HBSE Class 11 History इतिहास (हरियाणा बोर्ड) Chapter-1 लेखन कला-और शहरी जीवन Notes

 HBSE Class 11 History इतिहास (हरियाणा बोर्ड) Chapter-1 लेखन कला-और शहरी जीवन Notes





मेसोपोटामिया :-

दजला और फरात नदियों के बीच स्थित यह प्रदेश आजकल इराक गणराज्य का हिस्सा है शहरी जीवन की शुरुआत इसी सभ्यता में होती है शहरी जीवन की शुरुआत मेसोपोटामिया में हुई मेसोपोटामिया की सभ्यता अपनी संपन्‍नता, शहरी जीवन, विशाल एवं समृद्ध साहित्य, गणित और खगोलविदया के लिए प्रसिद्ध है।

 

मेसोपोटामिया का अर्थ :-

यह शब्द यूनानी भाषा के दो शब्दों 'मेसोस ' यानि मध्य 'पोटैमोस 'यानि नदी से मिलकर बना है | मैसोपोटामिया दजला व फरात नदियों के बीच की उपजाऊ धरती को इंगित करता है ।

 

मेसोपोटामिया की भाषा :-

प्रथम ज्ञात भाषा सुमेरियन यानी सुमेरी थी। धीरे-धीरे 2400 ई.पू के आसपास जब अक्कदी भाषी लोग यहाँ आ गए तब अक्कदी ने सुमेरी भाषा का स्थान ले लिया। अक्कदी भाषा सिकंदर के समय (336-323 ईपू ) तक कुछ क्षेत्रीय परिवर्तनों के साथ फलती-फूलती रही। 1400 ई.पू से धीरे-धीरे अरामाइक  भाषा का भी प्रवेश शुरू हुआ। यह भाषा हिब्र्‌ से मिलती-जुलती थी ओर 1000 ई.पू के बाद व्यापक रूप से बोली जाने लगी थी। यह आज भी इराक के कुछ भागों में बोली जाती हे।

 

 मेसोपोटामिया की ऐतिहासिक जानकारी के प्रमुख स्त्रोत :-

मेसोपोटामिया में पुरातत्त्वीय खोजों की शुरुआत 1840 के दशक में हुई। वहाँ एक या दो स्थलों पर जैसे उरुक और मारी उत्खनन कार्य कई दशकों तक चलता रहा। इन खुदाइयों के फलस्वरूप आज हम इतिहास के स्रोतों के रूप में सैकड़ों की संख्या में इमारतों, मूर्तियों, आभूषणों, कब्रों, औज़ारों ओर मुद्राओं का ही नहीं बल्कि हज़ारों की संख्या में लिखित दस्तावेज़ों का भी अध्ययन कर सकते हें।

 

यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया इसलिए महत्त्वपूर्ण था क्योंकि बाईबल के प्रथम भाग “ओल्ड टेस्टामेंट' में इसका उल्लेख कई संदर्भों में किया गया हे। उदाहरण के लिए, ओल्ड टेस्टामेंट की 'बुक ऑफ जेनेसिस' (Book of Genesis) में 'शिमार' (Shimar) का उल्लेख है जिसका तात्पर्य अर्थात्‌ सुमेर ईंटों से बने शहरों की भूमि से है। यूरोप के यात्री ओर विद्वज्जन मेसोपोटामिया को एक तरह से अपने पूर्वजों की भूमि मानते थे, और जब इस क्षेत्र में पुरातत्वीय खोज की शुरुआत हुई तो ओल्ड टेस्टामेंट के अक्षरश: सत्य को सिद्ध करने का प्रयत्न किया गया।

सन 1873 में एक ब्रिटिश सामाचार-पत्र ने ब्रिटिश म्यूज़ियम द्वारा प्रारंभ किए गए खोज अभियान का खर्च उठाया जिसके अंतर्गत मेसोपोटामिया में एक ऐसी पट्टिका  (Tablet) की खोज की जानी थी जिसपर बाईबल में उल्लिखित जलप्लावन (Flood) की कहानी का अंकन था।

