक सुधारों को लागू करके संकट का सामना किया। 
अथवा 
जापान की शोगुन शासन व्यवस्था के बारे में आप क्या जानते है?
उत्तर:-
जापान में शोगुन शासन व्यवस्था सैन्य तानाशाहों द्वारा शासित एक सामंती व्यवस्था थी।

  • 'शोगुन' (Shogun) का अर्थ 'महान सेनापति' होता है।

  • यह व्यवस्था 1185 से 1868 तक चली, जिसमें विभिन्न शोगुन परिवारों (जैसे कामाकुरा, आशिकागा और टोकुगावा) ने शासन किया
  • सम्राट केवल नाममात्र का शासक था, वास्तविक शक्ति शोगुन और उसके सैन्य अभिजात वर्ग के हाथों में थी
  • यह व्यवस्था समुराई योद्धा वर्ग पर आधारित थी, जिन्होंने वफादारी और सेवा के बदले जमीन और पदवी प्राप्त की
  • टोकुगावा शोगुनेट (1603-1868) के दौरान, जापान ने बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह से अलगाव की नीति अपनाई, जिससे देश में शांति और स्थिरता बनी रही
Section-C
खण्ड-ग

30. मेसोपोटामिया सभ्यता के शहरी जीवन पर चर्चा कीजिए?
उत्तर:-
मेसोपोटामिया की सभ्यता में शहरी जीवन अत्यंत विकसित था, जिसकी नींव कृषि अधिशेष, विशिष्ट श्रम और संगठित प्रशासन पर टिकी थी।
  • समाज और प्रशासन: समाज में एक पदानुक्रम था, जिसमें राजा, शाही परिवार, पुरोहित और आम नागरिक शामिल थे। राजाओं ने समुदाय कल्याण पर ध्यान केंद्रित किया और मंदिरों को समृद्ध बनाने के लिए कीमती भेंटें अर्पित कीं। प्रशासन और कीमती धातुओं के निर्माण में राजमहल मुख्य केंद्र होते थे। 
  • नगर नियोजन: शहरों में संकरी घुमावदार गलियाँ थीं, जो सामानों के परिवहन के लिए गधों के उपयोग का संकेत देती हैं। 
  • आर्थिक जीवन: शहर व्यापार के महत्वपूर्ण केंद्र थे, जो नदियों के किनारे स्थित थे। यहाँ के निवासी भवन निर्माण, धातु विज्ञान, मिट्टी के बर्तन बनाने, बुनाई, और लेखन जैसे विभिन्न कार्यों में संलग्न थे। 
  • सांस्कृतिक विकास: शहरों ने कला, साहित्य और धार्मिक अनुष्ठानों जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
  • प्रमुख शहर: उर, उरूक, लैगश, और निप्पुर जैसे प्रसिद्ध नगरों ने शहरी जीवन के नए आयाम स्थापित किए। 
अथवा 

चीन के आधुनिकरण में किन तत्वों का योगदान रहा। चर्चा कीजिए ?
उत्तर:-
चीन के आधुनिकीकरण में योगदान देने वाले प्रमुख तत्व इस प्रकार हैं:

  • 'चार आधुनिकीकरण' की नीति: 1978 में डेंग शियाओपिंग द्वारा प्रस्तावित इस कार्यक्रम ने कृषि, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और राष्ट्रीय रक्षा के क्षेत्रों को आधुनिक बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। 
  • आर्थिक उदारीकरण और निजी क्षेत्र की वृद्धि: निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना, वेतन और मूल्य उदारीकरण, और निर्यात-उन्मुख नीतियां आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण थीं। 
  • विदेशी निवेश और वैश्वीकरण के प्रति खुलापन: चीन ने विदेशी निवेश को आकर्षित किया और वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकृत हुआ, जिससे तीव्र विकास संभव हुआ। 
  • बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास: सरकार द्वारा वित्तपोषित और राज्य के स्वामित्व वाली कंपनियों द्वारा निष्पादित बुनियादी ढांचे के निर्माण ने आर्थिक प्रगति को समर्थन दिया। 
  • चीनी शैली का आधुनिकीकरण मॉडल: यह मॉडल पश्चिमी शैली के विकास से अलग है और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के नेतृत्व में एक विशिष्ट आर्थिक और राजनीतिक विकास पथ पर जोर देता है। 
31. ईसाई धर्म के अंतर्गत वाद-विवाद में विभिन्न विद्वानों के विचारों के बारे में लिखे।
उत्तर:-
ईसाई धर्म के अंतर्गत वाद-विवाद में विभिन्न विद्वानों के विचारों में मुख्य रूप से धार्मिक सिद्धांतों में मतभेद, पवित्र ग्रंथों की व्याख्या, और यहूदी धर्म के साथ प्रारंभिक टकराव शामिल थे।
ईसाई धर्म के भीतर वाद-विवाद पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी के आरंभ में शुरू हुए। ये मतभेद कई शताब्दियों तक जारी रहे और विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किए: 

  • धार्मिक सिद्धांतों में मतभेद: प्रारंभिक ईसाई समुदाय में त्रिमूर्ति (ट्रिनिटी) की अवधारणा और मसीह की प्रकृति (ईश्वर और मानव दोनों) को लेकर मतभेद थे। 
  • पवित्र ग्रंथों की व्याख्या: बाइबल की विभिन्न व्याख्याओं के कारण मतभेद उत्पन्न हुए, जिससे विभिन्न शाखाएं और संप्रदाय बने। 
  • यहूदी धर्म से संबंध: चौथी शताब्दी में, चर्च के धर्मगुरुओं जैसे जॉन क्राइसोस्टोम और यूसेबियस ने यहूदी धर्म की कड़ी आलोचना की। 
  • प्रोटेस्टेंट सुधार: 1517 में धर्म सुधार आंदोलन ने प्रोटेस्टेंटवाद को जन्म दिया, जिससे कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच विभाजन हुआ। 
  • आधुनिक मुद्दे: बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दी में प्रोटेस्टेंटवाद की विभिन्न शाखाओं ने शिशु बपतिस्मा, विकासवाद, और सृष्टि संबंधी विचारों जैसे मुद्दों पर संघर्ष किया है। 
अथवा 

जापान की अर्थव्यवस्था के आधुनिकरण पर एक लेख लिखें।
उत्तर:-
जापान के आधुनिकीकरण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
  • मेजी पुनर्स्थापना (1868): इस घटना ने जापान के आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण की नींव रखी।
  • सरकारी पहल: मेजी सरकार ने विदेशी प्रतिस्पर्धा से घरेलू उद्योगों को बचाया और सक्रिय रूप से स्वदेशी उद्योग विकास में सहायता की, जिससे सरकार और व्यापार के बीच मजबूत संबंध बने। 
  • द्योगिक विकास: 1870 में उद्योग मंत्रालय की स्थापना की गई और रेलवे लाइनों, कारखानों (जैसे सीमेंट, कांच, कपड़ा निर्माण) और खानों के विकास में भारी निवेश किया गया। 
  • शिक्षा और तकनीकी प्रगति: शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलावों ने तकनीकी विकास और पत्रकारिता के विकास को बढ़ावा दिया, जिससे जनमानस में जागरूकता आई। 
  • ज़ैबात्सू (Zaibatsu): मित्सुई, मित्सुबिशी जैसे बड़े एकाधिकार घरानों ने विभिन्न व्यापारिक कारोबारों को नियंत्रित किया, जिससे आर्थिक विकास को गति मिली। 

