HBSE/NCERT Class 12 History इतिहास बंधुत्व, जाति तथा वर्ग Exercise Solution

 बंधुत्व, जाति तथा वर्ग 

Exercise Solution

प्रश्न 1. जाति प्रथा की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर-
  • जाति प्रथा जन्म पर आधारित होती थी।
  • प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ही जाति में विवाह करना होता था।
  • जातियों की संख्या निश्चित नहीं थी।
  • सभी को जाति के नियमों का पालन करना पड़ता था।

प्रश्न 2. भारत में परिवार व्यवस्था की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर- 
      भारत में परिवार व्यवस्था की विशेषताएँ निम्नलिखित है-
  • भारत में संयुक्त परिवार व्यवस्था प्रचलित थी।
  • परिवार का सर्वाधिक बुजुर्ग व्यक्ति घर का मुखिया होता है।
  • परिवार के सभी सदस्यों के उत्तरदायित्व निर्धारित होते हैं।
  • परिवार मुख्यतः पुरुष प्रधान होते है।
प्रश्न 3. परिवार से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर - 
  • परिवार सामाजिक संगठन की मूल इकाई है। संस्कृत ग्रन्थों में परिवार के लिए 'कुल' शब्द का प्रयोग किया गया है। परिवार के द्वारा ही सामाजिक संबंधों का निर्माण होता है। लॉक के अनुसार "परिवार व्यक्तियों के उस समूह का नाम है जिसमें वे विवाह, रक्त या दत्तक संबंध से जुड़कर एक गृहस्थी का निर्माण करते हैं।"
प्रश्न 4. स्त्रीधन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर- 
  • कन्या को विवाह के समय जो उपहार प्राप्त होते है, उसे स्त्रीधन कहा जाता है। इस पर स्त्री का पूर्ण रूप से अधिकार होता था। इस धन पर स्त्री के पति का कोई अधिकार नहीं होता था।
प्रश्न 5. जाति प्रथा के कोई तीन दोष या बुराई बताइए।

उत्तर-
  • (i) जाति प्रथा समाज को कई हिस्सों में विभाजित कर देती है।
  • (ii) इससे देश की राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता को हानि पहुँचती है।
  • (iii) इससे छुआछूत की प्रथा का प्रसार होता है।

प्रश्न 6. भारत में विवाह संस्था के तीन उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- 
         भारत में विवाह संस्था के दो उद्देश्यों का वर्णन इस प्रकार है।
  • (i) इसका मुख्य उद्देश्य वंश परंपरा को आगे बढ़ाना था।
  • (ii) रक्त की शुद्धता बनाए रखना।
  • (iii) सृष्टि के नियम को बनाए रखना जिससे संसार नियमित हो।
  • (iv) आर्थिक हितों की पूर्ति में भागीदारी सुनिश्चित करना।
प्रश्न 7. महाभारत के दूसरे चरण में घरों के बारे में बी बी लाल ने क्या उल्लेखित किया?
उत्तर- 
  • बी बी लाल ने दूसरे चरण में मकानों का वर्णन दिया है। उन्होंने कहा कि कि खुदाई किए गए सीमित क्षेत्र के भीतर, घरों की कोई निश्चित योजना प्राप्त नहीं हुई थी, लेकिन मिट्टी की बनी दीवारें और कच्ची मिट्टी की ईंटें प्राप्त हुई हैं। मिट्टी के पलस्तर की खोज सरकंडे की छाप के निशान के साथ यह इशारा करती है कि कुछ घरों कि दीवारें सरकंडों की बनी थी जिन दीवारो पर मिट्टी का पलस्तर चढ़ा दिया जाता था।
प्रश्न  8. सामाजिक अनुबंध का बौद्ध सिद्धांत पुरुष सूक्त से व्युत्पन्न समाज का ब्राह्मणवादी दृष्टिकोण से किस प्रकार भिन्न था?
उत्तर- 
  • (1) पुरुष सूक्त कहता है कि एक विशाल पुरुष के विभिन्न अंगों से चार वर्णों का उदय हुआ।
  • (II) ये वर्ण ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र थे।
  • (III) ब्राह्मणों को समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था।
  • (IV) क्षत्रिय प्रशासन चलाते थे।
  • (IV) वैश्य व्यापार में संलग्न थे। शूद्र उपरोक्त तीन वर्णों की सेवा करने के लिए नियत थे।
  • (V) केवल जन्म ही समाज में हैसियत और सम्मान का आधार था।