बाईबल के अनुसार यह जलप्लावन पृथ्वी पर संपूर्ण जीवन को नष्ट करने वाला था। किंतु परमेश्वर ने जलप्लावन के बाद भी जीवन को पृथ्वी पर सुरक्षित रखने के लिए नोआ (Naoh)नाम के एक मनुष्य को चुना। नोआ ने एक बहुत विशाल नाव बनायी ओर उसमें सभी जीव-जंतुओं का एक-एक जोड़ा रख लिया और जब जलप्लावन हुआ तो बाकी सब कुछ नष्ट हो गया पर नाव में रखे सभी जोडे सुरक्षित बच गए। ऐसी ही एक कहानी मेसोपोटामिया के परंपरागत साहित्य में भी मिलती है; 

इस कहानी के मुख्य पात्र को 'ज़िउ्सूद्र (Ziusudra) या “उतनापिष्टिम (Utnapishtim) जाता था।



मेसोपोटामिया की भौगोलिक स्थित :-

 इसके शहरीकृत दक्षिणी भाग को सुमेर और अक्कद कहा जाता था , बाद में इस भाग को बेबीलोनिया कहा जाने लगा |  इसके उत्तरी भाग को असीरियाईयों के कब्जा होने के बाद असीरिया कहा जाने लगा । 

★ इस सभ्यता में नगरों का निर्माण 3000 ई . पू . में प्रारम्भ हो गया था |उरूक , उर ओर मारी इसके प्रसिद्ध नगर थे |

★यहाँ स्टेपी घास के मैदान हैं अतः पशुपालन खेती की तुलना में आजीविका का अच्छा साधन है | अतः यहाँ कृषि , पशुपालन एवं व्यापार आजीविका के विभिन्‍न साधन हैं ।

 यहाँ के लोग औजार बनाने के लिए कॉसे का इस्तेमाल करते थे | यहाँ के उरुक नगर में एक स्त्री का शीर्ष मिला है जो सफेद संगमरमर को तराश कर बनाया गया है - वार्का शीर्ष । 

★श्रम विभाजन एवं सामाजिक संगठन शहरी जीवन एवं अर्थव्यवस्था की विशेषता थे । 

 यहाँ खादय - संसाधन तो समृद्ध थे परन्तु खनिज - संसाधनों का अभाव था , जिन्हें तुर्की ,ईरान अथवा खाड़ी पार देशों से मंगाया जाता था |

★यहाँ व्यापार के लिए परिवहन व्यवस्था अच्छी थी जलमार्ग द्वारा  फरात नदी व्यापार के लिए विश्व मार्ग के रुप में प्रसिद्ध थी । 

शहरी अर्थव्यवस्था में हिसाब - किताब , लेन - देन , रखने के लिए , यहाँ लेखन कला का विकास हुआ । 

मेसोपोटामिया की कृषि और जलवायु :-

  • दज़ला और फरात नाम की नदियां उत्तरी पहाड़ों से निकलकर अपने साथ उपजाउ बारीक मिटटी लाती रही हैं | जब इन नदियों में बाढ़ आती है अथवा जब इनके पानी को सिंचाई के लिए खेतों में ले जाया जाता है तब यह उपजाऊ मिटटी वहाँ जमा हो जाती है ।
  • यहाँ का रेगिस्तानी भाग जो दक्षिण में स्थित है यहाँ भी कृषि की जाती है फरात नदी जब इन रेगिस्तानों में पहुंचती है तो छोटे - छोटे कई धाराओं में बंटकर नहरों जैसे सिंचाई का कार्य करती है | यहाँ गेंहूं ,जौ , मटर और मसूर की खेती की जाती है ।
  • दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती सबसे ज़्यादा उपज देने वाल्री हुआ करती थी। हालांकि वहाँ फसल उपजाने के लिए आवश्यक वर्षा की कुछ कमी रहती। 
  • स्टेपी क्षेत्र का प्रमुख कार्य पशुपालन था । यहाँ खेती के अलावा भेड़ बकरियों स्टेपी घास के मैदानों , पूर्वोत्तरी मैदानों और पहाड़ों के ढालों पर पाली जाती थीं । 