32. मेसोपोटामिया सभ्यता के मारी नगर का वर्णन कीजिए।
उत्तर:-
मारी नगर मेसोपोटामिया की सभ्यता का एक महत्वपूर्ण और समृद्ध नगर था।
यह नगर व्यापार, संस्कृति और प्रशासन का एक प्रमुख केंद्र था। 
  • यह फरात (Euphrates) नदी के किनारे स्थित था, जिससे जल परिवहन और व्यापार सुगम होता था। 
  • मारी नगर व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत संपन्न था; यहाँ से तांबा, रांगा, तेल, लकड़ी, और शराब जैसी वस्तुओं का व्यापार होता था। 
  • दक्षिणी नगरों से आने वाले जलपोतों से 10% कर वसूला जाता था। 
  • यहाँ के शाही महलों और भवनों की खुदाइयों से प्रशासनिक अभिलेख, मूर्तियाँ और चित्र मिले हैं, जो वहाँ के सामाजिक और आर्थिक जीवन की जानकारी देते हैं। 
अथवा 

कोपरनिक्स क्रांति के बारे में आप क्या जानते है?
उत्तर:-
कोपरनिक्स क्रांति एक वैज्ञानिक क्रांति थी जो निकोलस कोपरनिकस द्वारा प्रस्तावित सूर्यकेंद्रीय मॉडल (heliocentric model) के कारण हुई।
  • इस मॉडल ने लंबे समय से चले आ रहे भूकेंद्रीय मॉडल (geocentric model) को चुनौती दी, जिसमें पृथ्वी को ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर माना जाता था। 
  • कोपरनिकस के मॉडल के अनुसार, सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र के पास स्थित है और पृथ्वी, अन्य ग्रहों के साथ, सूर्य की परिक्रमा करती है। 
  • उनकी पुस्तक \"डी रेवोल्यूशनिबस ऑर्बियम कोएलेस्टियम लिब्री VI\" (आकाशीय पिंडों की परिक्रमा से संबंधित छह पुस्तकें), जो 1543 में प्रकाशित हुई, इस क्रांति की शुरुआत थी। 
  • इस सिद्धांत ने खगोल विज्ञान में आधुनिक समझ का विकास किया और वैज्ञानिक सोच में एक मौलिक परिवर्तन लाया। 
खण्ड-घ (स्त्रोत आधारित प्रश्न)
Section-D (Sources Based Questions)

33.
1221 में बुखारा पर विजय प्राप्त करने के बाद, चंगेज खान ने धनी मुस्लिम निवासियों को 'उत्सव मैदान' में इकट्ठा किया और उन्हें फटकार लगाई। उसने उन्हें पापी कहा और चेतावनी दी कि इन पापों के प्रायश्चित के रूप में उन्हें अपना छिपा हुआ धन उसे देना होगा। यह एक नाटकीय घटना थी जिसका वर्णन करना सार्थक है, जिसे लोगों ने लंबे समय तक याद रखा और जिसके चित्र बनाए। सोलहवीं शताब्दी के अंत में, चंगेज खान के सबसे बड़े बेटे जोची के एक दूर के वंशज अब्दुल्ला खान, बुखारा के उसी उत्सव स्थल पर गए थे। चंगेज खान के विपरीत, अब्दुल्ला खान ईद की नमाज अदा करने के लिए वहां गए थे। उनके इतिहासकार हाफ़िज़-ए-तनीश ने अपने इतिहास में अपने स्वामी की मुस्लिम धर्मनिष्ठा का वर्णन किया है, साथ ही यह आश्चर्यजनक टिप्पणी भी की है: कि यह चंगेज़ खान के यासा के अनुसार था।

(i) यास का क्या अर्थ है?

उत्तर:- यास (Yassa) का अर्थ आदेश, नियम, या कानूनी संहिता है। यह चंगेज़ खान द्वारा स्थापित मंगोल साम्राज्य के लिए नियमों और दिशानिर्देशों का एक संग्रह था, जिसका उद्देश्य मंगोल समाज, सेना और प्रशासन को एकजुट करना था। 

(ii) चंगेज खाँ ने यास की घोषणा कब और कहाँ की?

उत्तर:- चंगेज़ खान ने 1206 ईस्वी में ओनान नदी के तट पर (वर्तमान मंगोलिया में) यास की घोषणा की। यह घोषणा उन्हें मंगोलों का "महान खान" चुने जाने के बाद एक बड़ी सभा या कुरुलताई में की गई थी। 

(iii) चंगेज खाँ ने उत्सव मैदान पर किसकी भर्त्सना की?

