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HARYANA BOARD OF SCHOOL EDUCATION, BHIWANI
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इतिहास - 12
रोल नं. -------------------------- समय : 3:00 घंटे
पूर्णांक : 80
निर्देश :
इस प्रश्न-पत्र में कुल 36 प्रश्न हैं, जो कि पाँच खण्डों 'क', 'ख', 'ग', 'घ' तथा 'ङ' में विभक्त हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य है।
खण्ड 'क' में प्रश्न संख्या 1 से 21 तक वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का हैं। निर्देशानुसार इन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
खण्ड 'ख' में प्रश्न संख्या 22 से 29 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का हैं। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 60-80 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।
खण्ड 'ग' में प्रश्न संख्या 30 से 32 तक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, प्रत्येक प्रश्न 8 अंक का है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 300-350 शब्दों से अधिक नहीं होना चाहिए।
खण्ड 'घ' में प्रश्न 33 से 35 तक चार उप प्रश्नों के साथ स्रोत आधारित प्रश्न है और प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का हैं।
खण्ड 'ङ' में प्रश्न संख्या 36 मानचित्र आधारित है, जिसमें 5 अंक हैं। मानचित्र को उत्तर-पुस्तिका के साथ संलग्न करें।
खण्ड क
1. वर्तमान में राखीगढ़ी किस राज्य में स्थित है?
(क) राजस्थान
(ख) हरियाणा
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) गुजरात
उत्तर (ख) हरियाणा
2. अर्थशास्त्र का लेखक कौन है?
(क) चंद्रगुप्त मौर्य
(ख) कौटिल्य
(ग) कल्हण
(घ) बाणभट्ट
उत्तर (ख) कौटिल्य
3. प्रसिद्ध पुस्तक किताब-उल-हिंद के लेखक कौन है?
(क) अलबरूनी
(ख) इब्नबतूता
(ग) बर्नियर
(घ) कौटिल्य
उत्तर (क) अलबरूनी
4. सांची का स्तूप वर्तमान में कहाँ स्थित है?
(क) उत्तर प्रदेश
(ख) राजस्थान
(ग) मध्य प्रदेश
(घ) छत्तीसगढ़
उत्तर (ग) मध्य प्रदेश
5. हंपीनगर किस नदी के किनारे बसा हुआ है?
(क) कावेरी
(ख) तुंगभद्रा
(ग) कृष्णा
(घ) सतलुज
उत्तर (ख) तुंगभद्रा
6. पांचवी रिपोर्ट ब्रिटिश संसद में कब पेश की गई?
(क) 1816 ई.
(ख) 1815 ई.
(ग) 1813 ई.
(घ) 1826 ई.
उत्तर (ग) 1813 ई.
7. सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम किस गवर्नर जनरल के शासनकाल में पारित किया गया?
(क) लॉर्ड डलहौजी
(ख) लॉर्ड वेलिंगटन
(ग) लॉर्ड कैनिंग
(घ) लॉर्ड लिनलिथगो
उत्तर (ग) लॉर्ड कैनिंग
8. महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु कौन थे?
(क) स्वामी विवेकानंद
(ख) रविंद्र नाथ टैगोर
(ग) विनोबा भावे
(घ) गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर (घ) गोपाल कृष्ण गोखले
निर्देशः निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या वाक्य में दीजिए-
9. प्रभावती गुप्त कौन थी?
उत्तर: गुप्तशासक चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री।
10. अंर्तविवाह से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: इसके अंतर्गत विवाह संबंध किसी समूह के अंदर ही होते हैं।
11. इब्नबतूता किस सुल्तान के शासनकाल में भारत आया?
उत्तर: मुहम्मद बिन तुगलक।
12. कॉलिंग मैकेंजी कौन था?
उत्तर: एक बिटिश अभियंता एवं पुरातत्त्वविद् तथा भारत का प्रथम सर्वेयर जनरल।
13. लाहौर अधिवेशन कब हुआ था?