लेखन प्रणाली की विशेषताएं :-

  • ध्वनि के लिए कीलाक्षर या किलाकार चिन्ह का प्रयोग किया जाता था वह एक अकेला व्यंजन या स्वर नहीं होता है ।  
  • अलग अलग ध्वनियों के लिए अलग अलग चिन्ह होते थे जिसके कारण लिपिक को सैकड़ों चिन्‍ह सीखने पड़ते थे ।
  • सुखने से पहले इन्हें गीली पट्टी पर लिखना होता था। 
  • लिखने के लिए कुशल व्यक्ति की आवश्यकता होती थी । 
  • इसमें भाषा - विशेष की ध्वनियों को एक दृश्य रूप देना होता था। 

 


 


 


कीलाकार ( क्यूनीफार्म ) :-

  • यह लातिनी शब्द 'क्यूनियस ', जिसका अर्थ 'खूँटी' और फोर्मा जिसका अर्थ ' आकार ' है ,से मिलकर बना है ।

मेसोपोटामिया के प्राचीनतम नगर :-


  • इस सभ्यता में नगरों का निर्माण 3000 ई . पू . में प्रारम्भ हो गया था | उरूक , उर ओर मारी इसके प्रसिद्ध नगर थे । 
  • यहाँ उर नगर में नगर - नियोजन पद्धति का अभाव था , गलियां टेढ़ी -मेढ़ी  एवं संकरी थी | जल - निकास प्रणाली अच्छी नहीं थी | उर वासी घर बनाते समय शकुन - अपशकुन पर विचार करते थे |
  • 2000 ई. पू . के बाद फरात नदी की उध्वंधारा पर मारी नगर शाही राजधानी के रूप में फला -फूला  | यह अत्यन्त महत्वपूर्ण व्यापारिक स्थल पर स्तिथ था । इसके कारण यह बहुत समृद्ध तथा खुशहाल था ।  यहाँ जिमरीलियम का राजमहल मिला है तथा एक मंदिर भी मिला  है ।

काल - गणना :-
  • काल - गणना और गणित की विद्वतापूर्ण परम्परा दुनिया को मेसोपोटामिया की सबसे बड़ी देन है ।
  • इस सभ्यता के लोग गुणा - भाग , वर्गमूल , चक्रवृद्धि ब्याज आदि से परिचित थे |
  • काल गणना के लिए यहाँ के लोगों ने एक वर्ष का 12 महीनों में ,1 महीने का 4 हफ्तों में ,1 दिन का 24 घंटों में तथा 1 घंटे का 60 मिनट में विभाजन किया था । 


मेसोपोटामिया के शहरों के प्रकार :-
  • वे जो मंदिरों के चारों ओर विकसित हुए शहर
  • वे जो व्यापार के केन्द्रों के रूप में विकसित हुए शहर
  • शाही शहर
शहरीकरण / नगरों की बसावट :-

शहर और नगर बड़ी संख्या में लोगों के रहने के ही स्थान नहीं होते थे। जब किसी अर्थव्यवस्था में खादय उत्पादन के अतिरिक्त अन्य आर्थिक गतिविधियों विकसित होने लगती है तब किसी एक स्थान पर जनसंख्या का घनत्व बढ़ जाता है ।  इसके फलस्वरूप कस्बे बसने लगते हैं। शहरी अर्थव्यवस्थाओं में खादय उत्पादन के अलावा व्यापार , उत्पादन और तरह - तरह की सेवाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है । नगर के लोग आत्मनिर्भर नहीं रहते और उन्हें नगर या गाँव के अन्य लोगों द्वारा उत्पन्न वस्तुओं या दी जाने वाली सेवाओं के लिए उन पर आश्रित होना पड़ता है। उनमें आपस में लेनदेन होता रहता है | इस प्रकार हम देखते है कि शहरी क्रियाकलाप से गाँव लोग भी जुड़े रहते हैं ।

