HBSE Class 12 History इतिहास (हरियाणा बोर्ड) अध्याय 10. विद्रोह और राज Exercise Solution

 अध्याय 10. विद्रोह और राज Exercise Solution


प्रश्न 1. 'सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम' क्या था। (HBSE 2023)
उत्तर- गवर्नर लॉर्ड केनिंग ने 1856 ई. में 'सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम' बनाया था। इस अधिनियम के अनुसार भारतीय सैनिकों को युद्ध के लिए भारत से बाहर भी भेजा जा सकता था। इस अधिनियम से भारतीय सैनिकों में भारी असंतोष था।

प्रश्न 2. 'उत्तराधिकार कानून' अथवा 'लेक्स लोसी एक्ट' क्या था? (HBSE 2023)
उत्तर- यह कानून 1850 ई. में बनाया गया था। इस कानून अनुसार यदि कोई व्यक्ति अन्य धर्म अपनाता है तो वह फिर भी अपनी पैतृक सम्पत्ति का उत्तराधिकारी बना रह सकता था। यह कानून वास्तव में ईसाई धर्म के प्रचार हेतू बनाया गया था।

प्रश्न 3. बहादुर शाह जफर के बारे में आप क्या जानते हो?
उत्तर- बहादुर शाह जफर मुगल वंश का अंतिम शासक था। 1857 ई. के विद्रोह में उसे विद्रोह का नेता बनाया गया। विद्रोहियों का साथ देने के कारण उसे कैद करके रंगून भेज दिया गया, जहाँ पर 1862 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 4. एकमुश्त बंदोबस्त क्या था?
उत्तर- यह बंदोबस्त 1856 ई. में लागू किया गया था। इसके अनुसार ताल्लुकदारों को भूमि का वास्तविक मालिक स्वीकार नहीं किया गया। उन्हें केवल भू-राजस्व वसूल करने वाले एंजेंट माना गया।

प्रश्न 5. मंगल पांडे कौन था?
उत्तर- मंगल पांडे बंगाल में बैरकपुर छावनी का एक सैनिक था। जब एक अंग्रेज अधिकारी ने उसे चर्बी वाले कारतूस प्रयोग करने के लिए मजबूर किया तो उसने अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर दी। इस हत्या के लिए उसे 8 अप्रैल 1857 ई० को फांसी दे दी गई। वह भारत का प्रथम शहीद माना जाता है।

प्रश्न 6. नाना साहिब कौन थे?
उत्तर- नाना साहिब अन्तिम पेशवा बाजीराव द्वितीय का दत्तक पुत्र था। उसने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया।

प्रश्न 7. रानी लक्ष्मीबाई के बारे में आप क्या जानते है?
उत्तर- रानी लक्ष्मीबाई झांसी के राजा गंगाधर राव की पत्नी थी। 1854 ई. में झाँसी को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल कर लिया गया था। झांसी को आजाद कराने हेतू 1857 ई. के विद्रोह में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया। अन्त में 17 जन 1858 ई. में वह वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुई।

प्रश्न 8. 1857 ई. के विद्रोह के राजनीतिक कारण बताइए।
उत्तर-
  • (i) लार्ड डलहौजी की विलय की नीति इस विद्रोह का प्रमुख राजनीतिक कारण था।
  • (ii) अवध को कुशासन का आरोप लगाकर अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाना।
  • (111) नाना साहिब की पेंशन बंद करना तथा बहादुर शाह का अपमान करना भी इस विद्रोह के राजनीतिक कारण थे।
प्रश्न 9. 1857 ई. के विद्रोह के दो आर्थिक कारण बताइए।
उत्तर-
  • (i) अंग्रेजी शासन में भारतीय उद्योग-धन्धे ठप्प हो गए थे।
  • (ii) भारत से धन की तेजगति से निकासी होना।
प्रश्न 10. 1857 ई. के विद्रोह का स्वरूप या प्रकृति क्या थी?
उत्तर- यह विद्रोह वास्तव में अंग्रेजी शासन भारत से समाप्त करने के लिए लड़ा गया था। यह भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम था। यह केवल सैनिक विद्रोह नहीं था बल्कि सभी भारतीयों ने इसे मिलकर लड़ा था।

प्रश्न 11. 1857 ई. के विद्रोह को 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' क्यों कहा जाता है? 
उत्तर- इस विद्रोह को सभी भारतीयों ने एकजुट होकर लड़ा था। सभी का एक मात्र उद्देश्य अंग्रेजी शासन को समाप्त करना था। इसलिए भारतीयों के इस सामूहिक प्रयास को 'प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम' कहा जाता है।

प्रश्न 12. 1857 ई. के विद्रोह की निश्चित तिथि क्या थी और यह शुरू किस तिथि को हुआ?
उत्तर-
  • (i) विद्रोह की निश्चित तिथि 31 मई 1857 ई.
  • (ii) विद्रोह शुरू होने की तिथि 10 मई 1857 ई.

