Chapter 5 – भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन ( 1919 ई० से 1947 ई० तक ) Exercise Solution
महत्वपूर्ण तिथियां :-
हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ का कानपुर में गठन – 1924 ई.
काकोरी की घटना – 9 अगस्त, 1925 ई.
सांडर्स की हत्या – 17 दिसम्बर, 1928 ई.
केंद्रीय असेम्बली में धमाका – 8 अप्रैल, 1929 ई.
चटगाँव शस्त्रागार पर हमला – 18 अप्रैल, 1930 ई.
चन्द्रशेखर आजाद की शहीदी – 27 फरवरी, 1931 ई.
सूर्यसेन की गिरफ्तारी – 16 फरवरी, 1933 ई.
क्रांतिकारी सूर्यसेन की शहीदी – 12 जनवरी, 1934 ई.
उधम सिंह की शहीदी – 31 जुलाई, 1940 ई.
नौसेना का सशस्त्र आंदोलन – 1946 ई.
Question Answer
खाली स्थान भरें :
काकोरी की घटना _______ के नेतृत्व में हुई।
भगत सिंह पर मुकद्दमा ________ ई. को शुरू हुआ।
नौसेना का आंदोलन ________ ई. में हुआ।
__________ को शहीदी दिवस मनाया जाता है।
चटगाँव घटना का नेतृत्व ________ ने किया।
उत्तर – 1. पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, 2. 1929 , 3. 1946 , 4. 23 मार्च , 5.सूर्यसेन
सही व गलत की पहचान करें :
चौरी-चौरा की हिंसक घटना 5 फरवरी, 1922 को हुई। (✓)
काकोरी घटना में अश्फाकुल्लाह खान शामिल थे। (✓)
काकोरी में 8 डाऊन सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन को लूट के लिए रोका गया। (✓)
भगत सिंह व उनके साथियों की भूख हड़ताल केवल बीस दिन चली। (×)
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 23 मार्च, 1931 ई. को फांसी दी गई। (✓)
फिर से जानें :
काकोरी घटना 9 अगस्त, 1925 ई. में हुई।
साइमन कमीशन का विरोध पंजाब में नेता लाला लाजपतराय द्वारा किया गया।
गांधी-इर्विन समझौता मार्च 1931 ई. को हुआ।
चटगांव शस्त्रागार पर हमले का नेतृत्व सूर्यसेन ने किया।
शाही नौसेना का सशस्त्र संघर्ष आई. एन. एस. तलवार जहाजी पोत पर हुआ।
आइये विचार करें :
प्रश्न 1. काकोरी की घटना पर विस्तार से चर्चा करें। इसका परिणाम क्या रहा?
उत्तर – सबसे पहले उत्तर भारत के क्रांतिकारियों ने संगठित होना आरम्भ कर दिया। इनके नेता राम प्रसाद बिस्मिल, योगेश चंद्र चटर्जी, शचींद्रनाथ सान्याल व सुरेश चंद्र भट्टाचार्य थे। अक्टूबर 1924 ई. में इन क्रांतिकारियों का कानपुर में एक सम्मेलन हुआ जिसमें हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ का गठन किया गया। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता को उखाड़ फेंकना और एक संघीय गणतंत्र ‘संयुक्त राज्य भारत’ की स्थापना करना था। संघर्ष छेड़ने, प्रचार करने, युवाओं को अपने दल में मिलाने, प्रशिक्षित करने और हथियार जुटाने के लिए उन्हें धन की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य के लिए इस संगठन के 10 व्यक्तियों ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में शाहजहाँपुर में एक बैठक की और अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनाई। 9 अगस्त, 1925 ई. को लखनऊ जिले के गांव काकोरी के रेलवे स्टेशन से छूटी 8-डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को चेन खींच कर रोक लिया व अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया। सरकार इस घटना से बहुत कुपित हुई व भारी संख्या में युवकों को गिरफ्तार किया गया। उन पर मुकद्दमा चलाया गया। पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहड़ी व अशफाकुल्लाह खाँ को फाँसी की सजा दी गई। चार को आजीवन कारावास देकर अंडमान भेज दिया। 17 अन्य लोगों को लंबी सजाएं सुनाई गई। चंद्रशेखर आजाद अंत समय तक पकड़े नहीं जा सके।
प्रश्न 2. नौजवान सभा क्या थी? इसके क्रांतिकारी सदस्यों के नाम बताते हुए इनके कार्यों व उद्देश्यों पर चर्चा करें।