शहरी जीवन का विशेषताएं :-

  • शहरी जीवन में श्रम - विभाजन होता है ।
  • विभिन्‍न कार्य से जुड़े लोग आपस में लेनदेन के माध्यम से जुड़े रहते हैं ।
  • शहरी विनिर्माताओं के लिए ईंधन , धातु , विभिन्‍न प्रकार के पत्थर , लकड़ी आदि जरूरी चीजें भिन्‍न - भिन्‍न जगहों से आती हैं ।

मेसोपोटामिया के शहरों में माल की आवाजाही :-

  • मेसोपोटामिया के खादय - संसाधन चाहे कितने भी समृदध रहे हों , उसके यहाँ खनिज - संसाधनों का अभाव था | दक्षिण के अधिकांश भागों में औजार , मोहरें मुद्राएं और आभूषण बनाने के लिए पत्थरों की कमी थी |
  • इराकी खजूर और पोपलार के पेड़ों की लकड़ी , गाडियाँ , गाडियों के पहिए या नावें बनाने के लिए कोई खास अच्छी नहीं थी
  • औजार , पात्र ,या गहने बनाने के लिए कोई धातु वहाँ उपलब्ध नहीं थी |
  • मेसोपोटामियाई लोग संभवतः लकड़ी ,ताँबा , राँगा , चाँदी , सोना , सीपी और विभिन्‍न प्रकार के पत्थरों को तुर्की और ईरान अथवा खाड़ी - पार के देशों से मंगाते थे जिसके लिए वे अपना कपड़ा और कृषि - जन्य उत्पाद काफी मात्रा में उन्हें निर्यात करते थे ।

मेसोपोटामिया के मंदिर:-
  • मेसोपोटामिया के कुछ प्रारंभिक मंदिर साधारण घरों की तरह थे अंतर केवल मंदिर की बाहरी दीवारों के कारण था जो कुछ खास अंतराल्र के बाद भीतर और बाहर की ओर मुड़ी होती थीं | 'उर '(चंद्र ) एवं इन्नाना ( प्रेम एवं युद्ध की देवी ) यहाँ के प्रमुख देवी देवता थे ।
  • ये कच्ची ईंटों का बना हुआ होता था ।
  • इन मंदिरों में विभिन्‍न प्रकार के देवी - देवताओं के निवास स्थान थे , जैसे उर जो चंद्र देवता था और इन्नाना जो प्रेम व युद्ध की देवी थी ।
  • ये मंदिर ईंटों से बनाए जाते थे और समय के साथ बड़े होते गए | क्योंकि उनके खुले आँगनों के चारों ओर कई कमरे बने होते थे ।
  • कुछ प्रारंभिक मंदिर साधारण घरों से अलग किस्म के नहीं होते थे - क्योंकि मंदिर भी किसी देवता का घर ही होता था |
  • मंदिरों की बाहरी दीवारें कुछ खास अंतरालों के बाद भीतर ओर बाहर की ओर मुड़ी हुई होती थीं यही मंदिरों की विशेषता थी ।
देवता पूजा :-

  • देवता पूजा का केंद्र बिंदु होता था । 
  • लोग देवी - देवता के लिए अन्न ,दही , मछली लाते थे
  • आराध्य देव सैद्धांतिक रूप से खेतों , मत्स्य क्षेत्रों और स्थानीय लोगों के पशुधन का स्वामी माना जाता था |
  • समय आने पर उपज को उत्पादित वस्तुओं में बदलने की प्रक्रिया जैसे तेल निकालना , अनाज पीसना , कातना आरै ऊनी कपड़ों को बुनना आदि मंदिरों के पास ही की जाती थी । 