उत्तर: 31 दिसम्बर, 1929 ई. को।
निर्देशः रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित शब्दों द्वारा कीजिए-
14. सम्राट अशोक द्वारा धम्म प्रचार के लिए नियुक्त अधिकारी कहलाता था।
उत्तर: धम्ममहामत् अथवा धम्ममहामात्र।
15. दक्षिण भारत में विष्णु की उपासना करने वालों को कहा जाता था।
उत्तर: अलवार।
16. स्थायी बंदोबस्त प्रथा 1793 ई. में लागू की।
उत्तर: लॉर्ड कार्नवालिस ने।
17. मंगल पांडे को फांसी में दी गई।
उत्तर: 8 अप्रैल, 1857 ई.।
18. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना
निर्देशः नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) द्वारा अंकित किया गया है। इन दोनों कथनों को ध्यान से पढ़िए और नीचे दिए गए विकल्पों (a), (b), (c) एवं (d) में से उत्तर के रूप में सही विकल्प चुनिए।
19. अभिकथन (A): मनुस्मृति भारत का सबसे प्रसिद्ध विधिग्रन्थ है।
कारण (R) : इस ग्रन्थ में राजा को सीमा विवाद से बचने की सलाह दी गई हैं।
(a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
(d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
उत्तर: (b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
20. अभिकथन (A): 1797 ई. बर्दवान में एक नीलामी की गई। बर्दवान के राजा द्वारा धारित अनेक महाल (भूसंपदाएँ) बेचे जा रहे थे।
कारण (R) : बर्दवान के राजा पर राजस्व की बड़ी भारी रकम बकाया थी, इसलिए उसकी संपदाएँ नीलाम की जाने वाली थीं।
(a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
(d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
उत्तर: (a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
21. अभिकथन (A) असहयोग आंदोलन के दौरान गाँधी जी को मार्च, 1922 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
कारण (R) : उन पर जाँच की कार्यवाही की अध्यक्षता करने वाले जज जस्टिस सी. एन. ब्रुमफील्ड ने उन्हें सजा सुनाई।
(a) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) सही नहीं है।
(d) कारण (R) सही है परन्तु अभिकथन (A) सही नहीं है।
उत्तर: (b) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
खण्ड ख (लघु-उत्तरीय प्रश्न)
22. हड़प्पाकालीन जीवन-निर्वाह के मुख्य तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पाकालीन जीवन निर्वाह के मुख्य तरीकों का वर्णन इस प्रकार है-
- (i) कृषि-हड़प्पा सभ्यता के निवासी कई प्रकार के पड़े-पौधों से प्राप्त उत्पाद और जानवरों जिनमें मछली भी शामिल है, से अपना भोजन प्राप्त करते थे। जले अनाज के दानों और बीजों से पुरातत्वविद आहार संबंधी आदतों के विषय में जानकारी प्राप्त करने में सफल हो पाए हैं। इनका अध्ययन पुरा-वनस्पतिज्ञ करते हैं जो प्राचीन वनस्पति के अध्ययन के विशेषज्ञ होते हैं। हड़प्पा स्थलों से मिले अनाज के दानों में गेहूँ, जौ, दाल, सफेद चना तथा तिल शामिल हैं। बाजरे के दाने गुजरात के स्थलों से प्राप्त हुए थे। चावल के दाने अपेक्षाकृत कम पाए गए हैं।
- (ii) पशुपालन-हड़प्पा स्थलों से मिली जानवरों की हड्डियों में मवेशियों, भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर की हड्डियाँ शामिल है। पुरातत्वविदों द्वारा किए गए अध्ययनों से संकेत मिलता है कि ये सभी जानवर पालतू थे।
- (iii) शिकार करना-जंगली प्रजातियों जैसे वराह (सुअर), हिरण तथा घड़ियाल की हड्डियाँ भी मिली हैं। हम यह नहीं जान पाए हैं कि हड़प्पा-निवासी स्वयं इन जानवरों का शिकार करते थे अथवा अन्य आखेटक-समुदायों गो उनका मांस प्राप्त करते थे। मछली तथा पक्षियों की हड्डियाँ भी मिली है।
अथवा
हड़प्पाकालीन कृषि प्रौद्योगिकी का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता (सिन्धु घाटी सभ्यता) की कृषि प्रौद्योगिकी अत्यंत विकसित थी। निम्नलिखित बिंदुओं में इसका वर्णन किया
- 1. सिंचाई प्रणाली
- हड़प्पावासी सिंचाई के लिए नहरों और कुओं का उपयोग करते थे।
- कुछ स्थलों पर कृत्रिम जलाशयों के प्रमाण भी मिले हैं।
- 2. कृषि उपकरण
- लकड़ी के हल (plough) का प्रयोग किया जाता था।
- मिट्टी के फावड़े. दरांती, और अन्य औजार भी मिलते हैं।
- 3. फसलें
- मुख्य फसलें: गेहूं, जौ, मटर, तिल, कपास, सरसों आदि।
- कपास की खेती सबसे पहले हड़प्पा सभ्यता में ही शुरू हुई थी।
- 4. दोहरी फसल प्रणाली
- हड़प्पा के लोग साल में दो बार फसल उगाते थे (रबी और खरीफ)।
- 5. भंडारण
- अनाज भंडारण के लिए बड़े-बड़े कोठार (granaries) बनाए जाते थे।
- 6. पशुपालन
- कृषि के साथ-साथ पशुपालन भी किया जाता था। गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि पाले जाते थे।
- 7. भूमि की जुताई
- हल से भूमि की जुताई की जाती थी. जिससे मिट्टी उपजाऊ बनी रहती थी।
निष्कर्षः
हड़प्पा सभ्यता की कृषि प्रौद्योगिकी अपने समय के लिए अत्यंत उन्नत थी. जिसमें सिंचाई, औजार, फसल विविधता और भंडारण की आधुनिक तकनीकें शामिल थीं।
23. अशोक के अभिलेखों के ऐतिहासिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
अशोक ने अपने शासन काल में अनेक अभिलेख खुदवाए थे। इसके अभिलेखों का भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान है। अशोक के अभिलेखों के ऐतिहासिक महत्त्व का वर्णन इस प्रकार है-
- (i) ये अभिलेख मौर्य साम्राज्य की जानकारी के महत्त्वपूर्ण स्त्रोत है।
- (ii) इन अभिलेखों से हमें मौर्य साम्राज्य के विस्तार का पता चलता है।
- (iii) इन अभिलेखों से हमें अशोक द्वारा किए गए प्रजाहित कार्यों की जानकारी प्राप्त होती है।
- (iv) ये अभिलेख मौर्य कला के उत्तम उदाहरण है।
- (v) इन अभिलेखों से हमें अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए किए गए प्रयासों का पता चलता है।
24. महायान और हीनयान में तीन अंतर बताइए?