उत्तर – काकोरी केस के पश्चात् उत्तर भारत के क्रांतिकारियों को फिर से संगठित करने का बीड़ा चंद्रशेखर आजाद ने उठाया। भगवती चरण वोहरा, भगत सिंह, यशपाल, सुखदेव एवं जयचंद्र विद्यालंकार ने पहले से ही “पंजाब नौजवान भारत सभा” के संगठन के अंतर्गत पंजाब में एक सशक्त क्रांतिकारी आंदोलन की नींव रखी थी। कानपुर के विजय कुमार सिन्हा, बटुकेश्वर दत्त और अजय कुमार घोष, झांसी के भगवान दास, शिव वर्मा, सदाशिवराव, संयुक्त प्रांत एवं बिहार से जय गोपाल, कुंदनलाल, कमल नाथ तिवारी, महावीर सिंह, राजगुरु ने भी क्रांतिकारी गतिविधियाँ चालू रखी थी। इन सबने चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में काम करना स्वीकार कर लिया। क्रांतिकारी गतिविधियाँ अब भारत में तेज होने लगी थी।
उत्तर – काकोरी केस के पश्चात् उत्तर भारत के क्रांतिकारियों को फिर से संगठित करने का बीड़ा चंद्रशेखर आजाद ने उठाया। भगवती चरण वोहरा, भगत सिंह, यशपाल, सुखदेव एवं जयचंद्र विद्यालंकार ने पहले से ही “पंजाब नौजवान भारत सभा” के संगठन के अंतर्गत पंजाब में एक सशक्त क्रांतिकारी आंदोलन की नींव रखी थी। कानपुर के विजय कुमार सिन्हा, बटुकेश्वर दत्त और अजय कुमार घोष, झांसी के भगवान दास, शिव वर्मा, सदाशिवराव, संयुक्त प्रांत एवं बिहार से जय गोपाल, कुंदनलाल, कमल नाथ तिवारी, महावीर सिंह, राजगुरु ने भी क्रांतिकारी गतिविधियाँ चालू रखी थी। इन सबने चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में काम करना स्वीकार कर लिया। क्रांतिकारी गतिविधियाँ अब भारत में तेज होने लगी थी।
प्रश्न 3. “हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ” का गठन कब व किसने किया? इसका काकोरी घटना से किस प्रकार सीधा संबंध था ?
उत्तर – सबसे पहले उत्तर भारत के क्रांतिकारियों ने संगठित होना आरम्भ कर दिया। इनके नेता राम प्रसाद बिस्मिल, योगेश चंद्र चटर्जी, शचींद्रनाथ सान्याल व सुरेश चंद्र भट्टाचार्य थे। अक्टूबर 1924 ई. में इन क्रांतिकारियों का कानपुर में एक सम्मेलन हुआ जिसमें “हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ” का गठन किया गया। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता को उखाड़ फेंकना और एक संघीय गणतंत्र ‘संयुक्त राज्य भारत’ की स्थापना करना था। संघर्ष छेड़ने, प्रचार करने, युवाओं को अपने दल में मिलाने, प्रशिक्षित करने और हथियार जुटाने के लिए उन्हें धन की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य के लिए इस संगठन के 10 व्यक्तियों ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में शाहजहाँपुर में एक बैठक की और अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनाई। 9 अगस्त, 1925 ई. को लखनऊ जिले के गांव काकोरी के रेलवे स्टेशन से छूटी 8-डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को चेन खींच कर रोक लिया व अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया। सरकार इस घटना से बहुत कुपित हुई व भारी संख्या में युवकों को गिरफ्तार किया गया।
उत्तर – सबसे पहले उत्तर भारत के क्रांतिकारियों ने संगठित होना आरम्भ कर दिया। इनके नेता राम प्रसाद बिस्मिल, योगेश चंद्र चटर्जी, शचींद्रनाथ सान्याल व सुरेश चंद्र भट्टाचार्य थे। अक्टूबर 1924 ई. में इन क्रांतिकारियों का कानपुर में एक सम्मेलन हुआ जिसमें “हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ” का गठन किया गया। इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से औपनिवेशिक सत्ता को उखाड़ फेंकना और एक संघीय गणतंत्र ‘संयुक्त राज्य भारत’ की स्थापना करना था। संघर्ष छेड़ने, प्रचार करने, युवाओं को अपने दल में मिलाने, प्रशिक्षित करने और हथियार जुटाने के लिए उन्हें धन की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य के लिए इस संगठन के 10 व्यक्तियों ने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में शाहजहाँपुर में एक बैठक की और अंग्रेजी सरकार का खजाना लूटने की योजना बनाई। 9 अगस्त, 1925 ई. को लखनऊ जिले के गांव काकोरी के रेलवे स्टेशन से छूटी 8-डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर ट्रेन को चेन खींच कर रोक लिया व अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया। सरकार इस घटना से बहुत कुपित हुई व भारी संख्या में युवकों को गिरफ्तार किया गया।