मेसोपोटामिया के शासक :-

  • समय का यह विभाजन सिकंदर के उत्तराधिकारियों दवारा अपनाया गया और वहाँ से यह रोम तथा इस्लाम की दुनिया में तथा बाद में मध्ययुगीन यूरोप में पहुँचा। 
  • गिल्गेमिश :- उरूक नगर का शासक था , महान योद्धा था , जिसने दूर -दूर तक के प्रदेशों को अपने अधीन कर लिया था।
  • असीरियाई शासक असुर बनिपाल ने बेबिलोनिया से कई मिट्टी की पट्टिकायें मंगवाकर निनवै में एक पुस्तकालय स्थापित किया था।
  • नैबोपोलास्सर ने 625 ई.पू . में बेबिलोनिया को असीरियाई आधिपत्य से मुक्त कराया था |

331 इ.पू. में सिकंदर से पराजित होने तक बेबीलोन दुनिया का एक प्रमुख नगर बना रहा नैबोनिडस स्वतंत्र बेबीलोन का अंतिम शासक था।


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मेसोपोटामिया सभ्यता: संक्षिप्त अध्ययन नोट्स

1. परिचय एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि

मेसोपोटामिया, जिसका ग्रीक भाषा में अर्थ 'दो नदियों के बीच की भूमि' है, मानव इतिहास की सबसे पहली और प्रभावशाली सभ्यताओं में से एक का घर था। यह सभ्यता मुख्य रूप से दजला (टिगरिस) और फरात (यूफ्रेट्स) नदियों की उपजाऊ घाटी में फली-फूली। इन नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी और जल संसाधनों ने इस क्षेत्र को कृषि और स्थायी बस्तियों के लिए एक आदर्श स्थान बना दिया, जिसने अंततः दुनिया की पहली शहरी सभ्यताओं में से एक की नींव रखी।

मुख्य भौगोलिक विशेषताएँ

मेसोपोटामिया के भूगोल ने इसके विकास को गहराई से प्रभावित किया। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

  • अर्थ और स्थान: 'मेसोपोटामिया' शब्द दो नदियों के बीच के क्षेत्र को संदर्भित करता है, जो आज के आधुनिक इराक गणराज्य का हिस्सा है।
  • भौगोलिक विभाजन: इसका उत्तरी भाग एक ऊँची भूमि का विस्तार था जिसे स्टेपी कहा जाता है। इस क्षेत्र में, कृषि की तुलना में पशुपालन लोगों के लिए आजीविका का एक बेहतर साधन था।
  • कृषि का उदय: इस क्षेत्र में कृषि की शुरुआत लगभग 7000 से 6000 ईसा पूर्व के बीच हुई। यहाँ की भूमि अत्यधिक उपजाऊ थी, लेकिन नदियों में आने वाली बाढ़ जैसे प्राकृतिक खतरे खेती के लिए एक चुनौती भी थे।
  • प्रमुख शहर: समय के साथ, इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शहर विकसित हुए, जिनमें उर, लगश, किश, उरुक, और मारी प्रमुख थे।
  • प्रारंभिक शासक और कानून: इस सभ्यता के एक महान शासक हम्मुराबी थे, जिनका शासनकाल 2067-2025 ईसा पूर्व* के बीच था। समाज में उनका सबसे बड़ा योगदान हम्मुराबी की आचार संहिता थी, जिसमें 282 कानून शामिल थे और यह जीवन के लगभग हर पहलू को कवर करती थी।

स्रोत में उल्लिखित यह तिथि पारंपरिक ऐतिहासिक कालक्रम (लगभग 1792-1750 ईसा पूर्व) से भिन्न है। हम इस दस्तावेज़ के लिए दिए गए स्रोत का पालन कर रहे हैं।

इस उपजाऊ भौगोलिक आधार पर न केवल बस्तियाँ बसीं, बल्कि एक जटिल सामाजिक व्यवस्था का उदय हुआ, जिसने शहरी जीवन के एक नए युग का सूत्रपात किया।