उत्तर:
- (i) महायान सम्प्रदाय के ग्रन्थ संस्कृत भाषा में है जबकि हीनयान सम्प्रदाय के ग्रन्थ पालि भाषा में है।
- (ii) महायान सम्प्रदाय में मूर्ति पूजा आरम्भ हो गई जबकि हीनयान सम्प्रदाय में गौतम बुद्ध को आदर्श और पवित्रता का प्रतीक पुरुष माना गया।
- (iii) महायान बौद्ध धर्म का नूतन सम्प्रदाय है जबकि हीनयान बौद्ध धर्म का प्राचीन सम्प्रदाय है।
25. बर्नियर कौन था? उसकी पुस्तक का क्या नाम था ?
उत्तर:
- बर्नियर एक प्रसिद्ध फ्रांसीसी यात्री थे जो 17वीं शताब्दी में भारत आए थे।
- वह मुगल शासक शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान 1656 ईस्वी में आए और 1668 ईस्वी तक रहे।
- वह एक प्रसिद्ध चिकित्सक, राजनीतिज्ञ, दार्शनिक और इतिहासकार थे।
- उनकी पुस्तक का शीर्षक 'ट्रैवल्स इन द मुगल एम्पायर' है।
26. सूफ़ी शब्द से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
- इस्लाम धर्म में कुछ आध्यात्मिक लोगों का रहस्यवाद और वैराग्य की तरफ झुकाव बढ़ा, इन्हें सूफी कहा जाने लगा। कुछ विद्वानों का मानना है कि सूफी शब्द 'सूफ' शब्द से बना है जिसका अर्थ है 'ऊन' अर्थात् वे लोग जो खुरदरे ऊनी वस्त्र पहनते हो। अन्य विद्वान इस शब्द की उत्पत्ति 'सफा' से मानते हैं। जिसका अर्थ है साफ। इसके अर्थ और उत्पत्ति के विषय में विद्वान एकमत नहीं है।
अथवा
चिश्ती उपासना की तीन विधियों का वर्णन करे।
उत्तर:
चिश्ती उपासना की तीन विधियाँ हैं:
- सूफी संतों की दरगाह की धार्मिक यात्रा (ज़ियारत),
- सामुदायिक रसोई (लंगर) में भोजन करना, और
- आध्यात्मिक संगीत समारोह (समा) में भाग लेना, जिसे कव्वाली कहा जाता है।
27. महानवमी डिब्या क्या था? यह किसलिए महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर:
महानवमी डिब्बा विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल हम्पी (कर्नाटक) में स्थित एक महत्वपूर्ण स्मारक है।
- विवरण
- महानवमी डिब्बा एक विशाल मंच (platform) है, जिसे पत्थरों से बनाया गया है।
- इसका निर्माण विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय ने करवाया था।
- यह मंच मुख्य रूप से दरबार, उत्सव और धार्मिक समारोहों के लिए प्रयोग होता था।
- यहाँ पर विजयदशमी (दशहरा) के अवसर पर विशेष समारोह आयोजित किए जाते थे।
- मंच की ऊँचाई लगभग 12 मीटर है और इसके चारों ओर सुंदर नक्काशी की गई है।
- ऐतिहासिक महत्व
- महानवमी डिब्बा विजयनगर साम्राज्य की भव्यता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
- यह स्थल विजयनगर के राजाओं द्वारा आयोजित सार्वजनिक समारोहों और उत्सवों का केंद्र था।
निष्कर्ष
महानवमी डिब्बा हम्पी का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है. जो विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है।
28. मंगल पांडे कौन था?