उत्तर:- चंगेज़ खान ने उत्सव मैदान पर अपने एक सेनापति (जनरल) की भर्त्सना की थी। इस सेनापति ने युद्ध के दौरान दुश्मन के माल को लूटने में अनुशासनहीनता दिखाई थी, जो यास के नियमों का उल्लंघन था। 

(iv) 16वीं सदी के अन्त में बुखारा के उत्सव मैदान पर किस व्यक्ति ने नमाज अदा की।
उत्तर:- 16वीं सदी के अंत में बुखारा के उत्सव मैदान पर अब्दुल्ला खान द्वितीय ने नमाज़ अदा की थी।

34. 
उन्नीसवीं शताब्दी के इतिहासकारों ने उस काल के सांस्कृतिक परिवर्तनों का वर्णन करने के लिए 'पुनर्जागरण' शब्द का प्रयोग किया (जिसका शाब्दिक अर्थ पुनर्जन्म है, हिंदी में 'पुनर्जीवण')। स्विट्जरलैंड के बेसल विश्वविद्यालय के इतिहासकार जैकब बर्कहार्ट (1818-97) ने इस पर बहुत जोर दिया था। वह जर्मन इतिहासकार लियोपोल्ड वॉन रैंके (1795-1886) के छात्र थे। रैंके ने उनसे कहा कि इतिहासकार का प्राथमिक उद्देश्य राज्यों और राजनीति के बारे में लिखना है, जिसके लिए उन्हें सरकारी विभागों के कागजात और फाइलों का उपयोग करना चाहिए। लेकिन बर्कहार्ट अपने गुरु के सीमित लक्ष्यों से असंतुष्ट थे। उनके अनुसार, इतिहास लेखन में राजनीति ही सब कुछ नहीं है। इतिहास का संबंध राजनीति के साथ-साथ संस्कृति से भी उतना ही है। सन् 1860 में, बर्कहार्ट ने इटली में पुनर्जागरण की सभ्यता नामकपुस्तक लिखी 

(i) रेनेसा का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर:- 
रेनेसां (Renaissance) एक फ्रांसीसी शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ "फिर से जागना" या "पुनर्जन्म" होता है। यह 14वीं से 17वीं शताब्दी के बीच यूरोप में हुए सांस्कृतिक, कलात्मक और बौद्धिक विकास के महत्वपूर्ण काल को संदर्भित करता है, जिसने मध्य युग से आधुनिक युग की ओर संक्रमण को चिह्नित किया

(ii) इतिहासकार जैकब बर्कहर्ट किसके शिष्य थे?
उत्तर:- 
इतिहासकार जैकब बर्कहर्ट (Jacob Burckhardt) लियोपोल्ड वॉन रैंके (Leopold von Ranke) के शिष्य थे, जो आधुनिक स्रोत-आधारित इतिहासलेखन के संस्थापकों में से एक माने जाते हैं।

(iii) इतिहासकार जैकब बर्कहर्ट का सम्बन्ध किस विश्वविद्यालय से था?
उत्तर:- 
जैकब बर्कहर्ट का संबंध मुख्य रूप से बेसल विश्वविद्यालय (University of Basel) से था, जहाँ उन्होंने 1858 से अपनी सेवानिवृत्ति तक इतिहास के प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।

(v) दि सिविलाईजेशन ऑफ दि रेनेसाँ इन इटली नामक पुस्तक के लेखक कौन था ?
उत्तर:- 
"दि सिविलाइज़ेशन ऑफ़ दि रेनेसां इन इटली" (The Civilization of the Renaissance in Italy) नामक प्रसिद्ध पुस्तक के लेखक स्विस इतिहासकार जैकब बर्कहर्ट हैं। यह पुस्तक पहली बार 1860 में प्रकाशित हुई थी और इसे पुनर्जागरण के अध्ययन में एक मौलिक कार्य माना जाता है। 