प्रश्न 4. शाही नौसेना के आंदोलन पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसका महत्व बताइये।
उत्तर – ब्रिटिश सरकार ने ‘आजाद हिंद फौज’ के कुछ अफसरों के विरुद्ध ब्रिटिश शासन की वफादारी की शपथ तोड़ने और विश्वासघात करने के आरोप में मुकद्दमा चलाने की घोषणा की तो राष्ट्रवादी विरोध की लहर सारे देश में फैल गई। सारे देश में विशाल प्रदर्शन हुए। ‘आजाद हिंद फौज’ के आंदोलन का प्रभाव राष्ट्रीय आंदोलन पर तथा सेना पर भी पड़ा। सन् 1946 ई. में सेना में अशांति फैलने लगी थी। इस आंदोलन की स्वतः स्फूर्त शुरुआत 18 फरवरी, 1946 ई. को नौसेना के सिगनल्स प्रशिक्षण पोत ‘आई. एन. एस. तलवार’ से हुई। नाविकों द्वारा खराब खाने की शिकायत करने पर अंग्रेज कमान अफसरों ने नस्ली अपमान और प्रतिशोध का रवैया अपनाया। वे सीधे तौर पर भारतीय सैनिकों के साथ अपमानजनक व्यवहार करते थे। ब्रिटिश अधिकारियों का जवाब था “भिखारियों को चुनने की छूट नहीं हो सकती।” नाविकों ने भूख हड़ताल कर दी। हड़ताल अगले दिन कैसल, फोर्ट बैरकों और बम्बई बन्दरगाह के 22 जहाजों तक फैल गई । यद्यपि यह बम्बई में आरम्भ हुआ परन्तु कराची से लेकर कलकत्ता तक पूरे ब्रिटिश भारत में इसे भरपूर समर्थन मिला। क्रांतिकारी नाविकों ने जहाज पर से यूनियन जैक के झण्डों को हटाकर वहां पर तिरंगा फहरा दिया। कुल मिलाकर 78 जलयानों, 20 स्थलीय ठिकानों एवं 20,000 नाविकों ने इसमें भाग लिया। जनवरी 1946 ई. में वायुसैनिकों ने भी बम्बई में हड़ताल शुरू कर दी। उनकी मांगें थी कि हवाई सेना में अंग्रेजों और भारतीयों में भेदभाव दूर किया जाए। इनके नारे थे ‘जय हिंद’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘ब्रिटिश साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’, ‘ब्रिटिश साम्राज्यवाद का नाश हो।’ वास्तव में अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का निर्णय आजाद हिंद फौज के संघर्ष तथा नौसेना के आंदोलन के पश्चात सेना में उत्पन्न हुए आक्रोश के कारण ही लिया।
उत्तर – ब्रिटिश सरकार ने ‘आजाद हिंद फौज’ के कुछ अफसरों के विरुद्ध ब्रिटिश शासन की वफादारी की शपथ तोड़ने और विश्वासघात करने के आरोप में मुकद्दमा चलाने की घोषणा की तो राष्ट्रवादी विरोध की लहर सारे देश में फैल गई। सारे देश में विशाल प्रदर्शन हुए। ‘आजाद हिंद फौज’ के आंदोलन का प्रभाव राष्ट्रीय आंदोलन पर तथा सेना पर भी पड़ा। सन् 1946 ई. में सेना में अशांति फैलने लगी थी। इस आंदोलन की स्वतः स्फूर्त शुरुआत 18 फरवरी, 1946 ई. को नौसेना के सिगनल्स प्रशिक्षण पोत ‘आई. एन. एस. तलवार’ से हुई। नाविकों द्वारा खराब खाने की शिकायत करने पर अंग्रेज कमान अफसरों ने नस्ली अपमान और प्रतिशोध का रवैया अपनाया। वे सीधे तौर पर भारतीय सैनिकों के साथ अपमानजनक व्यवहार करते थे। ब्रिटिश अधिकारियों का जवाब था “भिखारियों को चुनने की छूट नहीं हो सकती।” नाविकों ने भूख हड़ताल कर दी। हड़ताल अगले दिन कैसल, फोर्ट बैरकों और बम्बई बन्दरगाह के 22 जहाजों तक फैल गई । यद्यपि यह बम्बई में आरम्भ हुआ परन्तु कराची से लेकर कलकत्ता तक पूरे ब्रिटिश भारत में इसे भरपूर समर्थन मिला। क्रांतिकारी नाविकों ने जहाज पर से यूनियन जैक के झण्डों को हटाकर वहां पर तिरंगा फहरा दिया। कुल मिलाकर 78 जलयानों, 20 स्थलीय ठिकानों एवं 20,000 नाविकों ने इसमें भाग लिया। जनवरी 1946 ई. में वायुसैनिकों ने भी बम्बई में हड़ताल शुरू कर दी। उनकी मांगें थी कि हवाई सेना में अंग्रेजों और भारतीयों में भेदभाव दूर किया जाए। इनके नारे थे ‘जय हिंद’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘ब्रिटिश साम्राज्यवाद मुर्दाबाद’, ‘ब्रिटिश साम्राज्यवाद का नाश हो।’ वास्तव में अंग्रेजों ने भारत छोड़ने का निर्णय आजाद हिंद फौज के संघर्ष तथा नौसेना के आंदोलन के पश्चात सेना में उत्पन्न हुए आक्रोश के कारण ही लिया।
प्रश्न 5. भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल की भारत की आजादी में क्या भूमिका रही?