उत्तर:
- मंगल पांडे बंगाल में बैरकपुर छावनी का एक सैनिक था।
- जब एक अंग्रेज अधिकारी ने उसे चर्बी वाले कारतूस प्रयोग करने के लिए मजबूर किया तो उसने अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर दी।
- इस हत्या के लिए उसे 8 अप्रैल 1857 ई० को फांसी दे दी गई। वह भारत का प्रथम शहीद माना जाता है।
29. चम्पारण सत्याग्रह पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
गांधी जी ने 1917 ई. में बिहार के चम्पारण जिले में नील की खेती करने वाले किसानों पर बागान के यूरोपीय मालिकों द्वारा अत्याचार के विरुद्ध सत्याग्रह किया. दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आने के बाद गांधी जी का यह पहला सत्याग्रह था।
- इस सत्याग्रह से सरकार परेशान हो गई और मजबूर होकर एक जांच आयोग नियुक्त किया, जिसमें गांधी जी को भी सदस्य बनाया गया।
- आयोग ने किसानों की समस्याओं की जांच की, कानून बनाकर सभी गलत प्रथाओं (जैसे तिनकठिया प्रणाली) को समाप्त कर दिया, और किसानों को भूमि का स्वामी स्वीकार किया गया।
- यह आंदोलन भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन था और गांधी जी की एक बड़ी उपलब्धि थी।
अथवा
अहमदाबाद मिल हड़ताल पर एक संक्षिप्त नोट लिखिए।
उत्तर:
- 1918 ई. में अहमदाबाद की एक सूती कपड़ा मिल के मजदूरों ने बोनस को लेकर एक हड़ताल का आयोजन किया। महात्मा गाँधी जी द्वारा इस हड़ताल का नेतृत्व किया गया। गाँधी जी ने खुद भी इस हड़ताल में पहली बार अनशन रखा। मजबूर होकर मिल मालिक मजदूरों से समझौता करने के लिए तैयार हो गए तथा मजदूरों को 35 प्रतिशत भत्ता देने की घोषणा कर दी जिससे हड़ताल समाप्त हो गई। चम्पारण के बाद यह गांधी जी का भारत में दूसरा सफल सत्याग्रह था।
खण्ड ग (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
30. हडप्पाई समाज में शासकों द्वारा किए जाने वाले सम्भावित कार्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर:
हड़प्पा सभ्यता में शासकों के अस्तित्व को लेकर विद्वान एकमत नहीं हैं। कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि इस सभ्यता में शासक नहीं थे, जबकि अन्य प्रमाणों के आधार पर माना जाता है कि शासकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही होगी. शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्य निम्नलिखित हैं:
- पुरावस्तुओं में एकरूपता स्थापित करना:
- हड़प्पा सभ्यता में मुहरों, बाटों और ईंटों में पाई जाने वाली असाधारण एकरूपता को स्थापित करना जनसामान्य के बस की बात नहीं थी। इन जटिल कार्यों को शासक द्वारा कानून के माध्यम से सम्पन्न किया जाता होगा।
- नगर योजना बनाना:
- शासकों का एक अति महत्वपूर्ण कार्य नगर योजना बनाना रहा होगा, जिसमें सुनियोजित नगर, उत्तम जल निकासी व्यवस्था, ग्रिड पद्धति पर सड़कें, और अन्नागार जैसी संरचनाएं शामिल थीं.
- शिल्प-उत्पादन के लिए कच्चे माल का प्रबंधन:
- अनेक शिल्प-उत्पादन कार्यों के लिए आवश्यक कच्चे माल को उपलब्ध करवाना शासन तंत्र की ही जिम्मेवारी रही होगी।
- कच्चे माल की प्राप्ति के लिए बस्तियाँ स्थापित करना:
- अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप से गति प्रदान करने के लिए, शासकों ने कच्चे माल की प्राप्ति के लिए नागेश्वर और बालाकोट जैसे स्थानों पर बस्तियाँ स्थापित की होंगी।
- अभियान भेजना एवं सुदूर क्षेत्रों में संबंध स्थापित करना:
- व्यापारिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए, शासकों द्वारा समय-समय पर अभियान भेजे जाते थे और ओमान, मेलुहा आदि बाहरी क्षेत्रों से संबंध स्थापित किए जाते थे।
अथवा
सिंधु घाटी सभ्यता की सामाजिक एवं धार्मिक विशेषताओं का वर्णन करें?