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प्रश्न 1. बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया?
उत्तर - विद्रोह में सफलता हेतू सिपाहियों को मजबूत संगठन तथा सफल नेतृत्त्व की आवश्यकता थी। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए सिपाहियों ने निम्न शासकों से इस विद्रोह को नेतृत्व प्रदान करने का आग्रह किया।
  • (i) सबसे पहले मेरठ के विद्रोही सिपाहियों ने अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर से नेतृत्व करने का आग्रह किया। मजबूर होकर बहादुर शाह जफर को सिपाहियों का आग्रह मानना पड़ा।
  • (ii) झांसी में रानी लक्ष्मीबाई से, कानपुर में नाना साहिब से, बिहार में कुंवर सिंह से सिपाहियों ने नेतृत्व के लिए आग्रह किया।
प्रश्न 2. अंग्रेज़ों की न्याय व्यवस्था बगावत के लिए कैसे उत्तरदायी थी?
उत्तर - अंग्रेज़ों द्वारा भारत में स्थापित की गई न्याय व्यवस्था दोषपूर्ण थी। इस व्यवस्था में भारतीयों को निष्पक्ष रूप से न्याय नहीं मिलता था एवं भारतीय नागरिको के साथ न्यायिक मामलों में भेदभाव किया जाता था। इससे भारतीय अंग्रेज़ों की न्याय व्यवस्था से नाराज थे। 1829 ई० का सती प्रथा निषेध अधिनियम, 1850 ई० के उत्तराधिकार कानून एवं 1856 ई० के 'सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम' आदि कानूनों के लागू होने के बाद भारतीयों का अंग्रेजों की न्यायव्यवस्था से विश्वास उठ गया तथा वे विद्रोह अथवा बगावत के लिए उतारू हो गए।

प्रश्न 3. महालवाड़ी भूमिकर प्रणाली विद्रोह के लिए क्यों उत्तरदायी थी?
उत्तर- 1857 ई० के विद्रोह की सबसे अधिक व्यापकता उत्तर भारत में देखी गई थी। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से अंग्रेजी सरकार ने महालवाड़ी भूमिकर प्रणाली को लागू किया था। यह प्रणाली काफी दोषपूर्ण थी। इसमें किसानों का अत्यधिक शोषण होता था तथा इनपर कठोर अत्याचार हुए। इस कारण किसान भी 1857 ई० के विद्रोह में शामिल हो गए थे।


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मौलवी अहमदुल्ला शाह

मौलवी अहमदुल्ला शाह 1857 के विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाले बहुत सारे मौलवियों में से एक थे। हैदराबाद में शिक्षित शाह काफी कम उम्र में ही उपदेशक बन गए थे। 1856 में उन्हें अंग्रेजों के ख़िलाफ़ जिहाद का प्रचार करते और लोगों को विद्रोह के लिए तैयार करते हुए गाँव-गाँव जाते देखा गया था। वे एक पालकी में बैठकर चलते थे। पालकी के आगे-आगे ढोल और पीछे उनके समर्थक होते थे। इसीलिए उन्हें लोग-बाग डंका शाह कहने लगे थे। ब्रिटिश अफ़सर इस बात से परेशान थे कि मौलवी के साथ हजारों लोग जुट रहे थे और बहुत सारे मुसलमान उन्हें पैगम्बर मानने लगे थे और समझते थे कि वह इस्लाम के आदर्शों से ओतप्रोत हैं। जब 1856 में वे लखनऊ पहुँचे तो पुलिस ने उन्हें शहर में उपदेश देने से रोक दिया। 1857 में उन्हें फैजाबाद जेल में बंद कर दिया गया। रिहा होने पर उन्हें 22वीं नेटिव इन्फेंट्री के विद्रोहियों ने अपना नेता चुन लिया। उन्होंने चिनहाट के विख्यात संघर्ष में हिस्सा लिया जिसमें हेनरी लॉरेंस की अगुवाई वाली टुकड़ियों को मुँह की खानी पड़ी। मौलवी साहब को उनकी बहादुरी और ताकत के लिए जाना जाता था। बहुत सारे लोग मानते थे कि उनको कोई नहीं हरा सकता; उनके पास जादुई शक्तियाँ हैं और अंग्रेज उनका बाल भी बाँका नहीं कर सकते। काफ़ी हद तक इसी विश्वास के कारण उन्हें लोगों में इतना अधिकार प्राप्त था।

प्रश्नः
1. मौलवी अहमदुल्ला शाह ने शिक्षा कहाँ ग्रहण की थी?
2. मौलवी अहमदुल्ला शाह को अन्य किस नाम से जाना जाता है?
3. मौलवी अहमदुल्ला को कौन-सी जेल में बंद किया गया?
4. मौलवी अहमदुल्ला के बारे में लोगों की क्या राय थी?
5. मौलवी अहमदुल्ला शाह का 1857 के विद्रोह में क्या योगदान है।


उत्तर-
1. हैद्राबाद में।
2. डंका शाह के नाम से।
3. फैजाबाद जेल में।
4. बहुत सारे लोग मानते थे कि उनको कोई नहीं हरा सकता; उनके पास जादुई शक्तियाँ हैं तथा अंग्रेजी शासन उनको कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकती है।
5. 1856 ई० में उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद करते और लोगों को विद्रोह के लिए तैयार करते हुए गाँव-गाँव जाते देखा गया था। अंग्रेज अधिकारी इस बात से चिंतित हो गए कि मौलवी जी के पीछे हजारों लोग जुट रहे है। उन्होंने चिनहाट के प्रसिद्ध संघर्ष में भाग लिया था।



सिपाही क्या सोचते थे?