उत्तर –
भगत सिंह की भूमिका :- भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की हत्या का बदला अंग्रेजी पुलिस अफसर की हत्या करके लिया। उसके बाद भगत सिंह दुर्गा भाभी के साथ कलकत्ता पहुंच गए। वहां उन्होंने बम बनाने सीखें और वापिस अपने क्षेत्र में आकर बम बनाने की फैक्ट्री लगा दी। 1929 ई. को “सार्वजनिक सभा” एवं “औद्योगिक विवाद बिल” पर जब बहस हो रही थी तो दर्शक गैलरी से भगत सिंह ने दो बम गिरा दिए जिससे वहां हड़कंप मच गया। भगत सिंह ने भागने का कोई प्रयास नहीं किया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसका नाम देश के घर घर में पहुंच चुका था। भगत सिंह को कई सारे केसों के तहत अंत में फांसी की सजा सुनाई गई। भगत सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देेकर लोगों को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कर दिया और एकजुट भी किया।
चंद्रशेखर आजाद की भूमिका :- भगत सिंह की गिरफ्तारी के बाद चंद्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी गतिविधियां जारी रखें। उसके सभी साथी पकड़ लिए गए थे उसके बाद भी उसने हार नहीं मानी। 1931 ई. में उसके साथी द्वारा धोखे दिए जाने की वजह से पुलिस ने उस को चारों तरफ से घेर लिया। इसी दौरान चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मार ली और वीरगति को प्राप्त हो गए।
रामप्रसाद बिस्मिल :- राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर काकोरी की घटना को अंजाम दिया। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने संगठन को चलाने के लिए 1925 ई. में काकोरी के रेलवे स्टेशन से छुट्टी 8 डाउन सहारनपुर लखनऊ पैसेंजर ट्रेन की चेन को खींचा और अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया और फांसी की सजा दी। उन्होंने देश की आजादी के लिए हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ का निर्माण किया था।
उत्तर –
भगत सिंह की भूमिका :- भगत सिंह ने लाला लाजपत राय की हत्या का बदला अंग्रेजी पुलिस अफसर की हत्या करके लिया। उसके बाद भगत सिंह दुर्गा भाभी के साथ कलकत्ता पहुंच गए। वहां उन्होंने बम बनाने सीखें और वापिस अपने क्षेत्र में आकर बम बनाने की फैक्ट्री लगा दी। 1929 ई. को “सार्वजनिक सभा” एवं “औद्योगिक विवाद बिल” पर जब बहस हो रही थी तो दर्शक गैलरी से भगत सिंह ने दो बम गिरा दिए जिससे वहां हड़कंप मच गया। भगत सिंह ने भागने का कोई प्रयास नहीं किया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसका नाम देश के घर घर में पहुंच चुका था। भगत सिंह को कई सारे केसों के तहत अंत में फांसी की सजा सुनाई गई। भगत सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देेकर लोगों को अंग्रेजी शासन के विरुद्ध कर दिया और एकजुट भी किया।
चंद्रशेखर आजाद की भूमिका :- भगत सिंह की गिरफ्तारी के बाद चंद्रशेखर आजाद ने क्रांतिकारी गतिविधियां जारी रखें। उसके सभी साथी पकड़ लिए गए थे उसके बाद भी उसने हार नहीं मानी। 1931 ई. में उसके साथी द्वारा धोखे दिए जाने की वजह से पुलिस ने उस को चारों तरफ से घेर लिया। इसी दौरान चंद्रशेखर आजाद ने खुद को गोली मार ली और वीरगति को प्राप्त हो गए।
रामप्रसाद बिस्मिल :- राम प्रसाद बिस्मिल ने अपने साथियों के साथ मिलकर काकोरी की घटना को अंजाम दिया। उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर अपने संगठन को चलाने के लिए 1925 ई. में काकोरी के रेलवे स्टेशन से छुट्टी 8 डाउन सहारनपुर लखनऊ पैसेंजर ट्रेन की चेन को खींचा और अंग्रेजी सरकार का खजाना लूट लिया। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया और फांसी की सजा दी। उन्होंने देश की आजादी के लिए हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ का निर्माण किया था।
प्रश्न 6. सूर्यसेन की क्रांतिकारी आंदोलन में क्या भूमिका थी?