उत्तर:
सिंधु घाटी की सभ्यता भारत की एक विकसित एवं नियोजित सभ्यता रही है। इस सभ्यता की सामाजिक एवं धार्मिक विशेषताओं का वर्णन इस प्रकार है:
- सामाजिक विशेषताएँ:
- भोजन: हड़प्पा के लोग गेहूं, चावल, जौ, दूध, मांस, अंडा तथा मछलियाँ इत्यादि खाते थे।
- वस्त्र: हड़प्पा के लोग सूती एवं ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे। सुइयों से सिलाई का प्रचलन था।
- आभूषण: इस सभ्यता के स्त्री-पुरुष दोनों आभूषण के शौकिन थे। वे सोने, चाँदी, ताँबे तथा बहुमूल्य पत्थरों के गहने पहनते थे। आभूषण निर्माण कला उन्नत रूप से विकसित थी।
- मनोरंजन: हड़प्पाई लोग शतरंज जैसे खेल खेलते थे तथा नाच, गाना एवं शिकार करना मनोरंजन का उत्तम साधन था। बच्चे विभिन्न पदार्थों से बने खिलौनों से खेलते थे।
- धार्मिक विशेषताएँ:
- हड़प्पाई लोग मातृदेवी, शिव, पशुओं और वृक्षों की पूजा करते थे। पुरातत्वविदों को मातृदेवी की मूर्तियाँ मिली हैं, उन्हें शिव की तीन मुख वाली मूर्ति भी प्राप्त हुई है। यहाँ के लोग इनके अतिरिक्त हाथी, गैंडा, बैल, पीपल तथा अग्नि की पूजा करते थे।
- यहाँ के लोग मृतकों का दाह-संस्कार तीन प्रकार से करते थे-कुछ लोग शव को जलाते थे, कुछ दफनाते थे तथा कुछ उन्हें चारे के रूप में पशुओं के सामने फेंक देते थे।
31. सिक्ख धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
- सिक्ख धर्म के प्रवर्त्तक गुरु नानक देव जी थे। उनका जन्म 1469 ई. में रावी नदी के तट पर स्थित तलवंडी नामक गाँव में हुआ था। उन्होंने सिख धर्म के अनुयायियों के लिए अपनी शिक्षाएँ या विचार पंजाबी भाषा में दिए. उनके संदेश उनके भजनों में निहित है। सिक्ख धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ इस प्रकार है-
- ईश्वर की भक्ति: ईश्वर एक है, सर्वशक्तिमान है, सर्वव्यापक है, निराकार है और अदृश्य है. उसकी भक्ति निष्काम भाव से करनी चाहिए, और उसका नाम स्मरण व उसके समक्ष आत्मसमर्पण ही उसे प्राप्त करने का एकमात्र माध्यम है।
- गुरु का महत्व: मनुष्य के जीवन में गुरु को अत्यधिक महत्त्व दिया गया है और उनकी अनिवार्यता पर बल दिया गया है।
- गृहस्थ जीवन: इस धर्म में गृहस्थ जीवन का परित्याग उचित नहीं माना जाता है, बल्कि इसे ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में साधक माना गया है।
- समानता और कर्मकांडों का विरोध: सिक्ख धर्म जाति-पाति, धर्म एवं वर्गभेद के विरुद्ध है. उन्होंने धर्म के बाहरी कर्मकांडों जैसे यज्ञ, व्रत एवं पवित्र स्नान आदि का विरोध किया।
- सामुदायिक सेवा: आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावनाओं को समाज में बनाए रखने के लिए 'लंगर' जैसी प्रथा का आरम्भ किया गया।
- मानवीय गुण: सदाचार, परोपकार, नेक कमाई (ईमानदारी से काम करना) जैसे मानवीय गुणों के विकास पर बल दिया गया।
अथवा
चर्चा कीजिए कि अलवार, नयनार और वीरशैवों ने किस प्रकार जाति प्रथा की आलोचना प्रस्तुत की?
उत्तर:
- अलवार, नयनार व वीरशैव दक्षिण भारत में उत्पन्न विचारधाराएँ थीं। इनमें अलवार व नयनार तमिलनाडु में तथा वीरशैव कर्नाटक में थे। इन्होंने जाति प्रथा के बंधनों को अपने ढंग से नकारा।
- अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा का खंडन किया। उन्होंने सभी मनुष्यों को एक ईश्वर की संतान घोषित किया। इनके साहित्य में वैदिक ब्राह्मणों की तुलना में विष्णु भक्तों को प्राथमिकता दी गई है। ये भक्त चाहे किसी भी जाति अथवा वर्ण से थे।
- अलवार व नयनार संत ब्राह्मण समाज, शिल्पकार और किसान समुदाय से थे। इनमें से कुछ तो 'अस्पृश्य' समझी जाने वाली जातियों में से भी थे। अलवार समाज ने इन संतों व उनकी रचनाओं को पूरा सम्मान दिया तथा उन्हें वेदों जितना प्रतिष्ठित बताया। अलवार संतों का एक मुख्य काव्य 'नलचिरादिव्यप्रबंधम्' को तमिल वेद के रूप में मान्यता दी गई।
- लिंगायत समुदाय के लोगों ने भी जाति व्यवस्था का विरोध किया। इन्होंने ब्राह्मणीय धर्मशास्त्रों की मान्यताओं को नहीं स्वीकारा। उन्होंने वयस्क विवाह तथा विधवा पुनर्विवाह को मान्यता दी। इस समुदाय में अधिकतर वे लोग शामिल हुए जिनको ब्राह्मणवादी व्यवस्था में विशेष महत्त्व नहीं मिला। इनका विश्वास था कि जाति व्यवस्था वर्ग विशेष के हितों की पूर्ति करती है।
32. 1857 ई. के विद्रोह के परिणामों का विश्लेषण करें?
