HBSE Class 9 सामाजिक विज्ञान Chapter 2 – राष्ट्रीय चेतना के तत्व Exercise Solution

 Chapter 2 – राष्ट्रीय चेतना के तत्व Exercise Solution


फिर से जाने –


थियोसोफिकल सोसायटी की प्रमुख नेता श्रीमती एनी बेसेंट थी।

मेडलिन स्लेड का भारतीय नाम मीरा बेन था।

एशियाटिक सोसाइटी की स्थापना विलियम जोंस ने की।

‘केसरी’ नामक समाचार पत्र का संबंध लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से था।

दीनबंधु मित्र द्वारा रचित नाटक का नाम नील दर्पण था।

भारत में अंग्रेजी शिक्षा 1835 ई. में प्रारंभ हुई।

सुभाष चंद्र बोस गैरीबाल्डी ( इटली ) से बहुत प्रभावित थे।

मिलान कीजिए –


बंकिम चंद्र चटर्जी

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

दादाभाई नौरोजी

राजा राममोहन राय

वीर सावरकर

मराठा

बंगदूत

आनंदमठ

द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस—1857

पॉवर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया

उत्तर –


बंकिम चंद्र चटर्जी

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

दादाभाई नौरोजी

राजा राममोहन राय

वीर सावरकर

आनंदमठ

 मराठा

पॉवर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया

बंगदूत

द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस—1857

आइये विचार करें


प्रश्न 1. अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों का भारत और भारतीयों पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – अंग्रेजों की शोषणकारी नीतियों के भारत और भारतीयों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़े

अंग्रेजों ने भूमि कर इकट्ठा करने के लिए बहुत सख्त भू राजस्व नीतियां लागू की जिससे कृषि पर निर्भर विभिन्न वर्गों बहुत अधिक गरीब हो गए।

औद्योगिक क्रांति आने से भारत से कच्चा माल निर्यात और तैयार माल आयात होने लगा। जिससे भारत के हस्तशिल्प व लघु उद्योग नष्ट हो गए तथा भारतीय व्यापारियों को बहुत हानि उठानी पड़ी।

भारत से बड़ी मात्रा में धन लगातार इंग्लैंड जाता रहा जिससे भारत में धन की कमी होने लगी और भारत गरीबी में आ गया।

 प्रश्न 2. अंग्रेजी शासन की आलोचना करने वाले समाचार पत्रों का वर्णन करें?

उत्तर – राजा राममोहन राय द्वारा प्रकाशित ‘बंगदूत’, ‘संवाद कौमुदी’, ‘ब्राह्मनिकल’ प्रारम्भिक समाचार-पत्र थे। बाद में और भी अनेक समाचार-पत्र, जैसे ‘बंगाली’, ‘अमृत बाजार पत्रिका’, ‘इन्दु प्रकाश’, ‘मराठा’, ‘केसरी’, ‘दि हिन्दू’, ‘कोहिनूर’, ‘प्रताप’, ‘यंग इंडिया’ आदि प्रकाशित हुए। 1877 ई. तक भारतीय भाषाओं में छपने वाले समाचार-पत्रों की संख्या एक सौ उनहत्तर तक पहुँच गई थी। इन समाचार-पत्रों में अंग्रेजी सरकार की आलोचना प्रकाशित होने लगी तथा लोगों में लोकतांत्रिक विचारों को लोकप्रिय बनाया।


प्रश्न  3. अंग्रेजों ने भारत में अंग्रेजी शिक्षा का आरंभ किन स्वार्थों के लिए किया? भारतीयों ने इस शिक्षा का कैसे लाभ उठाया?

उत्तर – अंग्रेजी शिक्षा को लागू करने के पीछे अंग्रेजी सरकार का उद्देश्य सस्ते क्लर्क, वफादार वर्ग तथा अंग्रेजी माल की अधिक से अधिक खपत करना था । आरंभ में ऐसा हुआ भी किंतु शीघ्र ही अंग्रेजी पढ़कर भारत में एक नए भारतीय बुद्धिजीवी वर्ग का उदय हुआ। पश्चिमी शिक्षा का लाभ उठाते हुए भारतीयों ने पश्चिमी साहित्य जैसे- 1789 ई. की फ्रांसीसी क्रांति, इटली व जर्मनी के एकीकरण व आयरलैण्ड के स्वतंत्रता संघर्ष से प्रेरणा लेकर यह वर्ग स्वतंत्रता व स्वशासन की ओर आकर्षित हुआ।


प्रश्न  4. क्या भारत में राष्ट्रीयता अंग्रेजों की देन है?

उत्तर – हां, भारत में राष्ट्रीयता अंग्रेजों की देन है। अंग्रेजों के शोषण और अत्याचार की वजह से भारत के सभी वर्ग भारत को आजाद कराने के लिए विरोध करने लगे। भारत में पश्चिमी भाषा लागू करने से भारतीयों को दूसरे देशों के संघर्ष के बारे में पता चला और भारतीय स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की कामना करने लगे।


प्रश्न  5. भारत के गौरवशाली इतिहास द्वारा किस प्रकार भारतीयों में आत्मसम्मान व स्वाभिमान की भावना ने जन्म लिया ?

उत्तर – विदेशी विद्वानों ने प्राचीन भारतीय इतिहास पर शोध करके भारत की प्राचीन गौरवशाली सांस्कृतिक व ऐतिहासिक धरोहर को विश्व के सामने रखा। जेम्स प्रिन्सेप द्वारा ब्राह्मी लिपि पढ़ने से अशोक महान जैसे मौर्य सम्राट की जानकारी मिली, तो वहीं कनिंघम के पुरातात्त्विक उत्खनन से भारत की महान प्राचीन धरोहर का पता चला। यह ऐतिहासिक धरोहर किसी भी प्रकार से यूनान व रोम की सभ्यताओं से कमतर नहीं थी। कई विदेशी विद्वानों ने वेदों व उपनिषदों का गुणगान किया जिससे भारतीयों में आत्महीनता के स्थान पर आत्मसम्मान व स्वाभिमान की भावना ने जन्म लिया।

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