उत्तर – 1924 ई. के बाद बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों में शिथिलता आ गई। 1930 ई. के प्रारंभ में सूर्यसेन ने पुनः क्रांतिकारी आंदोलन को सक्रिय किया। भारतीय क्रांतिकारी सूर्यसेन ने चटगाँव (बंगाल प्रेसीडेंसी, अब बांग्लादेश में) में पुलिस व सहायक बलों के शस्त्रागार पर छापा मार कर लूटने की योजना बनाई। 18 अप्रैल, 1930 ई. को रात 10 बजे योजना क्रियान्वित की गई। गणेश घोष की अगुवाई में क्रांतिकारियों के एक समूह ने पुलिस शस्त्रागार पर कब्जा कर लिया। भारतीय रिपब्लिकन सेना, चटगाँव शाखा के नाम पर किए गए इस हमले में करीब 65 लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके पीछे सूर्यसेन का मुख्य उद्देश्य मुख्य शस्त्रागार लूटने, टेलीग्राफ एवं टेलिफोन कार्यालय को नष्ट करने और यूरोपीय क्लब के सदस्यों, जिसमें से अधिकांश सरकारी या सैन्य अधिकारी थे, उन्हें बंधक बनाने की योजना थी। क्रांतिकारी गोला बारूद का पता लगाने में असफल रहे। परन्तु उसी रात उन्होंने पुलिस शस्त्रागार पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। एक अस्थायी क्रांतिकारी सरकार की घोषणा की और जल्दी ही चटगाँव छोड़ दिया। बाद में 16 फरवरी, 1933 ई. को सूर्यसेन को गिरफ्तार कर लिया गया और 12जनवरी, 1934 ई. को उन्हें फांसी दे दी गई।
उत्तर – 1924 ई. के बाद बंगाल में क्रांतिकारी गतिविधियों में शिथिलता आ गई। 1930 ई. के प्रारंभ में सूर्यसेन ने पुनः क्रांतिकारी आंदोलन को सक्रिय किया। भारतीय क्रांतिकारी सूर्यसेन ने चटगाँव (बंगाल प्रेसीडेंसी, अब बांग्लादेश में) में पुलिस व सहायक बलों के शस्त्रागार पर छापा मार कर लूटने की योजना बनाई। 18 अप्रैल, 1930 ई. को रात 10 बजे योजना क्रियान्वित की गई। गणेश घोष की अगुवाई में क्रांतिकारियों के एक समूह ने पुलिस शस्त्रागार पर कब्जा कर लिया। भारतीय रिपब्लिकन सेना, चटगाँव शाखा के नाम पर किए गए इस हमले में करीब 65 लोगों ने हिस्सा लिया था। इसके पीछे सूर्यसेन का मुख्य उद्देश्य मुख्य शस्त्रागार लूटने, टेलीग्राफ एवं टेलिफोन कार्यालय को नष्ट करने और यूरोपीय क्लब के सदस्यों, जिसमें से अधिकांश सरकारी या सैन्य अधिकारी थे, उन्हें बंधक बनाने की योजना थी। क्रांतिकारी गोला बारूद का पता लगाने में असफल रहे। परन्तु उसी रात उन्होंने पुलिस शस्त्रागार पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। एक अस्थायी क्रांतिकारी सरकार की घोषणा की और जल्दी ही चटगाँव छोड़ दिया। बाद में 16 फरवरी, 1933 ई. को सूर्यसेन को गिरफ्तार कर लिया गया और 12जनवरी, 1934 ई. को उन्हें फांसी दे दी गई।
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