HBSE Class 12 History इतिहास (हरियाणा बोर्ड) अध्याय 2. राजा, किसान और नगर Exercise Solution

 अध्याय 2. राजा, किसान और नगर Exercise Solution


प्रश्न 1. अशोक के अभिलेखों के ऐतिहासिक महत्त्व पर टिप्पणी लिखिए। (HBSE 2017, 2024)
अथवा
"अशोक के प्रशासन को समझने के लिए अशोक के अभिलेख सबसे महत्त्वपूर्ण स्त्रोत हैं।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
अथवा
ऐतिहासिक जानकारी के स्त्रोत के रूप में अशोक के स्तम्भों का क्या महत्त्व है? (HBSE 2025)
उत्तर -
अशोक ने अपने शासन काल में अनेक अभिलेख खुदवाए थे। इन अभिलेखों का भारतीय इतिहास में एक विशेष स्थान है। अशोक के अभिलेखों के ऐतिहासिक महत्त्व का वर्णन इस प्रकार है:
  • ये अभिलेख मौर्य साम्राज्य की जानकारी के महत्त्वपूर्ण स्त्रोत हैं।
  • इन अभिलेखों से हमें मौर्य साम्राज्य के विस्तार का पता चलता है।
  • इन अभिलेखों से हमें अशोक द्वारा किए गए प्रजाहित कार्यों की जानकारी प्राप्त होती है।
  • ये अभिलेख मौर्य कला के उत्तम उदाहरण हैं।
  • इन अभिलेखों से हमें अशोक द्वारा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए किए गए प्रयासों का पता चलता है।
प्रश्न 2. संगम साहित्य पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर - संगम साहित्य की रचना तमिल भाषा में की गई थी, जिसके संरक्षण में पांड्य शासकों का महान योगदान था।
यह प्राचीनतम उपलब्ध तमिल साहित्य है, जिसकी रचना लगभग 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच हुई थी।"संगम" शब्द का अर्थ 'संघ' है और यह मदुरै में आयोजित तमिल कवियों के सम्मेलनों को संदर्भित करता है, जिन्हें पांड्य राजाओं का संरक्षण प्राप्त था। 
  • इस साहित्य में प्रेम (अकम) और युद्ध (पुरम) जैसे विषयों पर कविताएँ और महाकाव्य शामिल हैं।
  • यह प्राचीन दक्षिण भारत के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करता है, जिसमें सरदारों के संकलन और वितरण के तरीके भी शामिल हैं
  • 'सिलप्पादिकारम्' संगम साहित्य का एक प्रमुख महाकाव्य है।
प्रश्न 3.
गुप्तकाल में किए गए भूमि अनुदानों का दो विशेषताएं लिखिए ।  (HBSE 2017)
अथवा
प्राचीन भारतीय समाज में भूमि-अनुदान की प्रकृति और विशेषताओं की परख कीजिए।
उत्तर-
गुप्तकाल में भूमिदान के जो प्रमाण मिले है, उनके अनुसार भूमि अनुदानों की निम्न विशेषताएँ थी-
  • (i) साधारण तौर ये भूमि अनुदान ब्राह्मणों या धार्मिक संस्थाओं को दिए गए थे।
  • (ii) महिलाओं को भूमि अनुदान देने का अधिकार नहीं था परन्तु चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री प्रभावतीगुप्त के अनुदान किया था। यह इतिहास में भूमि अनुदान का विरला उदाहरण है।
  • (iii) जो भूमि अनुदान के रूप में दी जाती थी, वह कर मुक्त भूमि होती थी।
प्रश्न 4. मेगस्थनीज कौन था? HBSE 2019, 20
उत्तर- 
  • मेगस्थनीज एक प्राचीन यूनानी इतिहासकार, भूगोलवेत्ता और खोजकर्ता थे। 
  • वह सेल्यूकस प्रथम निकेटर का राजदूत था। 
  • वह मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में भारत आया था। 
  • वह 302 ई. पू. से 298 ई. पू. तक मौर्य दरबार में रहा था. 
  • उसने अपनी पुस्तक 'इंडिका' के माध्यम से मौर्य साम्राज्य की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है।
प्रश्न 5. प्रयाग प्रशस्ति के बारे में आप क्या जानते हैं? (HBSE 2017, 20)
उत्तर- 
प्रयाग प्रशस्ति गुप्त शासक समुद्रगुप्त के बारे में जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है. इसकी रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि और मंत्री हरिषेण ने लगभग 345 ई. में की थी. 

  • यह प्रशस्ति इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख के नाम से भी प्रसिद्ध है. 
  • हरिषेण ने इसमें समुद्रगुप्त की सैनिक विजयों, उसके गुणों और साम्राज्य की सीमाओं का वर्णन किया है. 
  • यह प्रशस्ति संस्कृत भाषा में लिखी गई है. 
  • मूल रूप से यह लेख कौशाम्बी में खुदवाया गया था, जिसे बाद में अकबर ने इलाहाबाद (प्रयागराज) के किले में स्थापित करवाया. 
 प्रश्न 6.पंचमार्क अथवा आहत सिक्कों के बारे में आप क्या जानते हैं? (HBSE)
उत्तर -
  • छठी शताब्दी ई. पू. में, चांदी और तांबे के आयताकार टुकड़ों पर ठप्पा मारकर अनेक सिक्के बनाए जाते थे। निर्माण तकनीक के कारण इन सिक्कों को 'आहत' (छिद्रित) सिक्के कहा जाता था। 
  • इन सिक्कों पर एक से पाँच तक विभिन्न चिह्न या प्रतीक (जैसे सूर्य, बैल, हाथी) होते थे, 
  • इसलिए इन्हें 'पंचमार्क' या 'पंच-चिह्नित' सिक्के भी कहते थे। 
प्रश्न 7. हरिषेण कौन था? (HBSE 2018, 2019)
उत्तर -
हरिषेण गुप्त शासक समुद्रगुप्त का राजकवि और एक महत्वपूर्ण दरबारी अधिकारी था। उसने संस्कृत भाषा में 'प्रयाग प्रशस्ति' (जिसे इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख भी कहा जाता है) की रचना की थी, जिसमें समुद्रगुप्त की वीरता का वर्णन है। 