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी राज्यों में, जहां की अर्थव्यवस्था बागानों (और इसलिए गुलामी) पर आधारित नहीं थी, गुलामी के उन्मूलन के लिए तर्क दिया गया और इसे एक अमानवीय प्रथा बताया गया। 1861-65 में, उन राज्यों के बीच युद्ध छिड़ गया जो दास प्रथा को जारी रखना चाहते थे और जो इसके उन्मूलन की वकालत कर रहे थे। दास प्रथा विरोधी कार्यकर्ताओं को जीत मिली। दास प्रथा समाप्त कर दी गई, हालांकि अफ्रीकी अमेरिकियों को नागरिक स्वतंत्रता के लिए अपने संघर्ष में जीत 20वीं शताब्दी में ही मिली, और तभी स्कूलों और ट्रेनों-बसों में उन्हें अलग रखने की व्यवस्था समाप्त हुई। कनाडा सरकार के सामने एक ऐसी समस्या थी जिसका समाधान लंबे समय तक संभव नहीं था। और जो मूल निवासियों के प्रश्न से अधिक महत्वपूर्ण प्रतीत होता था। 1763 में, अंग्रेजों ने फ्रांस के साथ युद्ध में कनाडा पर विजय प्राप्त की। वहां फ्रांसीसी बसने वाले लोग लगातार स्वायत्त राजनीतिक दर्जे की मांग कर रहे थे। इस समस्या का समाधान केवल 1867 में कनाडा को स्वायत्त राज्यों के संघ के रूप में संगठित करके ही संभव हो सका।
(i) संयुक्त राज्य अमेरिका में किस अमानवीय प्रथा के कारण गृह युद्ध हुआ?
उत्तर:-दास प्रथा (Slavery)
Explanation: संयुक्त राज्य अमेरिका में गृह युद्ध का मुख्य कारण दास प्रथा (Slavery) का मुद्दा था। उत्तरी राज्य औद्योगिक थे और स्वतंत्र श्रम पर निर्भर थे, जबकि दक्षिणी राज्य अपनी कृषि अर्थव्यवस्था, विशेषकर कपास के लिए, दास श्रम पर बहुत अधिक निर्भर थे। इस आर्थिक और सामाजिक अंतर के कारण दासता के मुद्दे पर असहमति उत्पन्न हुई, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ा और अंततः युद्ध हुआ. 

(ii) संयुक्त राज्य अमेरिका में गृह युद्ध कब हुआ?
उत्तर:- 1861 से 1865 तक
Explanation: अमेरिकी गृह युद्ध अप्रैल 1861 में शुरू हुआ और 9 अप्रैल 1865 को समाप्त हो गया, जब कॉन्फेडरेट जनरल रॉबर्ट ई. ली ने जनरल यूलिसिस एस. ग्रांट के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. 
(iii) संयुक्त राज्य अमेरिका के किन राज्यों ने दास प्रथा को समाप्त करने के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किए?
उत्तर:- उत्तरी राज्यों (Northern states)
Explanation: संयुक्त राज्य अमेरिका के उत्तरी राज्यों ने दास प्रथा को समाप्त करने या नए पश्चिमी क्षेत्रों में इसके विस्तार को रोकने के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किए. उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्था स्वतंत्र श्रम पर आधारित थी, जिससे वहां दास प्रथा के प्रति विरोध था. 

(iv) अफ्रीकी मूल के अमरीकियों को नागरिक स्वतन्त्रता कब मिली?
उत्तर:- 1865
Explanation: अफ्रीकी मूल के अमेरिकियों को नागरिक स्वतंत्रता (दासता का उन्मूलन) आधिकारिक तौर पर 18 दिसंबर, 1865 को मिली, जब 13वां संशोधन संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के भाग के रूप में अपनाया गया था. इस संशोधन ने पूरे देश में दास प्रथा को समाप्त कर दिया
36. विश्व मानचित्र में निम्न स्थलों को चिन्हित कीजिए ।
  • चीन
  • मंगोलिया
  • जापान
  • उत्तर कोरिया (नोर्थ कोरिया)
  • इराक



Post a Comment

0 Comments

"
"