2. शहरीकरण और आर्थिक जीवन

मेसोपोटामिया में शहरीकरण का उदय केवल जनसंख्या वृद्धि का परिणाम नहीं था, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक संगठन में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक था। शहर उत्पादन, व्यापार और प्रशासन के केंद्र बन गए, जहाँ विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे पर निर्भर रहते थे। इस नई शहरी व्यवस्था ने समाज को एक जटिल और गतिशील संरचना प्रदान की।

शहरी जीवन की प्रमुख विशेषताएँ

शहरों का विकास कई महत्वपूर्ण कारकों से प्रेरित था, जिनकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • सामाजिक संगठन: शहरों में श्रम विभाजन और कार्य विशेषज्ञता का विकास हुआ, जहाँ लोग अलग-अलग कार्यों में निपुणता प्राप्त करते थे।
  • प्रौद्योगिकी: कांस्य का उपयोग एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति थी, जिसके लिए धातु गलाने की तकनीक के उन्नत ज्ञान की आवश्यकता थी। इसने न केवल बेहतर उपकरण और हथियार प्रदान किए, बल्कि व्यापार मार्गों के महत्व को भी बढ़ा दिया क्योंकि तांबा और टिन जैसे आवश्यक घटक आयात करने पड़ते थे।
  • व्यापार और निर्भरता: शहरी आबादी केवल कृषि पर ही निर्भर नहीं थी, बल्कि व्यापार पर भी उसकी गहरी निर्भरता थी। कच्चे माल और अन्य वस्तुओं के आयात-निर्यात ने अर्थव्यवस्था को गति दी।
  • प्रशासन: मुहर का उपयोग एक प्रशासनिक उपकरण के रूप में किया जाता था। यह शहर के निवासियों की भूमिका को चिह्नित करने और व्यापारिक लेन-देन को प्रमाणित करने का एक महत्वपूर्ण साधन था।

व्यापार और माल की आवाजाही

मेसोपोटामिया की अर्थव्यवस्था में व्यापार की भूमिका केंद्रीय थी, जो संसाधनों के असंतुलन से प्रेरित थी।

  • संसाधन असंतुलन: इस क्षेत्र में खाद्य संसाधन तो प्रचुर मात्रा में थे, लेकिन खनिज और लकड़ी जैसे कच्चे माल का अभाव था। इस संसाधन असंतुलन ने न केवल एक व्यापक व्यापार नेटवर्क को जन्म दिया, बल्कि इसे प्रबंधित करने के लिए मुहरों जैसी प्रशासनिक तकनीकों और संगठित शहरी केंद्रों के विकास को भी अनिवार्य बना दिया।
  • आयात-निर्यात: इस कमी को पूरा करने के लिए, मेसोपोटामिया के लोग अपने वस्त्रों और कृषि उत्पादों के बदले में तुर्की, ईरान और खाड़ी देशों से लकड़ी, तांबा, टिन, चांदी, सोना, शंख और विभिन्न प्रकार के पत्थर जैसी वस्तुएँ आयात करते थे।
  • परिवहन मार्ग: माल के परिवहन के लिए नहरें और फरात नदी जैसे प्राकृतिक जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण थे। मारी शहर इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जो फरात नदी पर अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण व्यापार पर समृद्ध एक प्रमुख शहरी केंद्र बन गया।

इस बढ़ते व्यापार और जटिल लेन-देन के प्रबंधन के लिए हिसाब-किताब की एक स्थायी प्रणाली की आवश्यकता अनिवार्य हो गई, जिसने अंततः लेखन कला के आविष्कार को जन्म दिया।