प्रश्न 9. ब्राह्मणवादी ग्रन्थों में उल्लेखित वर्ण पद्धति और व्यवसाय के बीच संबंध को समझाइए ? ब्राह्मणों ने इन्हें कैसे सुदृढ़ किया?
उत्तरः 
     ब्राह्मणवादी ग्रंथों के अनुसार वर्ण व्यवस्था और व्यवसाय के बीच संबंधः
  • (i) ब्राह्मण- वेदों का अध्ययन, उपदेश देना तथा यज्ञ करना।
  • (ii) क्षत्रिय - युद्ध में संलग्न होकर लोगों की रक्षा तथा न्याय का प्रशासन की स्थापना ।
  • (iii) वैश्य-कृषि और व्यापार में संलग्न ।
  • (iv) शूद्रों को एक ही व्यवसाय सौंपा वह था, तीन उच्च वर्णों की सेवा करना।
   ब्राह्मणों ने निम्नलिखित तर्कों के द्वारा इस व्यवस्था को लागू करने का प्रयास किया :
  • (i) दिव्य उत्पत्ति।
  • (ii) राजाओं को आदेश लागू करने की सलाह देना।
  • (iii) जन्म के आधार पर जाति निर्धारित होना ।
प्रश्न 10 महिलाओं को उनका गोत्र कैसे प्राप्त होता था ?
उत्तर : 
  • 1. लोगों को वर्गीकृत करने के लिए एक ब्राह्मणवादी प्रथा गोत्रों के संदर्भ में थी।
  • 2. प्रत्येक गोत्र का नाम एक वैदिक द्रष्टा के नाम पर रखा गया था, और जो एक ही गोत्र से संबंधित थे उन सभी को उनके वंशजों के रूप में माना जाता था ।
  • 3. गोत्र के बारे में दो नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण थेः महिलाओं से अपने पिता के गोत्र को विवाह उपरांत छोड़ने की उम्मीद की जाती थी और समान गोत्र के सदस्य आपस में विवाह नहीं कर सकते थे।
  • 4. सातवाहन शासकों के गोतम और वशिष्ठ जैसे गोत्रों से व्युत्पन्न नाम थे
  • 5. उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने पति के गोत्र से व्युत्पन्न नामों को अपनाने के बजाय इन नामों को बनाए रखा
प्रश्न 11. क्या आरभिक राज्यों में शासक निश्चित रूप से क्षत्रिय ही होते थे? चर्चा कीजिए।
                                                      अथवा
"राजत्व क्षत्रिय कुल में जन्म लेने पर शायद ही निर्भर करता था बल्कि यह हर उस व्यक्ति के लिए होता था जो समर्थन और संसाधन जुटा सके।" इस कथन की व्याख्या उदाहरणों सहित कीजिए।
उत्तर- 
  • धर्म शास्त्रों के अनुसार क्षत्रिय वर्ण के लोग ही शासक हो सकते थे। आरंभिक राज्यों में शासक अधिकतर क्षत्रिय ही होते थे। परन्तु यह व्यवस्था पूर्णतया स्थायी नहीं थी। हमारे पास क्षत्रिय शासकों के अतिरिक्त अन्य वर्ण के शासक होने के प्रमाण भी विद्यमान हैं। जैसे कुछ ग्रंथों में मौर्य शासकों को क्षत्रिय सिद्ध करने का प्रयत्न किया गया है तो ब्राह्मणीय ग्रंथों में मौर्य शासकों को 'निम्न' कुल का बताया है। इसी तरह सातवाहन और शुंग वंश के शासक ब्राह्मण जाति से संबंध रखते थे। अतः स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता के बल पर शासक बन सकता था।
प्रश्न 12. स्पष्ट कीजिए कि विशिष्ट परिवारों में पितृवशिकता क्यों महत्त्वपूर्ण रही होगी?
उत्तर- 
पितृवंशीय प्रणाली एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें परिवार की वंशावली पिता से पुत्र, फिर पोते और इसी तरह आगे बढ़ती रहती है। इस प्रणाली के प्रमाण महाभारत काल से ही मिलते हैं। इसके महत्व के मुख्य कारण निम्नलिखित थे: 
  • वंश की निरंतरता: उस समाज में, पारिवारिक परंपरा और वंश को आगे बढ़ाने के लिए बेटों को महत्व दिया जाता था।
  • महिलाओं की स्थिति: समाज में महिलाओं को निम्न दर्जा प्राप्त था और उन्हें सत्ता या संपत्ति के योग्य नहीं समझा जाता था।
  • विवादों से बचाव: उत्तराधिकार से संबंधित विवादों से बचने के लिए पितृसत्तात्मक व्यवस्था का आदर्श अपनाया गया था। शाही परिवारों में, इसमें सिंहासन भी शामिल था।
प्रश्न 13. मनुस्मृति में चांडालों के लिए दिए गए कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- मनुस्मृति के अनुसार चांडालों के निम्नलिखित कर्तव्य थेः
  • (i) गाँव के बाहर रहना।
  • (ii) फेंके हुए बेकार बर्तनों का इस्तेमाल करना।
  • (iii) मरे हुए लोगों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनना।
  • (iv) रात्रि में गाँव या शहरों में नहीं घूमना।
  • (v) लावारिस शवों की अंत्येष्टि करना, तथा
  • (vi) वधिक के रूप में कार्य करना।
प्रश्न 14. आरम्भिक समाज में स्त्री-पुरुष के बीच विषमताएँ कितनी महत्त्वपूर्ण रही होगी? (HBSE 2025)
उत्तर- 
आरम्भिक समाज में स्त्री-पुरुष के बीच निम्नलिखित स्तरों पर विषमताएँ विद्यमान थीं:
  •  राजनीतिक: राजपद के लिए केवल पुत्र को ही उत्तराधिकारी घोषित किया जाता था।
  • आर्थिक: संपत्ति के स्वामित्व के मुद्दे पर स्त्री के पास नाममात्र अधिकार थे। मनुस्मृति के अनुसार पैतृक जायदाद का बँटवारा केवल पुत्रों में समान रूप से किया जाना चाहिए; स्त्रियाँ इसमें हिस्सेदारी की माँग नहीं कर सकती थीं.
  • सामाजिक: महाभारत के एक प्रकरण से पता चलता है कि स्त्री को एक वस्तु की तरह दाँव पर लगाया जा सकता था. समाज में वंश परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए पुत्र प्राप्ति की कामना की जाती थी.
अनुच्छेदों पर आधारित प्रश्न