प्रश्न 9. सोने के सिक्के के बारे में एक सक्षिप्त नोट लिखिए। (HBSE)
उत्तर -
भारत में सोने के सिक्के सर्वप्रथम प्रथम शताब्दी ईस्वी में कुषाण राजाओं ने जारी किए थे। इन सिक्कों का आकार व वज़न तत्कालीन रोमन सम्राटों तथा ईरान के पार्थियन शासकों द्वारा जारी सिक्कों के बिल्कुल समान थे। उत्तर व मध्य भारत के कई पुरास्थलों पर ऐसे सिक्के मिले हैं। इन सिक्कों के माध्यम से बहुमूल्य वस्तुओं का विनिमय किया जाता था। 

प्रश्न 10 . आरम्भिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई. पू. को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल क्यों माना जाता है? अपने उत्तर की पुष्टि के लिए तर्क दीजिए। (HBSE 2024, 2025)
उत्तर - आरम्भिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई. पू. को एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है। इसके अनेक कारण है जिनका वर्णन इस प्रकार है-
राज्यों और नगरों का उदय: 
  • यह वह युग था जब पहली बार राज्यों का गठन हुआ और शहरों का विकास हुआ. 
लोहे का बढ़ता उपयोग: 
  • इस काल में लोहे का प्रयोग काफी बढ़ा, जिसने कृषि और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव लाए. 
सिक्कों का विकास: 
  • व्यापार और वाणिज्य के विकास के साथ, सिक्कों का उपयोग भी इसी काल में शुरू हुआ. 
नए धर्मों का उदय: 
  • इसी काल में बौद्ध धर्म और जैन धर्म जैसे दो महान धर्मों का उदय हुआ, जिन्होंने समाज में नैतिकता और आध्यात्मिकता के नए मार्ग दिखाए. 
महाजनपदों का उद्भव: 
  • इस अवधि में सोलह शक्तिशाली महाजनपदों का उद्भव हुआ, जिन्होंने राजनीतिक परिदृश्य को नया रूप दिया
प्रश्न 11. अभिलेखशास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।
                                 अथवा
अभिलेखीय साक्ष्यों की सीमाएं स्पष्ट कीजिए। (HBSE 2023)
                                अथवा
"इतिहासकार अभिलेखों को अपने आप में एक संपूर्ण स्त्रोत नहीं मानते हैं और इन साक्ष्यों के पूरक के लिए अन्य स्त्रोतों का उपयोग करते हैं।" इतिहासकार ऐसा क्यों और किस लिए करते हैं।
उत्तर - अभिलेखशास्त्रियों की प्रमुख समस्याएँ निम्न हैं:
  • (i) प्राचीनकाल के अभिलेखों को समझने में कुछ कठिनाइयाँ आती हैं।
  • (ii) कई अभिलेख ऐसे भी हैं जिनके ऊपर लिखे हुए शब्द टूटे-फूटे हैं, जो स्पष्ट नहीं पढ़े जा सकते।
  • (iii) कई अभिलेखों को हानि पहुँचने के कारण उनमें से कई शब्द पूरी तरह दिखाई नहीं देते हैं।
  • (iv) कई अभिलेखों में लिखी भाषा के शब्दों के अर्थ स्पष्ट समझ में नहीं आते, कई अभिलेख अभी तक पढ़े नहीं जा सके हैं।
  • (v) कुछ अभिलेखों में एक ही राजा के लिए भिन्न-भिन्न नामों और उपाधियों का प्रयोग किया गया है जिससे अभिलेखशास्त्री भ्रम में पड़ जाते हैं।
प्रश्न 12. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' पर एक सक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (HBSE 2018, 2024)
उत्तर - 
  • इसका लेखन कौटिल्य ने किया था, जिन्हें चाणक्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, जो मौर्य शासक चंद्रगुप्त मौर्य के राजनीतिक गुरु और प्रधानमंत्री थे।
  • यह पाठ मुख्य रूप से राजनीतिक सिद्धांतों और शासन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है। 
  • यह पुस्तक 15 खंडों में विभाजित है और इसमें राज्य प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जिनमें शासक के कर्तव्य और अधिकार, मंत्रियों का चुनाव, विभिन्न सरकारी विभागों का संगठन, न्याय व्यवस्था, कर व्यवस्था, राजस्व सिद्धांत और शासक की विदेश नीति शामिल हैं। 
  • अर्थशास्त्रके अनुसार , राजा सर्वोच्च स्थान पर होता है और उसके पास असीमित और निरपेक्ष शक्तियां होती हैं, और जासूसी प्रणाली को बहुत महत्व दिया जाता है। 

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