उत्तर:
1857 ई. के विद्रोह के निम्नलिखित परिणाम सामने आए-
- कंपनी शासन का अंत-
- 1857 ई. के विद्रोह का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया। इस संबंध में 1 नवंबर, 1858 ई. को महारानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की। भारत का शासन प्रबंध अब ब्रिटिश संसद के अधीन कर दिया गया। बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा कोर्ट ऑफ डायरैक्टर्स को तोड़ दिया गया। भारत का शासन चलाने के लिये भारतीय मंत्री की नियुक्ति की गई। उसको सहयोग देने के लिए 15 सदस्यों की एक कौंसिल बनाई गई।
- अंग्रेजों का भारतीय राजाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव
- 1857 ई. के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेजों ने भारतीय राजाओं के प्रति नई नीति अपनाई। उनको आश्वासन दिया गया कि भविष्य में कभी भी उनके राज्यों को अंग्रेजी राज्य में सम्मिलित नहीं किया जायेगा। हड़प की नीति का त्याग किया गया। अब उनको पुत्र गोद लेने की आज्ञा दी गई। अब केवल कुशासन के कारण ही अंग्रेजी सरकार भारतीय रियासतों में हस्तक्षेप कर सकती थी। अंग्रेजी सरकार की स्वीकृति के बिना भारतीय शासक किसी अन्य शक्ति के साथ संबंध स्थापित नहीं कर सकते थे। जिन शासकों ने विद्रोह के दौरान अंग्रेजों को सहयोग दिया था उनको विशेष पुरस्कार दिये गये।
- मुगल वंश तथा पेशवाओं का अंत
- मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वितीय ने 1857 ई के विद्रोह में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोहियों का साम दिया था। अंग्रेजों ने उसको गिरफ्तार कर लिया था। उसको देश निकाला देकर रंगून भेज दिया गया। 1862 ई. में उसकी मृत्यु के पश्चात् मुगल वंश का अंत हो गया। इसी तरह नाना साहिब विद्रोह में असफल रहने के पश्चात् नेपाल की ओर भाग गए। जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
- भारतीय तथा यूरोपीय लोगों के मध्य तनावपूर्ण संबंध
- विद्रोह के कारण भारतीयों तथा यूरोपियनों के संबंधों में बहुत तनाव आ गया था। अंग्रेजों ने भारतीयों पर बहुत अत्याचार किए, इसलिए भारतीयों के हृदयों में अंग्रेजों के प्रति घृणा पैदा हो गई। दूसरी ओर क्योंकि भारतीयों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था इसलिए अंग्रेज भी भारतीयों से घृणा करने लग गए थे।
- उपाधियों में परिवर्तन
- भारत का शासन अब कंपनी के हाथ से निकल कर ब्रिटिश संसद के अधीन आ गया। इस कारण गवनी-जनरल की उपाधि में परिवानि किया गया। अब उसको वायसराय की उपाधि दी गई।
- अंग्रेजी नीति में बदलाव
- 1857 के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेजों ने अपने साम्राज्य की सुरक्षा के लिए 'फूट डालो तथा राज करो' की नीति अपनाई। उन्होंने हिंदुओं तथा मुसलमानों में परस्पर फूट डालने का हर संभव प्रयत्न किया।
- अंग्रेजी सैनिकों की संख्या में वृद्धि
- विद्रोह के समय भारत में अंग्रेजी सैनिकों की संख्या बहुत कम थी। इसलिए उनको कई स्थानों पर पराजय का मुंह देखना पड़ा था। इस गलती को दूर करने के लिए अब आंग्रेजी सैनिकों की संख्या में वृद्धि कर दी गई।
- व्यापार तथा वाणिज्य में परिवर्तन
- कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया था। इसलिए अब ब्रिटिश सरकार ने भारतीय व्यापार को अपने हाथों में ले लिया। भारतीय व्यापार तथा उद्योगों पर कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए। परिणामस्वरूप जहाँ अंग्रेजों के उद्योग एवं व्यापार में प्रगति होती गई वहीं भारतीय उद्योग एवं व्यापार तबाह होता चला गया।
अथवा
1857 ई. विद्रोह के स्वरूप का वर्णन करें?