3. लेखन कला का विकास: कीलाक्षर लिपि

जैसा कि हमने देखा, मेसोपोटामिया का आर्थिक जीवन जटिल व्यापार पर निर्भर था। इस बढ़ती व्यावसायिक जटिलता को प्रबंधित करने और लेन-देन का स्थायी रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता ने ही लेखन कला के आविष्कार को जन्म दिया, जो इस सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण बौद्धिक उपलब्धि साबित हुई। यह नवाचार केवल संचार का एक माध्यम नहीं था, बल्कि यह ज्ञान, संस्कृति और प्रशासन को संरक्षित करने तथा दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुँचाने का एक शक्तिशाली उपकरण बन गया।

लेखन प्रणाली का विकास और विशेषताएँ

मेसोपोटामिया की लेखन प्रणाली, जिसे कीलाक्षर (क्यूनिफॉर्म) के नाम से जाना जाता है, का विकास एक क्रमिक प्रक्रिया थी:

  • उत्पत्ति: लेखन का विकास लगभग 3200 ईसा पूर्व हुआ। शुरुआती पट्टिकाओं में चित्र जैसे संकेत और संख्याएँ पाई गईं, जिनका उपयोग वस्तुओं और मात्राओं को दर्शाने के लिए किया जाता था।
  • कारण: लेखन के विकास का प्राथमिक कारण शहरी जीवन में होने वाले लेन-देन का स्थायी रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता थी, क्योंकि व्यापार में कई लोग शामिल होते थे और यह अलग-अलग समय पर होता था।
  • माध्यम: मेसोपोटामिया के लोग लिखने के लिए मिट्टी की गीली पट्टिकाओं का उपयोग करते थे। वे सरकंडे की तीखी नोक से इन पर लिखते और फिर उन्हें धूप में सुखा लेते थे।

लेखन का उपयोग और महत्व

लेखन का उपयोग केवल हिसाब-किताब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संस्कृति और प्रशासन का एक अभिन्न अंग बन गया:

  • प्रशासन और व्यापार: एनमर्कर नामक शासक के बारे में एक सुमेरियन महाकाव्य शहरी जीवन, व्यापार और लेखन के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजत्व ही व्यापार और लेखन को संगठित करता था।
  • सांस्कृतिक श्रेष्ठता: लेखन को मेसोपोटामिया की शहरी संस्कृति की श्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता था। यह ज्ञान को संग्रहीत करने और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम था।
  • साहित्य: मेसोपोटामिया के लोगों की साहित्य में गहरी रुचि थी। उनका प्रसिद्ध महाकाव्य, गिलगमेश, इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो आज भी विश्व साहित्य की एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है।

लेखन और संगठित अभिलेखों के इस विकास ने समाज के विभिन्न समूहों के संगठन को और भी सुदृढ़ किया।

4. समाज, धर्म और शहरी जीवन

मेसोपोटामिया का समाज केवल शासकों और शासितों के बीच विभाजित नहीं था, बल्कि इसमें विभिन्न समूहों के बीच जटिल संबंध शामिल थे। किसान, चरवाहे, पुजारी और कारीगर, सभी शहरी जीवन के ताने-बाने का हिस्सा थे, जिसका केंद्र अक्सर मंदिर और शाही महल हुआ करते थे।

सामाजिक समूहों के बीच संबंध

किसानों और चरवाहों के बीच का संबंध सहयोग और संघर्ष दोनों पर आधारित था:

  • सहयोग: चरवाहे किसानों को दूध, मांस और अन्य पशु उत्पाद देते थे, जबकि किसान उन्हें बदले में अनाज उपलब्ध कराते थे। इसके अलावा, जानवरों से प्राप्त खाद किसानों के खेतों के लिए बहुत उपयोगी होती थी।
  • संघर्ष: कभी-कभी पानी जैसे सीमित संसाधनों पर नियंत्रण को लेकर दोनों समूहों के बीच संघर्ष भी होता था। संकट या अकाल के समय, चरवाहे कभी-कभी किसानों के अनाज के गोदामों पर हमला भी कर देते थे।

मंदिरों और राजा की भूमिका

मंदिर और राजत्व समाज के दो प्रमुख स्तंभ थे:

  • मंदिर: मंदिर केवल धार्मिक गतिविधियों के केंद्र नहीं थे, बल्कि वे महत्वपूर्ण आर्थिक इकाइयाँ भी थीं। ये मंदिर विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित थे और इनकी वास्तुकला समय के साथ विकसित हुई, जिसमें एक बड़े आंगन के चारों ओर कमरे बनाए जाते थे। मंदिरों में कताई, बुनाई और अनाज पीसने जैसी आर्थिक गतिविधियाँ भी होती थीं।
  • पूजा: मेसोपोटामिया के लोग कई देवताओं की पूजा करते थे, जिनमें चंद्रमा देवता, प्रेम और युद्ध की देवी इन्नाना, और स्टेपी के देवता डैगन प्रमुख थे। वे इन देवताओं को अनाज, दही और मछली अर्पित करते थे।

उर शहर में जीवन का एक उदाहरण

उर शहर की खुदाई से हमें वहाँ के नगर नियोजन और जीवन शैली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है:

  • सड़कें सँकरी और घुमावदार थीं (जो यह दर्शाती हैं कि नगर नियोजन की कोई केंद्रीय व्यवस्था नहीं थी)।
  • घरों का आकार अनियमित था (जिससे पता चलता है कि भूखंडों का मानकीकरण नहीं किया गया था)।
  • सार्वजनिक स्वच्छता का अभाव था (जो सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति सीमित जागरूकता की ओर इशारा करता है)।
  • वर्षा जल निकासी के लिए घरों की छतें अंदर की ओर ढलान वाली बनाई जाती थीं।

यह जटिल सामाजिक, धार्मिक और शहरी संरचना अपने पीछे एक स्थायी विरासत छोड़ गई, जिसका अध्ययन आज भी हमें प्रेरित करता है।

5. मेसोपोटामिया की स्थायी विरासत

मेसोपोटामिया की विरासत केवल खंडहरों और मिट्टी की पट्टिकाओं तक ही सीमित नहीं है। यह उन मूलभूत अवधारणाओं में आज भी जीवित है जिन्होंने बाद की सभ्यताओं और आधुनिक दुनिया को आकार दिया। विशेष रूप से गणित और समय की गणना के क्षेत्रों में उनका योगदान आज भी हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है।

प्रमुख विरासतें

विश्व के लिए मेसोपोटामिया के सबसे महत्वपूर्ण योगदानों को निम्नलिखित बिंदुओं में सारांशित किया जा सकता है:

  • गणित: उन्होंने एक विद्वतापूर्ण गणितीय परंपरा विकसित की। लगभग 1800 ईसा पूर्व की पट्टिकाओं से हमें गुणन और विभाजन सारणी, वर्ग और वर्गमूल सारणी, और यहाँ तक कि चक्रवृद्धि ब्याज की सारणी के भी प्रमाण मिलते हैं, जो उनकी उन्नत गणितीय समझ को दर्शाते हैं।
  • समय की गणना: समय को मापने की उनकी प्रणाली असाधारण रूप से प्रभावशाली और स्थायी साबित हुई:
    • उन्होंने पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की परिक्रमा के आधार पर वर्ष को 12 महीनों में विभाजित किया।
    • उन्होंने महीने को चार सप्ताहों में विभाजित किया।
    • उन्होंने दिन को 24 घंटों में विभाजित किया।
    • उन्होंने घंटे को 60 मिनट में विभाजित किया।

यह समय विभाजन प्रणाली आज भी दुनिया भर में सार्वभौमिक रूप से उपयोग की जाती है, जो इस प्राचीन सभ्यता की गहन और स्थायी बौद्धिक विरासत का सबसे स्पष्ट प्रमाण है, और यह हमें याद दिलाती है कि आधुनिक जीवन की कई धारणाओं की जड़ें हजारों साल पहले दजला और फरात की घाटी में थीं।

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