Chapter 7 – उपनिवेशवाद एवं साम्राज्यवाद Exercise Solution
प्रश्न 1. साम्राज्यवाद एवं उपनिवेशवाद का अर्थ व साम्राज्यवाद के प्रसार में कौन-कौन सी परिस्थितयाँ सहायक रही?
उत्तर :
किसी शक्तिशाली देश द्वारा दूसरे निर्बल और गरीब देशों को अपने अधीन लेकर उनसे आर्थिक लाभ उठाने की प्रवृति उपनिवेशवाद कहलाती है। इस प्रकार की नीति का अनुसरण यूरोप में सामान्यतः 1500 ई. से 1750 ई. के बीच किया गया। उन्नीसवीं शताब्दी में इसे साम्राज्यवाद नाम दिया गया।
साम्राज्यवाद के प्रसार में सहायक परिस्थितयाँ :-
- लाभ कमाने की लालसा।
- मातृदेश की शक्ति बढ़ाना।
- मातृदेश में सजा से बचना।
- स्थानीय लोगों का धर्म बदलवाकर उन्हें उपनिवेशिक धर्म में शामिल करना।
प्रश्न 2. भारत के सन्दर्भ में इंग्लैंड व फ्रांस के उपनिवेशिक विकास के बारे में लिखें।
उत्तर:
- इंग्लैंड व फ्रांस में औद्योगिक क्रांति आने से निर्मित माल बहुत तेजी से तैयार होने लगा जिससे कच्चे माल की जरूरत महसूस हुई।
- इस जरूरत को पूरा करने के लिए उपनिवेशों के ऊपर ध्यान दिया गया।
- इन राष्ट्रों के पास भारत जैसा उपनिवेश बनाने के बाद बहुत सारा धन इकट्ठा होने लगा और यह राष्ट्र अमीर होते चले गए जबकि भारत को गरीब बना दिया।
- इन राष्ट्रों ने अपने विकास के साथ भारत मे भी विकास किया। लेकिन सिर्फ अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए।
- इंग्लैंड व फ्रांस के पूंजीपति वर्ग को अधिक पैसा कमाने का अवसर भी मिला।
प्रश्न 3. अफ्रीका में साम्राज्यवाद के विकास में किन-किन देशों ने भाग लिया, इनके बारे में लिखे?
उत्तर: अफ्रीका में साम्राज्यवाद के विकास में बेल्जियम, पुर्तगाल, इंग्लैंड, फ्रांस तथा जर्मनी ने भाग लिया।
प्रश्न 4. साम्राज्यवाद में यूरोप, एशिया, अफ्रीका के देशों पर सकारात्मक व विनाशकारी प्रभावों का उल्लेख करें।
उत्तर: साम्राज्यवाद में यूरोप एशिया अफ्रीका के देशों पर सकारात्मक और विनाशकारी प्रभाव देखने को मिले जिनका वर्णन निम्नलिखित हैं :-
(i) सकारात्मक प्रभाव:
- साम्राज्यवादी देशों ने अपने अधीन उपनिवेशों में पश्चिमी शिक्षा लागू की जिससे इन देशों के लोगों को दूसरे देशों की राजनैतिक प्रणालियों के अध्ययन का अवसर मिला।
- साम्राज्यवादी देशों के पूँजीपतियों ने अधिक लाभ कमाने के लिए उपनिवेशों में नए उद्योग स्थापित किए जिससे इन लोगों को रोजगार प्राप्त करने के नए अवसर प्राप्त हुए।
- साम्राज्यवादी देशों ने अपने-अपने उपनिवेशों में व्यापार बढ़ाने हेतु अधिक-से-अधिक सड़कें बनवाई तथा रेल की पटरियाँ बिछवाई जिससे इन उपनिवेशों में यातायात के साधनों का बहुत विकास हुआ।
- यूरोपियन देशों में औद्योगिक क्रांति आने से अत्यधिक लाभ कमाना आरंभ कर दिया।
(ii) विनाशकारी प्रभाव –
- साम्राज्यवादी देशों ने उद्योगों के लिए सस्ते दामों में कच्चा माल खरीदना आरंभ कर दिया और अपने देशों में निर्मित माल अधिक दामों पर बेचना आरंभ कर दिया
- उन्होंने उपनिवेशों के निजी उद्योगों में बने हुए माल को बेचने के लिए अनेक प्रतिबंध लगा दिए जिससे उपनिवेशों के उद्योग नष्ट हो गए।
- साम्राज्यवादी देशों ने अपने उपनिवेशों के किसानों का अधिक से अधिक शोषण किया जिससे उपनिवेशों के किसान भी निर्धन हो गए।
- उपनिवेशों के लोगों को उच्च पदों पर भी नहीं रखा जाता था।
- साम्राज्यवादी देशों के ईसाई प्रचारकों ने उपनिवेश के लोगों को बलपूर्वक ईसाई बनाना आरंभ कर दिया।
प्रश्न 1. साम्राज्यवाद व उपनिवेशवाद में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर : साम्राज्यवाद एक व्यापक अवधारणा है जिसमें एक देश दूसरे देश पर भौतिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व स्थापित करता है, जबकि उपनिवेशवाद इसका एक विशिष्ट रूप है जिसमें एक देश दूसरे क्षेत्र में उपनिवेश स्थापित कर वहां के संसाधनों का दोहन करता है और उस पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। उपनिवेशवाद में अक्सर बड़े पैमाने पर लोगों का प्रवास और स्थानीय लोगों के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बदलाव शामिल होता है, जबकि साम्राज्यवाद में जरूरी नहीं कि ऐसा हो।
प्रश्न 2. साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने शोषण के कौन-कौन से तरीके अपनाये?
उत्तर :
साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने शोषण के निम्नलिखित तरीके अपनाएं :-
- साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने अपने उपनिवेशों से कच्चा माल सस्ती कीमतों पर प्राप्त किया।
- साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने अपने उपनिवेशों से धन अपने देश पहुंचा दिया जिससे वह उपनिवेश गरीब हो गया।
- साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने अपने उपनिवेशों में अपने देश का निर्मित माल सस्ती कीमतों पर बेचकर उपनिवेशों के लघु उद्योग बंद करवा दिए।
- साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने अपने उपनिवेशों में ईसाई धर्म का बहुत प्रचार किया जिससे वहां की संस्कृति बर्बाद हो गई।
- साम्राज्यवादी राष्ट्रों ने अपने उपनिवेशों में किसानों से अपनी जरूरतों की खेती करवाई।
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