उत्तर
1857 ई. के विद्रोह के स्वरूप के विषय में इतिहासकार एकमत नहीं है। विभिन्न इतिहासकारों ने इस विद्रोह के स्वरूप की व्याख्या अपने-अपने दृष्टिकोण से की है। मुख्यतौर पर ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे केवल सैनिक विद्रोह का नाम दिया। वे इसे राष्ट्रीय विद्रोह के रूप में स्वीकार न करके इसके प्रभाव को कम करना चाहते थे। वे इस विद्रोह की व्यापकता को कम साबित करने के लिए इसे केवल सैनिक विद्रोह का नाम देते है।
- इस सन्दर्भ में अंग्रेज इतिहासकार टी. आर. होम्स ने यह मत प्रतिपादित किया यह विद्रोह वास्तव में बर्बरता और सभ्यता के बीच हुआ संधर्ष था। होम्स अंग्रेजों को सभ्य तथा भारतीयों को बर्बर मानता है। होम्स के द्वारा भारतीयों को बर्बर कहना नितान्त असंगत है।
- एक अन्य ब्रिटिश इतिहासकार का मानना है कि यह विद्रोह वास्तव में भारतीयों द्वारा ईसाईयों के विरूद्ध किया गया विद्रोह था। रीज के शब्दों में यह ईसाईयों के विरूद्ध एक कट्टर धार्मिक युद्ध" था।
- परन्तु रीज का यह तर्क सच्चाई से परे है। इस विद्रोह में अनेक भारतीयों ने अंग्रेजों का साथ दिया था। यदि यह ईसाईयों के विरूद्ध एक कट्टर धर्म युद्ध होता तो कुछ भारतीय इस विद्रोह में अंग्रेजों का साथ क्यों देते।
- मेलेसन, लारेन्स आदि प्रमुख यूरोपीय विद्वान इसे केवल कुछ सिपाहियों द्वारा किया गया विद्रोह मानते है।
उपरोक्त इतिहासकारों के मत का समर्थन कुछ भारतीय इतिहासकार भी करते हैं जिनमें रमेश चन्द्र मजूमदार का नाम प्रमुख है। उनका मानना है कि यह न तो पहला, न राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता का युद्ध था।"
अपने मत के समर्थन में उपरोक्त विद्वान निम्न तर्क प्रस्तुत करते है-
- (i) यह विद्रोह सैनिकों के द्वारा ही शुरू किया गया था।
- (ii) इस विद्रोह में शामिल होने वालों में राष्ट्रीय भावना निहित नहीं थी। सभी अपने-अपने हितों की पूर्ति के लिए लड़ रहे थे।
- (iii) यह विद्रोह पूर्ण रूप से व्यापक नहीं था। दक्षिण भारत इस विद्रोह से दूर ही रहा था।
- (iv) कई भारतीय रियासतों ने इसमें अंग्रेजी सरकार का साथ दिया था, तो इसे राष्ट्रीय विद्रोह का नाम देना तर्क संगत नहीं है।
उपरोक्त तर्कों को प्रमुख भारतीय इतिहासकार स्वीकार नहीं करते है। इस विद्रोह में शामिल सभी वर्गों का एक मात्र उद्देश्य भारत से अंग्रेजी शासन समाप्त करना था। अतः ऐसी स्थिति में जबकि यह स्पष्ट है कि भारतीयों का मूल उद्देश्य इस विद्रोह के द्वारा अंग्रेजी शासन से मुक्ति पाना था, तो फिर इसे स्वतंत्रता आन्दोलन के अतिरिक्त और कुछ कैसे कहा जा सकता है। उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह मानना कि इसमें आम जानता ने भाग नहीं लिया था, उचित नहीं है।
खण्ड घ (स्रोत आधारित प्रश्न)
33.
विवाह के आठ प्रकार
यहाँ मनुस्मृति से पहली, चौथी, पाँचवीं और छठी विवाह पद्धति का उदाहरण दिया जा रहा है: पहली-कन्या का दान बहुमूल्य वस्त्रों और अलंकारों से विभूषित कर उसे वेदज्ञ वर को दान दिया जाए जिसे पिता ने स्वयं आमंत्रित किया हो। चौथी-पिता वर-वधू युगल को यह कहकर संबोधित करता है कि करो।" तत्पश्चात वह वर का सम्मान कर उसे कन्या का दान करता है। "तुम साथ मिलकर अपने दायित्वों का पालन पाँचवी वर को वधू की प्राप्ति तब होती है जब वह अपनी क्षमता व इच्छानुसार उसके बांधवों को और स्वयं वधू को यथेष्ट धन प्रदान करता है। छठीं-स्त्री और पुरुष के बीच अपनी इच्छा से संयोग... जिसकी उत्पत्ति काम से है....
प्रश्नः
1. मनुस्मृति क्या है?
उत्तर: मनुस्मृति आरम्भिक भारत का एक प्रसिद्ध विधि ग्रन्थ है।
2. धर्मशास्त्रों में कितने प्रकार के विवाह का वर्णन किया गया है?