  • स्त्री और पुरुष किस प्रकार संपत्ति अर्जित कर सकते थे?
पुरुषों के लिए मनुस्मृति कहती है कि धन अर्जित करने के सात तरीके हैं- विरासत, खोज, खरीद, विजित करके, निवेश, कार्य द्वारा तथा सज्जनों द्वारा दी गई भेंट को स्वीकार करके । स्त्रियों के लिए संपत्ति अर्जन के छः तरीके हैं-वैवाहिक अग्नि के सामने तथा वधूगमन के समय मिली भेंट। स्नेह के प्रतीक के रूप में भ्राता, माता और पिता द्वारा दिए गए उपहार। इसके अतिरिक्त परवर्ती काल में मिली भेंट तथा वह सब कुछ जो 'अनुरागी' पति से उसे प्राप्त हो।
  • 1. मनुस्मृति के अनुसार, पुरुष किस प्रकार धन अर्जित कर सकते थे? व्याख्या कीजिए।
  • 2. महिलाओं द्वारा किस प्रकार धन अर्जित किया जा सकता था? स्पष्ट कीजिए।
  • 3. क्या आप धन अर्जित करने के तरीकों में विभाजन से सहमत हैं या नहीं? कोई दो कारण बताइए।
2. माता की सलाह

महाभारत में उल्लेख मिलता है कि जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध अवश्यभावी हो गया तो गांधारी ने अपने ज्येष्ठ पुत्र दुर्योधन से युद्ध न करने की विनती की : शांति की संधि करके तुम अपने पिता, मेरा तथा अपने शुभेच्छुकों का सम्मान करोगे..... विवेकी पुरुष जो अपनी इंद्रियों पर नियत्रंण रखता है वही अपने राज्य की रखवाली करता है। लालच और क्रोध आदमी को लाभ से दूर खदेड़कर ले जाते हैं, इन दोनों शत्रुओं को पराजित कर राजा समस्त पृथ्वी को जीत सकता है.....हे पुत्र विवेकी और वीर पांडवों के साथ सानंद इस पृथ्वी का भोग करोगे... युद्ध में कुछ भी शुभ नहीं होता, ना धर्म और अर्थ की प्राप्ति होती है और न ही प्रसन्नता की युद्ध के अंत में सफलता मिले यह भी जरूरी नहीं........अपने मन को युद्ध में लिप्त मत करो...... दुर्योधन ने माँ की सलाह नहीं मानी, वह युद्ध में लड़ा और हार गया।
  • 1. गांधारी ने दुर्योधन से क्या विनती की, संक्षेप में बतलाइये।
  • 2. क्या आप गांधारी द्वारा दुर्योधन को दी गई सलाह से सहमत हैं? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए दो तर्क दीजिए। 
  • 3. दुर्योधन ने अपनी माता की सलाह क्यों नहीं मानी? इससे आपको महाभारत काल में स्त्रियों की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

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