विद्रोही सिपाहियों की एक अर्जी जो बच गई :
एक सदी पहले अंग्रेज़ हिंदुस्तान आए और धीरे-धीरे यहाँ फौजी टुकड़ियाँ बनाने लगे। इसके बाद वे हर राज्य के मालिक बन बैठे। हमारे पुरखों ने सदा उनकी सेवा की है और हम भी उनकी नौकरी में आए...। ईश्वर की कृपा से और हमारी सहायता से अंग्रेजों ने जो चाहा वो इलाका जीत लिया। उनके लिए हमारे जैसे हजारों हिंदुस्तानी जवानों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ी लेकिन न हमने कभी पैर पीछे खींचें और न कोई बहाना बनाया और न ही कभी बग़ावत के रास्ते पर चले...।
लेकिन सन् 1857 में अंग्रेजों ने ये हुक्म जारी कर दिया कि अब सिपाहियों को इंग्लैंड से नए कारतूस और बंदूकें दी जाएँगी। नए कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी मिली हुई है और गेहूं के आटे में हड्डियों का चूरा मिलाकर खिलाया जा रहा है। ये चीजें पैदल सेना, घुडसवारों और गोलअंदाज फौज की हर रेजीमेंट में पहुँचा दी गई हैं...।
उन्होंने ये कारतूस थर्ड लाइट केवेलरी के सवारों (घुड़सवार सैनिक) को दिए और उन्हें दाँतो से खींचने के लिए कहा। सिपाहियों ने इस हुक्म का विरोध किया और कहा कि वे ऐसा कभी नहीं करेंगे क्योंकि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा...।

प्रश्नः
1. अंग्रेजी सरकार ने 1857 में सैनिकों के सम्बन्ध में क्या आदेश जारी किए?
2. सैनिकों ने 1857 के आदेश का विरोध क्यों किया?
3. 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण क्या था?



उत्तर-
1.अंग्रेजी सरकार ने 1857 में आदेश जारी किया कि अब सिपाहियों को इंग्लैंड से नए कारतूस और बंदूकें दी जाएंगी।
2. सैनिकों को जो नई बंदूकें दी गई थी, उनमें प्रयोग होने वाले कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी लगी हुई थी। सैनिकों ने कहा कि वे इनका प्रयोग कभी नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा करने से उनका धर्म भ्रष्ट हो जाएगा। इस कारण सैनिकों ने इस आदेश का विरोध किया।
3. चर्बी वाले कारतूस।



सिस्टन और तहसीलदार

विद्रोह और सैनिक अवज्ञा के संदर्भ में सीतापुर के देसी ईसाई पुलिस इंसपेक्टर फ्रांस्वाँ सिस्टन का अनुभव हमें बहुत कुछ बताता है। वह मजिस्ट्रेट के पास शिष्टाचारवश मिलने सहारनपुर गया हुआ था। सिस्टन हिंदुस्तानी कपड़े पहने था और आलथी-पालथी मारकर बैठा था। इसी बीच बिजनौर का एक मुस्लिम तहसीलदार कमरे में दाखिल हुआ। जब उसे पता चला कि सिस्टन अवध में तैनात है तो उसने पूछा, "क्या ख़बर है अवध की? काम कैसा चल रहा है?" सिस्टन ने कहा, "अगर हमें अवध में काम मिलता है तो जनाब-ए-आली को भी पता चल जाएगा।" इस पर उहसीलदार ने कहा, "भरोसा रखो, इस बार हम कामयाब होंगे। मामला काबिल हाथों में है।" बाद में पता चला कि - यह तहसीलदार बिजनौर के विद्रोहियों का सबसे बड़ा नेता था।


प्रश्नः
1. सीतापुर का पुलिस इंसपेक्टर कौन था?
2. फ्रांस्वाँ सिस्टन सहारनपुर किससे मिलने गया था?
3. बिजनौर में विद्रोहियों का सबसे बड़ा नेता कौन था?
4. तहसीलदार ने सिस्टन को संभावित विद्रोही क्यों मान लिया था?



उत्तर-
1. फ्रांस्वाँ सिस्टन।
2. मजिस्ट्रेट से।
3. मुस्लिम तहसीलदार।
4. जब तहसीलदार ने सिस्टन से पूछा कि अवध की क्या खबर है तो सिस्टन का यह कहना कि अगर उसे अवध में काम करने का मौका मिलता है तो जनाब को भी पता चल जाएगा। तहसीलदार समझ गया कि सिस्टन संभावित विद्रोही है।

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