उत्तर: धर्मशास्त्रों में आठ प्रकार के विवाह का वर्णन किया गया है।
3. उस विवाह पद्धति का नाम बताइए जिसमें पिता वेदज्ञ वर से अपनी कन्या का विवाह करता है?
उत्तर: ब्रहम विवाह।
4. उस विवाह पद्धति का नाम बताइए जिसमें स्त्री और पुरूष के बीच अपनी इच्छा से संयोग होता है?
उत्तर: गांधर्व विवाह।
34, 1665 ई. में अपने राजस्व अधिकारी का औरंगजब के द्वारा दिये गए हुक्म की एक अशः
वे परगनाओं के अमीनों को निर्देश दें कि वे हर गाँव, हर किसान (आसामी) के बावत खेती के मौजूदा हालात (मौजूदात) पता करें, और बारीकी से उनकी जाँच करने के बाद सरकार के वित्तीय हितों (किफ़ायत) व किसानों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए जमा निर्धारित करें।
प्रश्नः
1. औरंगजेब कौन था?
उत्तर: औरंगजेब एक शक्तिशाली मुगल शासक था जिसने 1658 ईस्वी से 1707 ईस्वी तक शासन किया।
2. औरंगजेब ने अपने राजस्व अधिकारियों को क्या आदेश दिया था?
उत्तर: औरंगजेब ने अपने राजस्व अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे सरकार के वित्तीय हितों और किसानों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए भू-राजस्व निर्धारित करें।
3. 'जमा' से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: मुगलकाल में निर्धारित किए गए भू-राजस्व को 'जमा' कहा जाता था।
35. "जी नहीं, असली अल्पसंख्यक इस देश की जनता है"
जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत किए गए उद्देश्य प्रस्ताव का स्वागत करते हुए एन.जी. रंगा ने कहा था-
महोदय, अल्पसंख्यकों के बारे में बातें हो रही हैं। असली अल्पसंख्यक कौन हैं? तथाकथित पाकिस्तानी प्रांतों में रहने वाले हिंदू, सिख और यहाँ तक मुसलमान भी अल्पसंख्यक नहीं हैं। जी नहीं, असली अल्पसंख्यक तो इस देश की जनता है। यह जनता इतनी दबी-कुचली और इतनी उत्पीड़ित है कि अभी तक साधारण नागरिक के अधिकारों का लाभ भी नहीं उठा पा रही है। स्थिति क्या है? आप आदिवासी इलाकों में जाइए। उनके अपने कानूनों, उनके जनजातीय कानूनों, उनकी जमीन को उनसे नहीं छीना जा सकता। लेकिन हमारे व्यापारी वहाँ जाते हैं, और तथाकथित मुक्त बाजार के नाम पर उनकी जमीन छीन लेते हैं। भले ही कानून जमीन की इस बेदखली के खिलाफ हो, व्यापारी इन आदिवासियों को तरह-तरह के बंधनों में जकड़कर गुलाम बना लेते हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी दासता के नर्क में ढकेल देते हैं। आइए अब आम गाँव वालों को देख लेते हैं। वहाँ सूदखोर पैसा लेकर जाता है और गाँव वालों को अपनी जेब में डाल लेता है। वहाँ ज़मींदार हैं और मालगुजार व अन्य विभिन्न लोग हैं जो इन गरीब देहातियों का शोषण करते हैं। इन लोगों में मूलभूत शिक्षा तक नहीं है। असली अल्पसंख्यक यही लोग हैं जिन्हें सुरक्षा और सुरक्षा का आश्वासन मिलना चाहिए। उन्हें आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने के लिए केवल इस प्रस्ताव से काम चलने वाला नहीं है...।
प्रश्नः
1. इस उद्धरण को पढ़ने के बाद आप असली अल्पसंख्यक किसे कहेंगे?
उत्तर: आम ग्रामीण लोग।
2. आदिवासी इलाकों में आदिवासियों की जमीन किस वर्ग के लोग छीन रहे हैं?
उत्तर: व्यापारी वर्ग।
3. "असली अल्पसंख्यक इस देश की जनता है" एन.जी. रंगा के इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: एन.जी. रंगा के अनुसार अल्पसंख्यक इस देश की जनता है क्योंकि साधारण जनता को अभी मूलभूत अधिकार भी प्राप्त नहीं हुए है।
खण्ड ङ (मानचित्र कार्य)
36. दिए गए भारत के राजनीतिक रेखा मानचित्र पर निम्न स्थानों को उनके नाम के साथ अंकित कीजिए-
(i) हड़प्पा सभ्यता का सबसे उत्तरी दिशा में स्थित स्थल कौन सा है?
(ii) मत्स्य।
(iii) वह स्थान जहां महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था।
(iv) मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह कहाँ स्थित है?
(v) वह स्थान जहाँ पर जालियांवाला बाग हत्याकांड हुआ था।

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